छत्तीसगढ़

कांग्रेस संगठन में गुटबाजी, चुनावी तैयारियों पर उठे सवाल

Nilmani Pal
10 Jun 2026 10:58 AM IST
कांग्रेस संगठन में गुटबाजी, चुनावी तैयारियों पर उठे सवाल
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भ्रष्टाचारी अधिकारी, भ्रष्ट ठेकेदार, सट्टा-जुआ के मास्टमाइंड कांग्रेस के प्रमुख कर्ताधर्ता

छुटभैय्ये गैर कांग्रेसी विचारधारा वाले परिवार से आए अधिकांश नेताओं का कब्जा

विगत कई विधानसभा चुनाव से स्पष्ट है कि प्रदेश में निर्दलीय प्रत्याशियों ने कांग्रेस का खेल खराब किया

पुराने कट्टर कांग्रेसी परिवार घर बैठे, जो नकली कांग्रेसियों को सबक सिखाने के लिए मौके की तलाश में रहते हैं...

कांग्रेस का इतिहास गवाह है हमेशा कांग्रेस के प्रत्याशियों को कांग्रेसियों ने ही चुनाव में हराया है चाहे वह निर्दलीय प्रत्याशियों को समर्थन देनकर ही क्यों न हो

कांग्रेस के अधिकांश वरिष्ठ नेता प्रदेश की राजनीति में पार्टी में कौन सी बीमारी है वह समझने में नाकाम है

नए नवेले गैर कांग्रेसी परिवार के दिशाहीन युवकों का पार्टी में जमावड़ा लगातार बढ़ रहा

पप्पू फरिश्ता

रायपुर। कांग्रेस संगठन इस बार भी चुनाव में सरकार बनाने के लिए गंभीर नहीं है। पार्टी में पुराने और सच्चे कांग्रेसी पूरे परिवार सहित घर बैठे हैं। वहीं, पार्टी में कुछ दोगले और बेईमान नेता हैं, जो भ्रष्टाचारी परिवारों से आए हैं और पैसे के दम पर पार्टी संगठन में कब्जा करके बैठ गए। इसी कारण पूरे प्रदेश में कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी से दूरी बनाने का मन बना लिया है।

पार्टी संगठन में वर्तमान में अधिकांश प्रमुख नेताओं के चेले-चपाटे या उनके समर्थक नंबर दो के धंधों जैसे गांजा, सट्टा, जुआ और अवैध क्लबों में उलझे हुए हैं। ज़्यादातर नेता इसी पृष्ठभूमि से आए हैं। कांग्रेस में गुटबाज़ी भी इसी पैसे की बंदरबांट में होती है।

पार्टी के लिए कुछ कार्य करना-जनहित के मुद्दे उठाना, महंगाई या कानून व्यवस्था पर ध्यान देना, शहर की सफाई या जागरूकता अभियान चलाना—इन पर कोई भी गुट का नेता ध्यान नहीं दे रहा। राज्य में कांग्रेस चार गुटों में बटी हुई है और मतदाताओं की नब्ज़ टटोलने में नाकाम है।

अधिकांश गुट वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष के गुट से नाराज़ हैं और नहीं चाहते कि सरकार फिर से कांग्रेस की बने, क्योंकि वे सोचते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष सारा विजयी श्रेय खुद लेंगे। इसी कारण पार्टी दिन प्रतिदिन जनता से दूर होती जा रही है। जनता के मुद्दे, उनकी तकलीफ़ और उनकी आवाज़ कांग्रेस में समाप्त होती जा रही है।

पुराने और सच्चे कांग्रेसी अब घर बैठे हैं, जबकि कुछ नेता अवैध गतिविधियों में व्यस्त हैं। यदा-कदा खबर आती है कि कुछ पुराने कार्यकर्ताओं को निर्दलीय रूप में चुनाव में खड़ा किया जाता है ताकि कांग्रेस डिस्टर्ब हो और चुनाव हार जाए। सूत्रों के अनुसार, इस बार पुराने पूर्व विधायक और कांग्रेस के कुछ दिग्गज नेता भी बड़े पैमाने पर पूरे प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उ मीदवार के रूप में खड़े होंगे। इसका परिणाम यह होगा कि कांग्रेस विधानसभा चुनाव में पूरी तरह से पीछे रह जाएगी और कांग्रेस को ही कांग्रेस से नुकसान होगा।

पुराने कांग्रेसियों ने विगत दिनों दिल्ली में श्रीमती सोनिया गांधी के निवास जाकर वरिष्ठ नेता ने रोते हुए संपूर्ण प्रदेश की वास्तविक स्थिति का ब्यौरा दिया। और बड़े दुख के साथ स्पष्ट बड़े वर्तमान नेताओं की शिकायत के साथ पुलिंदा भी थमाया। और यह भी कहने से नहीं चूके वर्तमान भाजपा अपने आगामी विधानसभा चुनाव में जोर शोर से भीड़ गई है। लेकिन कांग्रेस पार्टी अपनी नेता बदलने में ही उहापोह की स्थिति में है।

मप्र में भी अपनी ही मुखबिरी के कारण मात खा गई कांग्रेस

प्रदेश में गुटबाजी पड़ी भारी, तेलंगाना के कोर्ट नोटिस की जानकारी कांग्रेस

के मुखबिर ने ही भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय को उपलब्ध कराया

भोपाल। सोमवार को मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उ मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया। चुनाव अधिकारियों ने पाया कि उनके नामांकन पत्रों के साथ जमा किए गए हलफनामे में एक मामले से जुड़ी जानकारी कथित तौर पर छिपाई गई थी। यह घटनाक्रम तब हुआ, जब बीजेपी नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने औपचारिक आपत्ति दर्ज कराते हुए नटराजन की उ मीदवारी रद्द करने की मांग की। बीजेपी का आरोप था कि लीडर नेता ने तेलंगाना में चल रहे एक अदालती मामले की जानकारी अपने चुनावी हलफनामे में नहीं दी थी, यह एक जरूरी दस्तावेज है, जिसे उ मीदवारों को नामांकन दाखिल करते समय जमा करना होता है। पार्टी ने तर्क दिया कि जानकारी न देना ज़रूरी जानकारी छिपाने के बराबर है और इसके आधार पर उनका नामांकन रद्द किया जाना चाहिए। मीनाक्षी नटराजन ने नामांकन रद्द होने के बाद बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जब बीजेपी ने देखा कि कांग्रेस का पूरा विधायक दल एकजुट है और सभी विधायक लगातार पार्टी बैठकों में शामिल हो रहे हैं, तब उसे समझ आ गया कि खरीद-फरो त की राजनीति सफल नहीं होगी। उनके मुताबिक, बीजेपी ने तीसरा उ मीदवार उतारकर पहले ही यह दिखा दिया था कि उसकी राजनीतिक शुचिता किस स्तर पर पहुंच चुकी है। जब उन्हें लगा कि कांग्रेस के विधायकों में कोई टूट नहीं है, तब इस स्थिति से निपटने के लिए एक फर्जी बात पेश कर दी। मीनाक्षी ने कहा कि जिस मामले को आधार बनाकर उनका नामांकन रद्द किया गया, वह केवल एक कानूनी नोटिस था। उस पर न तो किसी अदालत ने संज्ञान लिया था और न ही कोई मामला दर्ज हुआ था।

उन्होंने कहा कि वह मामला प्री-कॉग्निसेंस स्टेज पर था, इसलिए उसे चुनावी हलफनामे में दर्ज करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोई कानूनी मामला ही अस्तित्व में नहीं है, तब जानकारी छिपाने का आरोप कैसे लगाया जा सकता है। उनके मुताबिक, अगर किसी मामले में अदालत संज्ञान ले चुकी होती या उनके खिलाफ आरोप तय हो चुके होते और वह उसे छिपातीं, तब यह आरोप उचित माना जा सकता था।

मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द होने की खबर सामने आई। नामांकन खारिज होने के विरोध में कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग के बाहर अनोखा प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कमलेश्वर पटेल समेत कई वरिष्ठ नेता चुनाव आयोग के गेट पर ही ज़मीन पर लेट गए और विरोध दर्ज कराया।

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