छत्तीसगढ़

बकरी ने जन्म दिया आठ पैर, तीन कान और दो कमर वाले विचित्र बच्चे को

Shantanu Roy
26 Oct 2025 10:22 PM IST
बकरी ने जन्म दिया आठ पैर, तीन कान और दो कमर वाले विचित्र बच्चे को
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Surajpur. सूरजपुर। सूरजपुर जिले के बोकराटोला गांव में एक बकरी ने जन्म दिया आठ पैर, तीन कान और दो कमर वाले विचित्र बच्चे को, जिसने जन्म के कुछ ही समय बाद दम तोड़ दिया। यह घटना रामकेश साहू के घर हुई, जिसने आसपास के ग्रामीणों में कौतूहल और उत्सुकता पैदा कर दी। जानकारी के अनुसार, बोकराटोला गांव में रामकेश साहू की बकरी ने एक साथ दो बच्चों को जन्म दिया। इनमें से एक बच्चा पूरी तरह से सामान्य और स्वस्थ था। वहीं, दूसरा बच्चा असामान्य शारीरिक संरचना के साथ पैदा हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि इस बच्चे में आठ पैर, तीन कान और दो कमर थीं। जन्म के कुछ ही समय बाद यह बच्चा मर गया।

पशु चिकित्सकों का कहना है कि यह घटना जुड़वां भ्रूण के असमान विकास के कारण हुई। उन्होंने बताया कि भ्रूण के ठीक से विकसित न होने से कभी-कभी इस प्रकार की जैविक विकृति (Biological Deformity) उत्पन्न होती है। यह बेहद दुर्लभ मामला है, जिसमें जुड़वां भ्रूणों में से एक का विकास पूरी तरह नहीं हो पाता और असामान्य शारीरिक संरचना के साथ जन्म होता है। इस विचित्र घटना की खबर फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग रामकेश साहू के घर पहुंचने लगे। ग्रामीणों ने इस बच्चे को देखने के लिए उमड़कर आते हुए अपने मोबाइल फोन में तस्वीरें भी लीं। कई लोगों ने इसे अद्भुत और चमत्कारी बताया, जबकि कुछ ने इसे प्रकृति की जैविक विचित्रता के रूप में देखा।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की जन्मजात असामान्यताएँ प्रायः दुर्लभ होती हैं और इनमें किसी तरह का मानव हस्तक्षेप या अशुभ कारण नहीं होता। यह केवल जैविक और भ्रूण विकास की प्रक्रिया में असामान्यता का परिणाम होता है। रामकेश साहू ने बताया कि उनका परिवार इस घटना को प्राकृतिक घटना मानकर शांतिपूर्वक देख रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे इस विचित्र बच्चे को देखकर अफवाहें न फैलाएँ और बच्चे की मौत का सम्मान करें।

इस घटना ने बोकराटोला और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना दिया है। ग्रामीणों ने कहा कि यह प्राकृतिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बहुत दुर्लभ घटना है और इसे समझना आवश्यक है। स्थानीय लोग अब भी आश्चर्यचकित हैं और इस विचित्र बच्चे की याद में चर्चा करते नजर आ रहे हैं। इस प्रकार की जैविक विचित्रताओं की जानकारी पशु विज्ञान और जैविक अनुसंधान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों का दस्तावेजीकरण और अध्ययन भविष्य में इसी प्रकार की घटनाओं को समझने में मदद करेगा।
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