छत्तीसगढ़

नकली दवा का कारोबार, करोड़ों की कर रहे जीएसटी चोरी

Nilmani Pal
24 Dec 2025 12:14 PM IST
नकली दवा का कारोबार, करोड़ों की कर रहे जीएसटी चोरी
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नकली दवा का व्यापार: छग में बड़े पैमाने पर पैर पसार रहा

देश भर के नकली उत्पादक और एक्सपायरी डेट के उत्पाद को डेट बदलने वाले माफिया सक्रिय, प्रशासन बेखबर

पुलिस विभाग अनजान कार्रवाई कंपनियों के शिकायत के आधार पर

बाहरी प्रदेश के व्यापरियों ने नकली दवा बेचने का गोरख धंधा बड़े पैमाने में जमाया

बिलासपुर, रायगढ़, भाटापारा, कटनी, गोंदिया, जबलपुर के कुछ व्यापारी नकली दवाओं के डॉन बने (माफिया)

देवेन्द्र नगर, गुढिय़ारी, फरिश्ता कॉपलेक्स में बिकती है नकली दवाईयां

जीएसटी चोरी , एक्साइज चोरी से राज्य को 100 करोड़ से ज्यादा का राजस्व नुकसान

छग की जनता नकली दवाई खाने के लिए मजबूर, किसी भी विभाग द्वारा नहीं लिया जा रहा संज्ञान, पुलिस के हाथ बंधे

रायपुर (जसेरि)। राजधानी में प्रतिबंधित दवाओं का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। विभिन्न अस्पतालों के आसपास ऐसी दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे के बेची जा रही है। हालांकि, रसीद मांगने पर दवाएं नहीं दी जाएंगी। वहीं, यह सब जानते हुए भी प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। जनता से रिश्ता ने शुरू से ही नकली सामानों के अलावा शराब, गांजा, भांग, चरस और नशीली वस्तुओं के खिलाफ मुहिम चलाया हुआ है। ब्रांडेड कंपनियों के नाम से नकली वस्तुओं के उत्पादन और बिक्री करने वालों के खिलाफ पुलिस अब छत्तीसगढ़ तमाम डुप्लीकेट कंपनियों की कुंडली खंगालने का काम शुरू कर दिया है। उसके बावजूद नकली सामानों का कारोबार कम होने का नाम नहीं ले रहा है।देश की नामचीन और बड़ी कंपनियों के नाम पर नकली उत्पाद का राजधानी रायपुर गढ़ बन चुका है। सारे नकली सामान आसपास के इलाके से ही यहाँ लाया जाता है, यहां पर सक्रिय सिंडिकेट बड़ी कंपनियों के उत्पादों के हू-ब-हू नकली उत्पाद तैयार कर प्रदेश भर के बड़े बाजारों से लेकर गांव-कस्बों में इसे सस्ते दाम पर खपाया जा रहा है।

निजी अस्पतालों की दवा दुकानों में कालाबाजारी

छत्तीसगढ़ में हो रहे दवा कारोबार में करोड़ों की जीएसटी चोरी का नया खुलासा हुआ है। स्टेट जीएसटी विभाग पिछले सात महीनों से लगातार राज्य के सभी दवा कारोबारियों के जीएसटी रिटर्न की जांच कर रहा है। इस जांच के बाद दावा किया जा रहा है कि दवा कारोबार में पिछले तीन साल में 300 करोड़ से ज्यादा की जीएसटी चोरी हुई है। इसके लिए दवा कारोबारियों और मेडिकल स्टोर वालों ने कई तरह की तरकीब अपनाई है। विभाग ने सौ से ज्यादा ऐसे कारोबारियों की सूची बना ली है, जिनके रिटर्न में सबसे ज्यादा गड़बड़ी पाई गई है। जल्द ही इन सभी व्यापारियों के ठिकानों पर एक साथ छापे मारे जाएंगे। राज्यभर में 20 हजार से ज्यादा छोटे-बड़े दवा कारोबारी है। इसमें रायपुर में कारोबार करने वाले करीब 3 हजार हैं। इनमें 80 फीसदी कारोबारियों का रजिस्ट्रेशन स्टेट जीएसटी में है।

कंपनियों से आधे रेट में खरीद एमआरपी में बेच रहे

दवा कारोबारियों के रिटर्न की जांच के दौरान इस बात का खुलासा हुआ कि रायपुर के लगभग सभी बड़े नामी अस्पताल वाले दवा बनाने वाली कंपनियों से डायरेक्ट डील कर रहे हैं। वे दवा कंपनियों से बल्क में खरीदी करते हैं। इससे उन्हें दवा लगभग आधी और उससे भी कम कीमत में मिल जाती है। लेकिन वे इसी दवा को अपने मेडिकल स्टोर से पूरी एमआरपी में बेचते हैं। इससे अस्पताल वालों को 100 फीसदी से ज्यादा का मुनाफा हो रहा है। लेकिन जब वे जीएसटी रिटर्न दाखिल करते हैं तो बिक्री एमआरपी की कीमत में ही बताते हैं। इससे उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट वापस मिल जाता है।

मेडिकल स्टोर वाले भी नहीं दिखा रहे बिक्री

स्टेट जीएसटी विभाग के अफसरों को इस बात के भी पु ता प्रमाण मिल गए हैं कि जो दवा कारोबारी मेडिकल स्टोर से जितनी दवा बेच रहे हैं उतना टैक्स नहीं दे रहे हैं। बड़े दवा कारोबारी अपने मेडिकल स्टोर से लोगों को बिल जरूर देते हैं। बिल में जीएसटी का उल्लेख भी होता है। लेकिन हर दिन जितनी बिक्री की जाती है उसमें आधे से ज्यादा को डिलिट कर दिया जाता है। 100 फीसदी बिक्री में 25 से 30 प्रतिशत बिक्री को ही दिखाया जाता है। यानी लोगों से पूरा जीएसटी लेने के बावजूद सरकार को नहीं दिया जा रहा है। दवा कारोबारी जितना टैक्स देना चाहते हैं उतने की ही इंट्री की जाती है।

एमआरपी एक जैसी, किसी को शक भी नहीं

दवा कंपनियों से जो दवा खरीदी जाती है वो निजी अस्पताल वाले अपने ही मेडिकल स्टोर से बेचते हैं। जो कीमत उनके मेडिकल स्टोर में होती है उस दवा की कीमत दूसरे मेडिकल स्टोर में भी एक ही होती है। इस वजह से किसी को शक भी नहीं होता है। लेकिन दवा कंपनियों से सीधे बल्क में खरीदी करने की वजह से उन्हें वही दवा आधी से भी कम कीमत में मिल जाती है। यही वजह है कि सभी बड़े निजी अस्पताल वाले बाहर से खरीदी गई दवा को मान्य नहीं करते। वे परिवार वालों से अपने ही मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए दबाव बनाते हैं।

जीएसटी चोरी का नया तरीका

कारोबारियों ने जीएसटी चोरी का नया तरीका ढूंढ लिया है। अब वो ब्रांडेड उत्पाद के मिलते जुलते नाम के नकली उत्पाद बनाने वाली कंपनी से सांठगांठ कर सरकार की आंखों में धूल झोंककर करोड़़ों की कमाई कर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है। नकली उत्पाद को खपाने में पाकिस्तानियों और बांग्लादेशी तस्कर व्यापारियों का हाथ होना बताया जा रहा है। आसपास ब्रांडेड कंपनियों के नकली उत्पाद की फैक्ट्रियां चल रही धड़ल्ले से, स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़, ग्राहकों को सीधा जहर दे रहे हैं। काजू-बादाम, दवाइयां, इलेक्ट्रानिक्स और अन्य खाने-पीने की नकली वस्तुओं के जद में शहरी और ग्रामीण बाजार फूड एंड ड्रग सेप्टी विभाग को राजनीतिक रसूखदारों और छुटभैया नेताओं के संरक्षण के चलते यह कारोबार फलफूल रहा है । नामीकंपनियों के प्रतिनिधियों की शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं, नकली उत्पाद ने ले लिया कुटीर और गृह उद्योग की तरह चल रहा है जिस पर किसी का नियंत्रण नहीं है।

चकरभाटा, भाटापारा तिल्दा अन्य जगह भंडारण का मुख्य केंद्र

राजधानी सहित समूचे छत्तीसगढ़ में न सिर्फ नकली प्रोडक्ट बिक रहे बल्कि इन नकली उत्पादों का निर्माण व पैकेजिंग भी छत्तीसगढ़ विभिन्न शहरों में ही हो रहा है। राज्य के खाद्य एवं औषधि व उपभोक्ता संरक्षण विभाग की उदासीनता से खाद्य पदार्थों से लेकर ब्रांडेड कंपनियों के इलेक्ट्रानिक्स, फैब्रिक्स, कास्मेटिक वस्तुओं के नकली उत्पाद राज्य में आसानी बेचे व बनाए जा रहे हैं। भाटापारा-बिलासपुर नकली उत्पाद का मु य केंद्र राज्य के रायपुर, तिल्दा, भाटापारा, चकरभाठा, भिलाई-दुर्ग, रायगढ़, चांपा, धमतरी, बिलासपुर में नकली उत्पाद बनाने के कुटीर उद्योग चल रहे हैं। कई फैक्ट्रियां भी हैं जहां ब्रांडेड कंपनियों के हूबहू प्रोडक्ट तैयार और पैकेजिंग किए जाते हैं।

नकली सामान खुले आम बेच रहे दुकानदार

जहां मोटे कमीशन के लालच में ये सामान बेच रहे हैं, वहीं नकली से अनजान ग्राहक भी कम कीमत पर सामान पाकर खुश हैं। दरअसल रायपुर में नकली पनीर, नकली खोआ, क्रीम व चायपत्ती, साबुन, ड्राय रूट,कपडे और इलेक्ट्रानिक, इलेक्ट्रिक का जखीरा मिलने के बाद यह साबित हो गया। छत्तीसगढ़ में नकली खाद्य सामग्री, कास्मेटिक से लेकर सारा घरेलू सामान आसानी से खपाया जा रहा है। करोड़ों-अरबों का कारोबार रायपुर समेत प्रदेश भर में ब्रॉडेड कंपनी के नाम पर नकली सामान खपाने का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। अकेले रायपुर में हर महीने करोड़ों के इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण, कास्मेटिक, खाद्य सामग्री, कपड़े समेत अन्य सामान खपाया जा रहा है।नकली सामानों के कारोबार में अवैध विदेशी तस्करों का का एकाधिकार है। प्रदेश में नकली सामानों का बाजार हर जगह सजा हुआ है। राजधानी के बाजार में ड्राय रूट से लेकर कास्मेटिक-कपड़े तक नकली मिल रहा है जिससे शासन को करोडो का चूना लग रहा है। नकली माल बिकने से छत्तीसगढ़ में करोड़ो की जीएसटी चोरी की जा रही है। राजधानी में बड़ी कंपनियों के नकली माल दिल्ली से लाकर खुले आम बेच रहे हैं। नकली कॉस्मेटिक से कैंसर और स्किन की सभी गंभीर बिमारियों को बढ़ रहा खतरा, जान लेवा साबित हो रहीं है। मजे की बात बड़े ब्रांड के नकली कास्मेटिक में प्रिंट बदल कर एक्सपायरी माल भी बेचा जा रहा है बड़े ब्रांड और और बड़ी कंपनी होने के कारण भरोसे में नकली कास्मेटिक की खरीदी महिलाएं करती है दूसरी ओर बेतहाशा मंहगाई के वजह से आम जनता को कम पैसे में सामान खरीदने में रूचि होने लगी है, असली नकली से अब कोई सरोकार नहीं रहा गया है क्योंकि असली सामान की कीमत देने पैसे नहीं होते और नकली सामान हर कंपनी के हूबहू बाजार में कम दामों में मिल जा रहा है। इसी का फायदा नकली सामान बेचने वाले लोग उठा रहे हैं। जनता से रिश्ता पिछले कई अंको में इसके बारे में खबर प्रकाशित कर शासन प्रशासन और आम जनता को आगाह कर रहा है। धड़ल्ले से हो रही नकली उत्पाद की सप्लाई के बारे में जनता से रिश्ता ने पिछले कई अंक में समाचार प्रकाशित किया था। राजधानी में आसपास के छोटे शहरों और कस्बों में निर्मित बड़े ब्रांड के नकली उत्पाद धड़ल्ले से सप्लाई हो रहे है। तिल्दा-नेवरा, भाटापारा, दुर्ग, भिलाई, चकरभाटा सहित राजधानी के आसपास नकली सामान बनाये जा रहे हैं। नकली काजू, बादाम के अलावा दवाइयां और अन्य खाने-पीने की वस्तुयें भी नकली तैयार की जा रही है। फूड एंड ड्रग से टी विभाग द्वारा भी नियमित चेकिंग नहीं की जा रही है जिसके चलते मार्केट नकली उत्पाद से अटा पड़ा है। शिकायत करने पर स बंधित जगह पर छापेमारी की जाती है, लेकिन वह भी औपचारिकता निभाने के रूप में होती है। जबकि नियमित रूप से चेकिंग करना फूट एंड ड्रग से टी विभाग की जि मेदारी का हिस्सा है। पुलिस विभाग में भी नकली सामानों की जांच करने के लिए अलग से विंग नहीं है, जो नकली माल की जांच करे। आम लोगों के साथ ब्रांडेड कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा की गई शिकायत के आधार पर जांच के नाम पर खानापूर्ति हो रही हैं। क्योंकि पुलिस अपना मूल काम कानून व्यवस्था पर ध्यान रखे या इन नकली सामान बेचने वालों की खबर ले। देखा ये भी जा रहा है कि नकली उत्पाद की फैक्ट्रियां छुटभैये नेताओं की होती है या ये फैक्ट्री वाले इन छुटभैये नेताओं से नज़दीकी बना कर रखते हैं ताकि समय पर ये इन अवैध गतिविधियों को संचालित करने में इनकी मदद करें।

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