छत्तीसगढ़

किसानों की आय में वृद्धि की गारंटी हो रही पूरी

Nil dhankar
23 Nov 2025 10:56 AM IST
किसानों की आय में वृद्धि की गारंटी हो रही पूरी
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रायपुर। प्रदेश के किसानों की आय में वृद्धि की गारंटी पूरी हो रही है, जिसके लिए विष्णुदेव की सरकार ने कृषक उन्नति योजना लांच किया है। कृषक उन्नति योजना का लाभ केवल धान उत्पादकों को ही नहीं, बल्कि दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास जैसी फसलें लेने वाले किसानों को भी मिल रहा है। ऐसे किसानों को प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की आदान सहायता राशि दी जा रही है। इस योजना के तहत धान छोड़कर अन्य फसलों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है ताकि फसल विविधीकरण और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिले। जो किसान एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत हैं और गिरदावरी में उनके रकबे की पुष्टि हो गई है, उन्हें प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की सहायता राशि उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर डीबीटी के माध्यम से दी जा रही है। वहीं, धान बेचने वाले पंजीकृत किसानों को धान की किस्म के अनुसार अधिकतम 15,351 तक की सहायता राशि मिल रही है।


छत्तीसगढ़ के किसान खुशहाल

इन नीतियों से प्रदेश के किसान निरंतर समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में राज्य में सरकार बनते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करते हुए प्रदेश के पंजीकृत किसानों से समर्थन मूल्य पर प्रति एकड़ 21 क्विंटल 31 सौ रूपए प्रति क्विंटल की मान से धान खरीदी कर न सिर्फ किसानों का मान बढ़ाया बल्कि किसानों को उन्नति की ओर ले जाने में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। सरकार के कल्याणकारी फैसलों और प्रोत्साहन से साल दर साल किसानों की संख्या, खेती-किसानी का रकबा और उत्पादन में वृद्धि हो रही है।

सरकार ने किए वायदे को पूरा कर यह बता दिया है कि छत्तीसगढ़ की खुशहाली और अर्थव्यवस्था को सुदृढ करने का रास्ता खेती-किसानी से ही निकलेगा। राज्य सरकार प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी के साथ ही दो साल के बकाया धान बोनस की राशि 3716 करोड रूपए का भुगतान करके अपना संकल्प पूरा किया, इससे प्रदेश के किसानों में खुशी की लहर है। किसानो का मानना है कि राज्य सरकार के फैसलों से यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार किसानों की हितैषी है। खेती-किसानी ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। कृषि के क्षेत्र में सम्पन्नता से ही छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और विकसित राज्य बनाने का सपना साकार होगा।

छत्तीसगढ़ में किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन कृषि ऋण 01 अप्रैल 2014 से उपलब्ध कराया जा रहा है। ऋण की अधिकतम सीमा 5 लाख रूपए तक है। फसल ऋण में नगद एवं वस्तु का अनुपात 60 अनुपात 40 है। सहकारी एवं ग्रामीण बैंकों से व्याज मुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने के लिए खरीफ वर्ष 2024 में 15.21 लाख किसानों को 6912 करोड़ रूपए का अल्पकालीन कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर वितरित किया गया था। वर्ष 2025 में किसानों को 7800 करोड़ रूपए कृषि ऋण वितरित करने का लक्ष्य था। यह किसानों के हित में क्रांतिकारी कदम माना गया।

सिंचाई योजना

सौर सुजला योजना के माध्यम से सरकार ने दूरस्थ वनांचल में जहां बिजली की सुविधा नहीं है, वहां किसानों के खेतों में भी इस योजना के माध्यम से सौर सुजला सिंचाई पंप स्थापित कर सिंचाई की व्यवस्था की गई है। छत्तीसगढ़ में किसानों एवं भूमिहीन मजदूरों की स्थिति में सुधार, कृषि एवं सहायक गतिविधियां के लिए समन्वित प्रयास पर राज्य सरकार का फोकस है। राज्य सरकार ने बजट में कृषक उन्नति योजना के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया, जिसका उद्देश्य कृषि समृद्धि को बढ़ावा देना है। वहीं किसानों के 5 एचपी तक के कृषि पंपों को मुफ्त बिजली आपूर्ति के लिए 3,500 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसी तरह भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत राज्य के 5.65 लाख भूमिहीन मजदूरों को सालाना 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही दलहन एवं तिलहन फसलों समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए 80 करोड़ रुपये तथा फसल बीमा योजना के लिए 750 करोड़ रुपये और मोटे अनाजों के साथ-साथ दलहन, तिलहन, बीज उत्पादन एवं वितरण के लिए कृषक समग्र विकास योजना के लिए 150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह सरकार की किसान हितैषी नियत को दर्शाता है।

तुंहर टोकन मोबाइल ऐप से मिल रही घर बैठे टोकन की सुविधा

प्रदेश के किसान अपनी उपज का उचित मूल्य पाकर संतुष्ट हैं तथा बड़ी संख्या में धान खरीदी केंद्रों में पहुँचकर विक्रय कर रहे हैं। प्रशासन ने सभी केंद्रों में किसानों की सुविधा के लिए बेहतर और सुव्यवस्थित प्रबंध सुनिश्चित किए हैं। जांजगीर चांपा जिले के खरौद के किसान रामसाय यादव आज धान उपार्जन केंद्र खरौद में धान विक्रय के लिए पहुँचे। केंद्र पहुँचने पर जिला कलेक्टर ने उन्हें फूल-माला पहनाकर और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। रामसाय यादव ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इस वर्ष धान खरीदी व्यवस्था पहले से कहीं अधिक बेहतर और किसान-मित्र साबित हो रही है।

उन्होंने बताया कि धान खरीदी से एक दिन पूर्व ही उन्होंने तुंहर टोकन मोबाइल ऐप के माध्यम से घर बैठे ऑनलाइन टोकन प्राप्त कर लिया था। पहले टोकन जारी होने के लिए सोसायटी में घंटों इंतजार करना पड़ता था, परंतु अब डिजिटल व्यवस्था से किसानों को बड़ी राहत मिली है। रामसाय यादव ने लगभग 15 क्विंटल धान का विक्रय किया। उन्होंने बताया कि खरीदी केंद्र में नमी परीक्षण, बारदाना उपलब्धता, धान भराई, तौल और पर्ची निर्गत— सभी प्रक्रियाएँ समयबद्ध और बिना किसी परेशानी के संपन्न हुईं। उन्होंने कहा कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य और प्रति एकड़ 21 क्विंटल खरीदी सीमा जैसे निर्णय किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं, जिससे खेती अब और अधिक आर्थिक रूप से मजबूत हो रही है।

धान खरीदी में आई तेजी़, किसान बिना परेशानी के बेच रहे हैं धान

प्रदेश के सभी जिलों में किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का सिलसिला बिना किसी व्यवधान के जारी है। धान खरीदी केंद्रों में धान की आवक तेज से होने लगी है। सभी समितियों एवं उपार्जन केंद्रों में धान लेकर आने वाले किसानों से बिना किसी रूकावट के धान खरीदी की जा रही है। टोकन तुहर हाथ ऐप द्वारा ऑनलाइन टोकन कटने से लेकर धान तौलाई तक की संपूर्ण प्रक्रिया बेहद ही आसान और सुविधाजनक है।

जिलों के सभी धान उपार्जन केंद्रों में किसान अब बड़ी संख्या में अपने धान बेचने आ रहे हैं। केंद्रों में शेड, पेयजल, लाइट सहित बारदाने की उपलब्धता भी सुनिश्चित की गई है। क्षेत्र के किसानों की सकारात्मक प्रक्रिया ने केंद्रों की व्यवस्थाओं को पारदर्शी साबित किया है। मस्तूरी विकासखंड के जयरामनगर धान उपार्जन केंद्र में धान बेचने आए किसान संजय पाण्डे ने बताया कि वे लगभग 4 से 5 एकड़ में धान की खेती करते हैं एवं प्रतिवर्ष यहां धान बेचने आते हैं। आज उनके टोकन का नंबर लगा है, उन्हें टोकन कटवाने में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आयी है। वे केंद्र की व्यवस्थाओं से पूरी तरह संतुष्ट है। इसी प्रकार खैरा से धान बेचने आए किसान तीजराम साहू ने बताया कि वे 134 कट्टी धान लेकर समिति में धान बेचने पहुंचे हैं। आसानी से टोकन कटा और उनका धान भी समर्थन मूल्य पर विक्रय हो गया है। अब वे बिना किसी चिंता के घर जा सकते हैं। धान उपार्जन केंद्र में अच्छी गुणवत्ता के बारदाने उपलब्ध हैं और यहां के कर्मचारियों का व्यवहार भी सहयोगपूर्ण रहा।

उल्लेखनीय है कि 15 नवंबर से शुरू हुई धान खरीदी के साथ ही अब जिले के उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी की रफ्तार बढ़ी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की किसान-केंद्रित नीतियों और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता ने तस्वीर बदल दी है। आज खरीदी केंद्रों में तकनीक आधारित टोकन व्यवस्था, तेज़ तौल प्रक्रिया और समय पर भुगतान से किसानों में भरोसा बढ़ा है।

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