छत्तीसगढ़

पराली जलाने से रोकने निगरानी दल का गठन

Nil dhankar
12 Nov 2025 4:53 PM IST
पराली जलाने से रोकने निगरानी दल का गठन
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बलौदाबाजार। जिले में धान फसल की कटाई जारी है। कटाई उपरांत किसान पराली (पैरा) को खेतों में जला देते हैं जिससे वायु प्रदुषण बढ़ता है तथा मृदा उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।इससे मिट्टी में उपलब्ध सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते है एवं मिट्टी कठोर हो जाती है।

कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देशानुसार कृषि विभाग के अधिकारियो द्वारा धान कटाई उपरांत पैरा को कृषि यंत्रों एवं वेस्ट-डी कम्पोजर के माध्यम से उचित प्रबंधन हेतु रबी फसल के बुआई हेतु हैप्पी सीडर का उपयोग पराली को न जलाए बिना गेहूं जैसी अगली फसल की सीधी बुवाई करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बताया गया कि यह मशीन पराली को काटकर खेत में बिखेर देती है, जिससे मिट्टी की नमी बनी रहती है तथा खरपतवार भी कम होता है। इसी प्रकार बेलर मशीन का उपयोग धान कटाई उपरान्त बचे हुए पैरा को गोल या चौकोर बंडल बनाने में किया जाता है, जिससे पैरा बिना मजदूरों के कम खर्चे में इकठ्ठा किया जा सकता है जिसका उपयोग पशु चारे के रूप में किया जा सकता है। पैरा से खाद (कम्पोस्ट) बनाने हेतु कृषि विभाग के द्वारा बायो-डी कम्पोजर का वितरण कृषकों को मैदानी अधिकारियों के माध्यम से किया गया है। बायो डी-कम्पोजर के उपयोग से किसान भाई पैरा को कम्पोस्ट खाद में परिवर्तित कर सकते हैं जिसका उपयोग रबी फसलों में किया जा सकता है।

पराली जलाने से रोकने हेतु जिला प्रशासन के द्वारा प्रत्येक ग्राम में पटवारी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, सचिव एवं कोटवार का दल गठन किया गया है जिसके द्वारा सतत् निगरानी किया जाएगा।दल के द्वारा खेतों का निरीक्षण कर फसल अवशेष के उचित प्रबंधन (यथा पशुचारे के रूप में उपयोग करने, कम्पोस्ट खाद बनाने आदि) के संबंध में कृषकों उचित सलाह दिया जायेगा।


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