छत्तीसगढ़

रायपुर में GST फर्जीवाड़े का खुलासा, 141 करोड़ के बोगस कारोबार पर 23 करोड़ की ITC

Shantanu Roy
19 Sept 2026 11:58 AM IST
रायपुर में GST फर्जीवाड़े का खुलासा, 141 करोड़ के बोगस कारोबार पर 23 करोड़ की ITC
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Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में अगस्त्य इंटरप्राइजेस के नाम पर बड़े पैमाने पर जीएसटी फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि कंपनी ने ऐसी फर्मों से करीब 141.74 करोड़ रुपए का खरीदी-बिक्री कारोबार दिखाया, जिनमें से कई के फर्जी या अस्तित्वहीन होने की बात जीएसटी विभाग की जांच में सामने आई है। इन लेन-देन के आधार पर करीब 23.43 करोड़ रुपए की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा किया गया। जीएसटी विभाग की ओर से की गई जांच में बिलों और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया गया।

अधिकारियों ने संबंधित फर्मों के पते पर जाकर भौतिक सत्यापन भी किया। इस दौरान कई फर्मों के दस्तावेजों और कारोबार को लेकर गंभीर विसंगतियां सामने आने का दावा किया गया है। मामले में जीएसटी अधिकारियों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अगस्त्य इंटरप्राइजेस के संचालक अमन अग्रवाल के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, अमन अग्रवाल लाभांडी स्थित सिग्नेचर होम के निवासी हैं और अगस्त्य इंटरप्राइजेस का संचालन करते हैं। विभाग की जांच में आरोप है कि कंपनी ने अलग-अलग फर्मों से खरीदी के बिल दिखाए और इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर आईटीसी का लाभ लिया। जांच के दौरान कुछ दस्तावेजों में ऐसे तथ्य मिले, जिनसे संबंधित कारोबार की वास्तविकता पर सवाल उठे।

मृत व्यक्ति के नाम पर बना किरायानामा
जांच में भिलाई की हुसैनी इंटरप्राइजेस से जुड़े लेन-देन का मामला भी सामने आया। अगस्त्य इंटरप्राइजेस की ओर से हुसैनी इंटरप्राइजेस के साथ 16.61 करोड़ रुपए की बिक्री और 2.99 करोड़ रुपए की आईटीसी दर्शाई गई। फर्म के पते से संबंधित दस्तावेजों में फूल सिंह के नाम का किरायानामा लगाया गया था। जीएसटी विभाग के सत्यापन में सामने आया कि फूल सिंह की वर्ष 2010 में ही मृत्यु हो चुकी थी, जबकि कारोबार के लिए लगाया गया किरायानामा 21 मार्च 2025 का बताया गया है। इस तथ्य ने दस्तावेजों की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसी तरह भिलाई में चूड़ी की दुकान चलाने वाले मोहम्मद इस्लाम ने अगस्त्य इंटरप्राइजेस से कारोबार करने और बैंक खाते में संबंधित लेन-देन होने से इनकार किया। इसके बावजूद इंटरप्राइजेस के नाम पर 11.61 करोड़ रुपए की बिक्री और 2.08 करोड़ रुपए की आईटीसी दर्शाई गई थी।

इन फर्मों के नाम पर दिखाया कारोबार
जांच में जिन फर्मों के साथ कारोबार और आईटीसी का उल्लेख किया गया है, उनमें अंसारी ट्रेडर्स से 30.71 करोड़ रुपए की बिक्री और 5.52 करोड़ रुपए की आईटीसी, ललित ट्रेड लिंक से 29.72 करोड़ रुपए की बिक्री और 5.17 करोड़ रुपए की आईटीसी, अगस्त इंटरप्राइजेस से 22.47 करोड़ रुपए की बिक्री और 4.04 करोड़ रुपए की आईटीसी शामिल है। इसके अलावा विनायक वेंचर्स से 17.95 करोड़ रुपए की बिक्री और 1.36 करोड़ रुपए की आईटीसी, हुसैनी इंटरप्राइजेस से 16.61 करोड़ रुपए की बिक्री और 2.99 करोड़ रुपए की आईटीसी, महावीर इंटरप्राइजेस से 12.67 करोड़ रुपए की बिक्री और 2.27 करोड़ रुपए की आईटीसी तथा यूनिक इंटरप्राइजेस से 11.61 करोड़ रुपए की बिक्री और 2.08 करोड़ रुपए की आईटीसी दर्शाई गई है। तीन अन्य कंपनियों के नाम पर भी आईटीसी का दावा किए जाने की जानकारी सामने आई है।

फर्जी बिलों के जरिए कैसे होता है खेल
जीएसटी फर्जीवाड़े में आमतौर पर पहले जाली दस्तावेजों, गलत पते या फर्जी किरायानामे के आधार पर कंपनियों का पंजीकरण कराया जाता है। इसके बाद वास्तविक माल की खरीद-बिक्री किए बिना कागजों पर बिल तैयार किए जाते हैं। इन बिलों के आधार पर खरीदार कंपनी इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करती है। कई मामलों में कागजी लेन-देन को वास्तविक दिखाने के लिए एक कंपनी से दूसरी और फिर तीसरी फर्म के बीच बिलों का नेटवर्क बनाया जाता है। बाद में जब विभाग दस्तावेजों, बैंक खातों, ई-वे बिल और कारोबार के वास्तविक पते का सत्यापन करता है तो फर्जीवाड़े का पता चल सकता है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जीएसटी विभाग की जांच में सामने आए दस्तावेजों और संबंधित फर्मों के लेन-देन की भी जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर होगी।
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