छत्तीसगढ़

आबकारी अधिकारी नीलम किरण सिंह पर लगा आरोपियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप

Shantanu Roy
26 Feb 2026 9:09 PM IST
आबकारी अधिकारी नीलम किरण सिंह पर लगा आरोपियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप
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छग

रायपुर में नकली शराब मामले पर गंभीर आरोप

भाजपा शासन को बदनाम करने की साजिश, भूपेश सरकार का सिस्टम कायम

भारतीय जनता पार्टी को बदनाम करने की आबकारी विभाग की साजिश
कांग्रेस के छुटभैया नेताओं की मिलीभगत से बिक रही नकली शराब
साय सरकार की छवि धूमिल करने का किया जा रहा गहरा प्रयास
आबकारी विभाग पर कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप
लालपुर शराब भट्टी प्रकरण चर्चा में
नकली शराब जांच के दौरान कर्मचारियों को निशाना बनाने का आरोप
अधिकारी नीलम किरण सिंह पर अमानवीय व्यवहार के आरोप
हिरासत में मारपीट और दुर्व्यवहार का दावा
आलोक कुमार कुर्रे ने गंभीर आरोप लगाए
पानी के नाम पर अपमानजनक कार्रवाई की शिकायत

Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित प्रदेशभर में नकली शराब के खिलाफ चल रही आबकारी विभाग की कार्रवाइयों को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि कार्रवाई के नाम पर छोटे स्तर के कर्मचारियों को हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया जा रहा है, जबकि कथित रूप से जिम्मेदार उच्च स्तर के व्यक्तियों पर अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई जा रही। इस संदर्भ में लालपुर स्थित शराब भट्टी से जुड़ा एक मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें पीड़ित पक्ष ने अधिकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। मामले से जुड़े व्यक्तियों का दावा है कि वर्ष 2025 में नकली शराब के विरुद्ध आबकारी और उड़नदस्ता टीम की संयुक्त कार्रवाई के दौरान मुख्य सुपरवाइज़र के बजाय कर्मचारियों को निशाना बनाया गया। हिरासत में लिए गए कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पूछताछ के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई। इन आरोपों में विशेष रूप से आबकारी विभाग की एक अधिकारी नीलम किरण सिंह का नाम लिया गया है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि हिरासत में अमानवीय व्यवहार किया गया, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

पीड़ित पक्ष के प्रतिनिधि आलोक कुमार कुर्रे ने जनता से रिश्ता को बातचीत में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके साथ पूछताछ के दौरान अपमानजनक व्यवहार किया गया। उन्होंने दावा किया कि “पानी मांगने पर पेशाब पिलाई गई है,” और संबंधित कर्मचारियों द्वारा मारपीट भी की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में अवैध और नकली शराब के खिलाफ समय-समय पर छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग द्वारा अभियान चलाए जाते रहे हैं। विभाग का कहना रहा है कि नकली शराब, अवैध होलोग्राम, और अवैध बिक्री के नेटवर्क पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। लेकिन हालिया आरोपों ने इन अभियानों की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कई शराब भट्टियों में कथित रूप से अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिनमें नकली शराब, ‘पार्ट-2’ शराब और बिना अधिकृत होलोग्राम वाली शराब की बिक्री शामिल है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि कार्रवाई चयनात्मक तरीके से की जाती है। हालांकि, इन दावों के समर्थन में आधिकारिक दस्तावेज या ठोस साक्ष्य सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे मामलों में आरोपों की सत्यता स्थापित करने के लिए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच अत्यंत आवश्यक है। यदि हिरासत में दुर्व्यवहार या अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो यह गंभीर विषय है और संबंधित एजेंसियों को संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए। दूसरी ओर, अधिकारियों का पक्ष भी सामने आना उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट हो सके।
इसी बीच, एक अन्य शिकायत ने भी ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें आर्थिक विवाद और कथित धमकी का मुद्दा उठाया गया है। अविनाश कुमार बनर्जी, निवासी न्यू पुलिस लाइन दुर्ग, ने शेखर बंजारे उर्फ चैनदास बंजारे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप है कि एक सप्ताह में राशि लौटाने के आश्वासन पर 1,80,000 रुपये दिए गए थे, लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी रकम वापस नहीं की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह लेन-देन कई प्रत्यक्षदर्शियों की मौजूदगी में हुआ था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि राशि वापस मांगने पर कथित रूप से धमकी दी जा रही है। शिकायतकर्ता ने सुरक्षा की मांग करते हुए कहा है कि यदि उन्हें किसी प्रकार की जान-माल की हानि होती है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित व्यक्ति की होगी।
इस मामले में भी आधिकारिक जांच और तथ्यात्मक पुष्टि की प्रतीक्षा है। दोनों प्रकरणों ने कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और नागरिक अधिकारों के मुद्दे को फिर से केंद्र में ला दिया है। आमतौर पर ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां दस्तावेजी साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और तकनीकी तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचती हैं। फिलहाल संबंधित आरोपों और शिकायतों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना शेष है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि यदि आरोप गंभीर हैं, तो विभागीय स्तर पर आंतरिक जांच या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जा सकती है। इससे न केवल तथ्यों की स्पष्टता होगी, बल्कि सार्वजनिक संस्थानों की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी। नागरिक संगठनों का कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि कानून का शासन प्रभावी रूप से कायम रह सके। अंततः, यह स्पष्ट है कि किसी भी कार्रवाई या शिकायत के मामले में अंतिम सत्य जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्थापित होता है। जब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं होती, आरोपों को दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। संबंधित एजेंसियों और विभागों की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने का इंतजार है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की शराब दुकानों से जुड़ा एक नया घालमेल सामने आया है, जिसने उपभोक्ता अधिकारों और आबकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ग्राहक ने प्रीमियम लिकर शॉप से शराब की बोतल खरीदने के बाद गंभीर अनियमितता का दावा किया। ग्राहक के अनुसार, शराब की बोतल के बॉक्स पर छपे वास्तविक अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के ऊपर अलग से बढ़ी हुई कीमत का स्टिकर लगाया गया था, और भुगतान उसी बढ़े हुए रेट के अनुसार लिया गया। ग्राहक ने बताया कि बोतल के पैकेज पर मूल MRP 750 रुपये
अंकित
था, जबकि ऊपर चिपकाए गए स्टिकर पर 920 रुपये लिखा था। घर पहुंचकर जब ग्राहक ने स्टिकर हटाया, तो नीचे छपा वास्तविक रेट देखकर उसके होश उड़ गए। एक बोतल पर करीब 170 रुपये अधिक वसूले जाने का आरोप लगाया गया है। उपभोक्ता का कहना है कि यदि एक दुकान में ऐसा हो सकता है, तो अन्य दुकानों में भी इसी तरह की अनियमितता से इनकार नहीं किया जा सकता। मामला सामने आने के बाद उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ गई है।









शराब खरीदने वाले कई ग्राहकों का कहना है कि आमतौर पर जल्दबाजी में पैकेजिंग पर लगे छोटे स्टिकर पर ध्यान नहीं जाता, जिसका फायदा दुकानदार उठा सकते हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि ऐसी हजारों बोतलें बेची गई होंगी, जिससे उपभोक्ताओं को सामूहिक रूप से आर्थिक नुकसान हो सकता है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। ग्राहकों ने यह भी आरोप लगाया कि हाल के महीनों में शराब की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें बढ़ी हैं। कुछ उपभोक्ताओं का कहना है कि कीमत के मुकाबले शराब की क्वालिटी
संतोषजनक
नहीं है। उनका दावा है कि कई दुकानों पर प्रचलित विदेशी और प्रीमियम ब्रांड उपलब्ध नहीं हैं, जबकि विकल्प के रूप में जो उत्पाद दिए जा रहे हैं, उनकी गुणवत्ता अपेक्षाकृत निम्न स्तर की महसूस होती है। शहर के कई शराब प्रेमियों का कहना है कि पिछले वर्ष तक जो ब्रांड नियमित रूप से उपलब्ध थे, वे अब कई महीनों से दुकानों में नहीं मिल रहे। इस संबंध में आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्टॉक की कमी और लाइसेंस प्रक्रियाओं में देरी इसका एक कारण हो सकता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, बेवरेज कॉरपोरेशन के पास पर्याप्त स्टॉक नहीं होने और एफएल-10 लाइसेंस एग्रीमेंट कई कंपनियों के साथ पूर्ण न होने से आपूर्ति प्रभावित हुई है।


वर्जन
मैंने लालपुर भट्टी में नकली शराब मामलें में उड़नदस्ता टीम के साथ मिलकर कार्रवाई की थी और कोई भी गिरफ्तारी फर्जी नहीं थी फरार आरोपियों की भी तलाश जारी है हमने अपने स्तर पर सही तरीके से काम किया था।
योगेश सोनी, आबकारी उप निरीक्षक

मुझ पर लगाए आरोप झूठे है, उड़नदस्ता की टीम ने इस मामलें में कार्रवाई की है।
नीलम किरण सिंह, आबकारी अधिकारी
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