
ब्लैकमेलर पत्रकारों के खिलाफ रायपुर पुलिस ने दर्ज किया एफआईआर
साल 2017 के बाद राज्य में ऐसे कई फर्जी पत्रकार हुए सक्रिय, जमीन-बिल्डर-सट्टा और गांजा माफिया का मिल रहा संरक्षण
भूपेश सरकार के समय छत्तीसगढ़ में 5 हजार से ज्यादा न्यूज वेब साइड भू-माफिया, सट्टा माफिया, नशा माफिया और होटल पार्टी माफिया द्वारा संचालित किया जा रहा
माफियाओं की न्यूज वेब साइड सरकार-अधिकारियों को बेतुकी और फर्जी खबर लगाकर फर्जी पत्रकारों द्वारा आफिसों में ब्लैकमेलिंग के उद्धेश्य से लगाते हैं चक्कर
अधिकांश ब्लैकमेलिंग न्यूज वेब साइड सरकार को बदनाम करने के लिए विपक्षी पार्टी द्वारा उपयोग की जा रही
पहले के समय में 20 और 25 कापी अखबार छापकर ब्लैकमेलर और फर्जी पत्रकार इसी तरह का कारनामा करते थे अब स्वरूप बदल गया कम खर्च 20 हजार में न्यूज वेब साइड तैयार कर डिजिटल जमाने का स्वरूप अपना लिया
विज्ञापन के लिए दबाव बनाकर अपने अखबार और न्यूज वेब साइड के लिए दादागिरी करना और अभद्र व्यवहार करना पत्रकार का नहीं माफियांओं का है कारनामा, जो सरकार को कटघरे में खड़ेकर कर रहे बदनाम
रायपुर (जसेरि)। राजधानी रायपुर के संवाद कार्यालय में अपर संचालक के साथ हुए दुव्र्यवहार के मामले ने प्रशासन और पत्रकारिता जगत में हलचल मचा दी है। रायपुर पुलिस ने बीती रात इस घटना के संबंध में चार अज्ञात फर्जी पत्रकारों के खिलाफ गंभीर धाराओं में अपराध दर्ज किया है। मामले के अनुसार, ये फर्जी पत्रकार स्वयं को एक समाचार पत्र से जोडक़र कार्यालय में उपस्थित हुए थे और अपर संचालक के साथ दुव्र्यवहार करने लगे। जब अपर संचालक ने इस व्यवहार का विरोध किया, तो फर्जी पत्रकार नाराज हो गए और उन्होंने हाथापाई तक शुरू कर दी।
मुख्यमंत्री से मिला छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन और जनसंपर्क अधिकारी संघ का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल कई सालों से सक्रिय है ये फर्जी पत्रकार पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। विगत वर्षों में विशेषकर 2017 के बाद, राज्य में ऐसे कई फर्जी पत्रकार सक्रिय रहे हैं, जो ब्लैकमेलिंग और भ्रष्टाचार के जरिए लाभ कमाते हैं। ये फर्जी पत्रकार जमीन माफिया, बिल्डर माफिया, सट्टा माफिया और गांजा माफिया जैसे अपराधी तत्वों के कर्मचारियों के मीडिया हाउस के माध्यम से काम करते हैं। इनके मुख्य हथकंडे में फर्जी वेबपोर्टल या अखबार चलाकर शासन और प्रशासन से विज्ञापन प्राप्त करना और उसे ब्लैकमेलिंग के रूप में इस्तेमाल करना शामिल है।
पूर्व में इन फर्जी पत्रकारों की गतिविधियाँ अधिक संगठित थीं। पहले ये लगभग अखबार की 50 कॉपी छापते थे और अब तरीका बदल गया अब ये लोग 20 से 30 हज़ार रुपए में फर्जी वेबपोर्टल बनाकर ब्लैकमेलिंग का काम करते है और अपने आपको पत्रकार बताकर सरकारी विभागों और अधिकारियों के सामने दबाव बनाने का काम करते थे। उनका तरीका यह होता था कि किसी भी अधिकारी या विभाग के खिलाफ उटपटांग या अपमानजनक खबरें प्रकाशित करने की धमकी देकर विज्ञापन दिलाया जाता। इस प्रक्रिया में अधिकारियों को फर्जी पत्रकारों के साथ बातचीत का अवसर मिलता और वे उनके करीब आते। इसी कारण कई बार अधिकारियों के सामने ऐसे अप्रिय घटनाक्रम सामने आते रहे हैं। अब ये सिलसिला फर्जी वेबसाइटों के जरिए फर्जी पत्रकारों ने ब्लैकमेलिंग करने का काम बड़े पैमाने में शुरू कर दिए है।
मौजूदा मामले में गिरफ्तार फर्जी पत्रकारों की पहचान अभी तक अज्ञात है। पुलिस ने बताया कि आरोपित पहले भी ब्लैकमेलिंग के मामलों में जेल की हवा खा चुके हैं। इनके पास से संबंधित दस्तावेज और प्रमाण बरामद किए जा रहे हैं, ताकि पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया जा सके। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि इस तरह की किसी भी घटना को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और अधिकारियों के सम्मान के साथ कोई भी छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस घटना के बाद जनसंपर्क कार्यालय नवा रायपुर में प्रवेश प्रक्रिया में भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अब से किसी भी पत्रकार या अखबार कार्यालय के कर्मचारी को पूर्व अपॉइंटमेंट के बिना प्रवेश नहीं दिया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल अपॉइंटमेंट मिलने के बाद ही किसी भी पत्रकार को कार्यालय में एंट्री दी जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य फर्जी पत्रकारों और ब्लैकमेलरों को कार्यालय से दूर रखना और वास्तविक पत्रकारों के कामकाज को सुरक्षित करना है। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क कार्यालय में हमले पर संघ ने की कड़ी निंदा, दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि फर्जी पत्रकारों की इस तरह की गतिविधियाँ न केवल अधिकारियों की प्रतिष्ठा को प्रभावित करती हैं, बल्कि पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ भी हैं। मीडिया और पत्रकारिता जगत में ईमानदारी और सत्यनिष्ठा का पालन करने वाले पत्रकारों के लिए यह संदेश है कि फर्जी और ब्लैकमेलिंग करने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल प्लेटफॉर्म और वेब पोर्टल के माध्यम से ऐसे फर्जी पत्रकारों की संख्या बढ़ी है। ये अपने आप को प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों से जोडक़र, अधिकारी और जनता दोनों के लिए भ्रम उत्पन्न करते हैं। इनका मुख्य लक्ष्य विज्ञापन और आर्थिक लाभ प्राप्त करना होता है, जिसके लिए वे झूठी खबरें और धमकियां भी देते हैं। इस प्रकार की घटनाओं ने प्रशासन और पत्रकारिता जगत दोनों को सचेत किया है। रायपुर पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दोषियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया और जांच शुरू कर दी है।
वहीं, प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े नियम और सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने का निर्णय लिया है। राज्य और राजधानी रायपुर के लिए यह एक चेतावनी है कि फर्जी पत्रकारिता और ब्लैकमेलिंग जैसी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों और पत्रकारों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के लिए प्रशासन लगातार सतर्क है और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।





