छत्तीसगढ़

नए नियमों में किसानों और पटवारियों को उलझा रही सरकार: सुरेंद्र वर्मा

Shantanu Roy
14 Oct 2026 12:19 PM IST
नए नियमों में किसानों और पटवारियों को उलझा रही सरकार: सुरेंद्र वर्मा
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छग
Raipur. रायपुर। पटवारियों के मांगो का समर्थन करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शी धान खरीदी के बड़े-बड़े दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि पटवारियों पर बिना संसाधनों और व्यावहारिक व्यवस्था के नए-नए नियम थोपे जा रहे हैं। भुइयां ऐप ब्लॉक करके पीवी ऐप की अनिवार्यता, गिरदावरी और सत्यापन के नाम पर पटवारियों को उलझाया जा रहा है, जिससे किसान अपने ही रकबे के पंजीयन और सुधार के लिए
तहसील कार्यालयों
के चक्कर काटने को मजबूर हैं। छत्तीसगढ़ का किसान खेत में पसीना बहाकर फसल तैयार कर चुका है, लेकिन साय सरकार धान खरीदने की नीयत ही नहीं रख रही है। खरीदी का समय सिर पर है और सरकार ने दुरुस्त व्यवस्था करने के बजाय पटवारियों पर नए-नए अव्यावहारिक नियम थोप दिए हैं। पटवारी अपनी जायज मांगों को लेकर परेशान हैं और किसान अपने रकबे व पंजीयन के लिए दर-दर भटक रहा है। कांग्रेस पार्टी स्पष्ट चेतावनी देती हैकृपटवारियों की जायज मांगों को तुरंत पूरा किया जाए और धान खरीदी की व्यवस्था को सुचारू बनाया जाए, वरना कांग्रेस सड़कों पर उतरकर किसानों के हक की लड़ाई लड़ेगी।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि सरकार द्वारा पटवारियों पर नए-नए अव्यावहारिक नियम थोपना और उनकी जायज मांगों की अनदेखी करना सीधे तौर पर अन्नदाता किसानों को परेशान करने की एक सोची-समझी साजिश है। धान खरीदी की समय-सीमा सिर पर है, लेकिन न तो खरीदी केंद्रों की व्यवस्था दुरुस्त है और ना ही रकबा संशोधन व गिरदावरी का काम पूरा हुआ है। पटवारियों की बुनियादी मांगें जैसेक-संसाधन, नेट भत्ता, सुरक्षा और तकनीकी अव्यावहारिक नियमों में संशोधन, अन्यायपूर्ण नोटिस और निलंबन, वेतन विसंगति और पदोन्नति महीनों से लंबित हैं। सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने के बजाय तानाशाही रवैया अपना रही है। जब राजस्व मंत्री स्वयं यह मान रहे है कि पीवी ऐप में व्यवहारिक दिक्कत है, फिर पटवारियों पर निलंबन की कार्यवाही क्यों? 10 दिन में 30 लाख से अधिक खसरों का पीवी ऐप पर गिरदावरी के लिये दबाव अनुचित है, अन्याय है, अत्याचार है। चर्चा, सुझाव, सहमति और संवाद की गुंजाइश को खत्म कर रही है सरकार।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि इस खींचतान का सीधा शिकार छत्तीसगढ़ का किसान हो रहा है। टोकन कटवाने, रकबा सुधारने और पंजीयन कराने में हो रही देरी से किसान बिचौलियों और कोचियों के हत्थे चढ़ने को मजबूर हो जाएगा। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में किसान को छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान का केंद्र माना जाता था। धान खरीदी की व्यवस्था 1 नवंबर से सुचारू रूप से चलती थी, पटवारियों व राजस्व अमले के साथ सहयोगात्मक रवैया रहता था और किसानों को एक-एक दाना बेचने में कभी कोई दिक्कत नहीं आती थी। आज सरकार में व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सरकार अब छत्तीसगढ़ के अन्नदाता को पटवारी और तहसील कार्यालयों के चक्कर कटवाकर अपमानित कर रही है। पटवारी भी इसी माटी के बेटे हैं, उनकी जायज मांगों को न सुनना प्रशासनिक हठधर्मिता है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि धान खरीदी की तारीख नजदीक है, तो ठीक ऐन वक्त पर अव्यावहारिक नियम थोपकर पटवारियों और किसानों को परेशान करने के पीछे सरकार की क्या मंशा है? पटवारी संघ लंबे समय से संसाधनों और व्यावहारिक समस्याओं को लेकर मांगें कर रहा है, सरकार उनसे संवाद करने के बजाय तानाशाही रवैया क्यों अपना रही है? गिरदावरी और रकबा सुधार के नाम पर किसानों का रकबा काटने की जो गुप्त योजना चल रही है, क्या सरकार इसका जवाब देगी? क्या सरकार का यह रवैया धान खरीदी में देरी करने और किसानों को बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर धान बेचने के लिए मजबूर करने की साजिश नहीं है? कांग्रेस सरकार के दौरान जो व्यवस्था पारदर्शी और सुचारू रूप से चलती थी, उसे इस सरकार ने पूरी तरह पंगु क्यों बना दिया?
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