छत्तीसगढ़

रायपुर प्रेस क्लब की गुटबाजी चरम सीमा पर

Nilmani Pal
14 Aug 2025 11:32 AM IST
रायपुर प्रेस क्लब की गुटबाजी चरम सीमा पर
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चुनाव जल्द कराने की मांग को लेकर नया पैंतरा

पूर्व अध्यक्ष दामू सहित कई वरिष्ठ पत्रकार लगा रहे दम

रायपुर। रायपुर प्रेस क्लब जिसका पंजीयन क्रमांक 1129 /68 है, रायपुर प्रेस क्लब के प्रबंधकारिणी का निर्वाचन फरवरी 2024 में संपन्न किया जाकर दिनांक 17/2/ 2024 को परिणाम घोषित किए गए थे दिनांक 17/2/2024 से 16/2/2025 तक उक्त कार्यकारिणी द्वारा अपना कार्यकाल पूर्ण किया जा चुका है, किंतु अब तक उक्त कार्यकारिणी द्वारा विधिवत आगामी चुनाव/ निर्वाचन की घोषणा नहीं की है, जबकि कार्यकारिणी द्वारा अपने कार्यकाल के पूर्व ही आम सभा ली जाकर विधि अनुसार चुनाव की घोषणा की जानी थी। पूर्व पदाधिकारी तथा कई वरिष्ठ पत्रकार संगठित होकर लगातार सभी जगह ये मांग कर रहे है कि रायपुर प्रेस क्लब की वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल पूर्ण होने के 5 माह बाद भी निर्वाचन की घोषणा न किया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगा है।

संस्था के पदाधिकारियो द्वारा जानबूझकर आगामी चुनाव की घोषणा नहीं की जा रही है, जिससे आवश्यक है कि माननीय पंजीयक महोदय द्वारा अपने शक्तियों का प्रयोग करते हुए अविलंब रायपुर प्रेस क्लब में निर्वाचन कराया जावे। इसी तरह की मांग लिखित में भी संबंधित संस्थाओं में दिया जाना बताया गया और इसके लिए प्रेस क्लब के सदस्यों ने रजिस्टार से मुलाकात कर सहायक रजिस्टार की उपस्थिति में चुनाव कराए जाने की मांग की है । गौरतलब हो कि रायपुर प्रेस क्लब का कार्यकाल 17 फरवरी को समाप्त हो चुका है। पांच माह और बीत जाने के बाद भी किसी प्रकार की घोषण नहीं की गई। प्रेस क्लब चुनाव नहीं करवाए जाने को लेकर अध्यक्ष के खिलाफ कई पूर्व पदाधिकारियो के साथ-साथ उन सदस्यों ने भी मोर्चा खोल दिया है। जिन्हें बिना कारण बताएं सदस्यता से हटा दिया गया है। मामला फर्म एंड सोसाइटी तक पहुंच गया और इसकी सुनवाई 29 जुलाई 2025 को चुकी है, इसका परिणाम जल्द आने की संभावना है। पूर्व पदाधिकारियों के अनुसार रजिस्ट्रार ने कई सवाल दागे लेकिन वर्तमान अध्यक्ष, पदाधिकारी संतुष्टि पूर्वक जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने कहा व्यवस्था सुधारेंगे। जब व्यवस्था एक साल में नहीं सुधार पाये तो अब क्या सुधरोगे एक साल में केवल एक ही काम हुआ है बिना नोटिस जारी किए पूर्व अध्यक्ष दामू अंबेडारे का निलंबन और उसे भी रजिस्टार ने कोरम के अभाव में नकार दिया द्य पूर्व अध्यक्ष ने दावा किया है कि पूर्ववर्ती सरकार ने 309 पत्रकारों को कैबिनेट मंत्रिमंडल की बैठक में आवास उपलब्ध कराया था,जिसे मंत्रिमंडल ने अपनी स्वीकृति दी थी, जिसका भूमि पूजन भी किया गया था जिसके लिए पूर्ववर्ती सरकार ने 7 करोड रुपए की राशि स्वीकृत भी कर दी, रायपुर विकास प्राधिकरण ने कमल विहार योजना की प्रक्रिया को भी चालू कर दी गई थी। वर्तमान पदाधिकारी ने इस फाइल को मूवमेंट करना था जो नहीं कर नहीं पाये जिसके चलते 7 करोड रुपए की राशि लैप्स करा दी गई, जिससे पत्रकारों का काफी नुकसान हुआ इस नुकसान के पीछे वर्तमान अध्यक्ष और पदाधिकारी का हाथ है, ना ही सदस्यों को जमीन मिल पाया न हीं मकान। पूर्व पदाधिकारियों ने ये भी कहा कि वर्तमान अध्यक्ष का केवल एक ही टारगेट रहा पूर्व अध्यक्ष दामू अंबेडारे को हटाना रहा है। वरिष्ठजनों को सदस्यता से हटा कर दरकिनार कर साल भर में केवल यही कार्य किया गया है।

आंदोलन नाम मात्र : वर्तमान अध्यक्ष ने पत्रकारों के साथ हुईं मारपीट जैसी घटनाओं पर एक्शन लिया जिससे पत्रकारों के अंदर एक नई ऊर्जा जागी लेकिन यहां भी माँ -मौसी का खेल देख पत्रकार फिर बिखरने लग गए द्य बता दें कि कुछ माह पहले अशोका बिरियानी सेंटर में पत्रकारों के साथ हुए विवाद के चलते उसे सील करवा दिया गया था, लेकिन चंद दिनों बाद ही मामले को निपटाकर वापस खोल दिया गया। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर और पत्रकारों के साथ विवाद को लेकर जो आंदोलन किए गए वह भी एक साजिश के तहत नाकाम हुई। आंदोलन केवल मीडिया के गिने चुने पत्रकारों के लिए ही होता रहा है।

तत्कालीन अध्यक्ष के खिलाफ रोष

तत्कालीन अध्यक्ष ने केवल चुनाव नहीं कराया और 5 वर्ष तक लगातार प्रेस क्लब की कुर्सी में जमें रहे इसलिए सदस्यों में रोष था। जिसका फायदा निर्वृतमान अध्यक्ष व उनकी टीम ने सोशल मीडिया में और अन्य पत्रकारों को अपने पक्ष में कर पद हासिल कर लिया लेकिन वह भी उन्हीं की राह पर अब चलने लगे हैं। वही पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष दामू अंबेडारे से यह भी उम्मीद है कि अगर अध्यक्ष होता तो कम से कम फ्लैट, जमीन मिलने की उम्मीद तो जागी रहती थी।

पूर्व पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि फर्म एंड सोसाइटी के रजिस्टार, वर्तमान अध्यक्ष और पूर्व पदाधिकारी के बीच जमकर सवाल जवाब होते रहे हैं। जहां पर कई दस्तावेज में अध्यक्ष कमजोर साबित हुए। और रजिस्टार के दफ्तर से बाहर निकलते ही सदस्यों के सामने स्पष्ट रूप से कह दिया कि मैं चुनाव नहीं कराऊंगा। इससे यह साफ है कि रणनीति पहले से तय थी। अब फैसला आना है सदस्यों को उम्मीद है कि पत्रकारों के हित में अच्छे परिणाम साबित होंगे। दूसरी ओर वर्तमान प्रेस क्लब अध्यक्ष व्यवस्था औऱ खामियों के खिलाफ चुनाव में जीत कर आए थे, और उन्होंने सभी खामियों को दूर करने का और प्रेस क्लब को सुचारू और अच्छे तरीके से संचालन करने का अपना चुनावी वादा किया था, जिसके चलते बड़े अंतरों वे चुनाव भी जीते। और अपने तेवर भी दिखाए। प्रेसक्लब की वर्तमान राजनीतिक खींचातानी और गुटबाजी के चलते बहुत सारे नियिमत पत्रकारों का हक वंचित हो रहा है और कई नए पत्रकार जिनको पत्रकारिता में भविष्य दिखता है उनका भी गुटबाजी के चक्कर में नुकसान हो रहा है। पत्रकारों के हित को देखते हुए औऱ पत्रकारों की भविष्य कीा योजनाओं को योजनाबद्ध ढंग से क्रियान्वयन करने हेतु एक अच्छे मजबूत संगठन की आवश्यकता है। जिससे कि नए पुराने सभी पत्रकारों को हक से वंचित न होना पड़े। तथा सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पत्रकारों को मिल सके। एैसा ही मानना अधिकांश सदस्यों का है ।

- इस संबंध में प्रेसक्लब अध्यक्ष प्रफुल्ल ठाकुर से उनका पक्ष और सच्चाई जानने के लिए मोबाइल पर काल किया गया लेकिन उन्होंने काल रिसीव नहीं किया।

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