
श्री सीमेंट में पर्यावरणीय स्वीकृति नियमों से खिलवाड़, जांच के आदेश
पीएमओ के दखल के बाद भी जांच नहीं कर अधिकारी कर रहे मनमानी, भूपेश सरकार के सिस्टम अभी भी कायम
केन्द्रीय पर्यावरण एवं जलवायु मंत्रालय ने छग पर्यावरण मंडल से मांगी रिपोर्ट
EC की शर्तों का उल्लंघन, नियमविरुद्ध संचालन, MOEFCC की कार्यवाही, CECB से रिपोर्ट मांगी गई, CECB के क्षेत्रीय कार्यालय को जांच का निर्देश
सीमेंट कंपनियां रॉ मटेरियल चूना पत्थर की अवैध खनन में सम्मिलित, पर्यावरण अनुमति नहीं होने के बावजूद प्लांट की कैपेसिटी बढ़ाने के लिए मंजूरी कैसे? सीमेंट का उत्पादन बढ़ा किस मटेरियल से?
छग पर्यावरण मंडल के सभी अधिकारी छत्तीसगढ़ की आबोहवा और पर्यावरण नुकसान पहुंचाने का बीड़ा उठाया
अवैध चूना खनन से प्रदेश का पर्यावरण संतुलन बिगड़ा मनमाना अवैध खनन से कंपनियां मालामाल
रायपुर/बलौदाबाजार (जसेरि)। श्री सीमेंट लिमिटेड, खपराडीह द्वारा पर्यावरणीय स्वीकृति नियमों के उल्लंघन मामले में केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल को जांच के आदेश दिये हैं। श्री सीमेंट लिमिटेड, खपराडीह द्वारा पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) की शर्तों के कथित उल्लंघन और पक्षपातपूर्ण नियामकीय संरक्षण को लेकर पूर्व जनपद सदस्य बसंत आडील द्वारा दायर शिकायत (CPGRAM No.MOEAF/E/ /2025/0003215, दिनांक 29/08/2025) को भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC)) ने गंभीरता से हुए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB)) से विस्तृत तथ्यात्मक लेते हुए रिपोर्ट मांगी है।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण मंडल में प्राय: प्राय: सभी बड़े अधिकारी अन्य प्रदेशों के होने के कारण छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता को पर्यावरण का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अधिकारियों को छत्तीसगढ़ की जनता और पर्यावरण से कोई लेना देना नहीं है परदेशियों को सिर्फ छत्तीसगढ़ का शोषण कर बड़े उद्योगों से लगातार वसूली कर अपने अपने प्रदेशों में अपार धन संपदा जमाकर, प्रापर्टी बनाने और भ्रष्टाचार से हासिल रकम को सुरक्षित रखने से ही फुर्सत नहीं मिल रही।
MOEFCC ने दिनांक 6 अक्टूबर 2025 को संयुक्त निदेशक डॉ. सुरेश बाबू पसुपुलेटी के हस्ताक्षर से पत्र जारी कर स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता बसंत आडील द्वारा प्रस्तुत तथ्यों की विस्तृत जांच की जाए तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल अपनी टिप्पणियों/प्रतिक्रियाओं सहित जांच रिपोर्ट मंत्रालय को भेजे, ताकि इस मामले में आगे की कार्यवाही की जा सके। इसके बाद,CECB मु यालय ने अपने क्षेत्रीय कार्यालय को निर्देशित किया कि वे 7 दिवस में जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यह स्पष्ट करता है कि अब नियामक संस्थाएं शिकायत की गंभीरता को समझ चुकी हैं।
हालाकि शिकायत की स्थिति अभी भी CPGRAMS पोर्टल पर सक्रिय (Under Process) है, और मंत्रालय के संबंधित अधिकारी के पास लंबित है। इसी बीच, बसंत आडील द्वारा श्री सीमेंट यूनिट-4 के लिए प्रस्तुत EC आवेदन (दिनांक 13/09/2025) पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई, जिसमें तथ्यों को छिपाने का आरोप है। MOEFCC ने इस आवेदन पर EDSraised स्थिति अंकित की है और कंपनी का जवाब लंबित है। यह घटनाक्रम पर्यावरणीय जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। श्री आडील ने कहा कि यदि समयसीमा में रिपोर्ट नहीं आई तो वे राज्यपाल, पीएमओ और न्यायालय का रुख करेंगे।
प्रधानमंत्री से शिकायत : इससे पहले बसंत आडिल ने प्रधानमंत्री से इस मामले की शिकायत करते हुए बताया था कि श्री सीमेंट लिमिटेड की क्षमता विस्तार एवं यूनिट -3 खपराडीह, तहसील सुहेला, जिला बलौदाबाजार (छ.ग.) की पर्यावरणीय मंजूरी (श्वष्ट) और अनुमतियाँ (ष्टढ्ढरुष्टञ्जह्र) के प्रकरण में गंभीर भ्रष्टाचार नियम उल्लंघन, और रूह्रश्वस्न, ष्टश्वष्टक्च- से कंपनी का मिलीभगत की प्रबल संभावना है। जिसके निष्पक्ष अन्वेषण हेतु सी.बी. आई जांच आवश्यक है।
खण्डवार घटनाक्रम:- खंड- 1. पर्यावरणीय मंजूरी (EC)) जारी दिनांक 11.09.2019 जारीकर्ता - केन्द्रीय पर्यावरण वन एवं जनवायू परिवर्तन मंत्रालय, नई दिल्ली में EIA आकलन की अनियमितताएँ:-
श्री सीमेंट यूनिट -3 को 11.09.2019 को EC जारी की गई। EC Phase-2 के लिए घोषित समय सारणी को छिपाया गया।
कंपनी द्वारा EAC को प्रस्तुत स्पष्टीकरण और दावे।
(जिनमें लाइमस्टोन लिंकेज व उत्पादन सीमा के वास्तविक तथ्य थे भी प्रमुखता से छिपाया गया ) ECआदेश / शर्तो में स िमलित नहीं किया गया।
यह दर्शाता है कि EIA आकलन को कंपनी के पक्ष में प्रभावित किया गया।
CTO/CTE जारी करने में CECB- से कंपनी का मिलीभगत की प्रबल संभावना
तथाकथित दूषित EC दिनांक 11.09.2019 के आधार पर पूर्ण क्षमता का CTE और CTO (अनेको) जारी कराया गया ।
13.5 MTPA क्लिंकर और 8 MTPA सीमेंट उत्पादन की अनुमति मात्र उपलब्ध लाइमस्टोन लिंकेज 12.56 MTPA पर ही जारी किया गया है जो अनुपातिक तौर पर अवैध खनन की ओर स्पष्ट इंगित करता है। जबकि पूर्ण उत्पादन क्षमता हेतु 21.06 MTPA लाईम स्टोन लिंकेज की आवश्यकता प्रतिपादित है ।
यह EIA आंकलन, पर्यावरणीय अनुमति और खनिज नीति सभी का स्पष्ट उल्लंघन है।
चरणबद्ध आपत्तियों को लगातार अनदेखा किया गया।
MOEF. CECB अधिकारियों की भूमिका मिलीभगत को स्पष्ट करती है।
राजस्व हानि व अवैध खनन : कंपनी के पास 12.56 MTPA लाइमस्टोन की ही लिंक्ड क्षमता है । इसके बावजूद 13.5 MTPA क्लिंकर उत्पादन का CTO जारी किया गया।
इस तरह का अनुमोदन न केवल EIA आकलन का उल्लंघन है। बल्कि अवैध खनन और राजस्व चोरी की संभावना भी उत्पन्न करता है
लोकसभा और विधान सभा में तथ्य प्रस्तुतिकरण में विसंगति : 18.08.2025 को लोकसभा में भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए गए, यह नहीं बताया गया कि 5 से अधिक गंभीर शिकायतें भी लंबित है जो मेरे द्वारा प्रेषित है (अन्य का मुझे ज्ञात नहीं )
विधानसभा में स्वीकार किया गया कि CTE विस्तार आवेदन पर प्राप्त आपत्तियाँ और EC जांच का प्रस्ताव MoEF को भेजा गया, किन्तु CECB ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की ।
निष्कर्ष (अनुमानित) और निवेदन:- EC.CTO. CTE अनुमतियों में गंभीर अनियमितताएँ हैं।, MOEF. CFCB और कंपनी के बीच मिलीभगत के पर्याप्त प्रमाण हैं ।, उपलब्ध लाईमस्टोन क्षमता 12.56 MTPA के बावजूद 13.5 MTPA क्लिंकर उत्पादन CTO की स्वीकृति नियमविरुद्ध है ।, तीन वर्षों से शिकायतों के बावजूद कोई निष्पक्ष जांच नहीं हुई ।
यह की गई मांग:- 1. सीबीआई द्वारा उच्च स्तरीय जांच तत्काल कराई जाए। 2. EC, CTE, CTO अनुमतियों एवं उत्पादन आँकड़ों का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाए। 3. कंपनी CECB और MoEF अधिकारियों की भूमिका की जांच कर जि मेदारों पर कडी दंडात्मक कार्रवाई की जाए । 4. अवैध खनन व क्षमता से अधिक उत्पादन से हुई राजस्व हानि की वसूली सुनिश्चित की जाए .





