छत्तीसगढ़

आबकारी अफसर फर्जी जाति प्रमाणपत्र में पकड़ाया, एमपी में है पदस्थ, बिलासपुर लिंक सामने आई

Nilmani Pal
17 March 2026 8:42 AM IST
आबकारी अफसर फर्जी जाति प्रमाणपत्र में पकड़ाया, एमपी में है पदस्थ, बिलासपुर लिंक सामने आई
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बिलासपुर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर के आबकारी अफसर राजेश हेनरी पर आपराधिक षड्यंत्र करके फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाने का आरोप है। इस फर्जी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर वह पिछले 35 साल से आबकारी विभाग में नौकरी कर रहे हैं। राजेश के फेक प्रमाणपत्र में छत्तीसगढ़ के बिलासपुर तहसील के सील और साइन मिले। छत्तीसगढ़ की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति ने उनके अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाणपत्र की जांच के लिए जिला स्तरीय समिति को भेजा था, लेकिन यह जांच दो साल से लंबित पड़ी थी।

अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने इस मामले में बिलासपुर कलेक्टर और मध्यप्रदेश के आबकारी विभाग के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और 15 दिन में जवाब मांगा है। वहीं विभाग के अफसरों पर मामले को दबाने का आरोप लगा है। दरअसल, इंदौर के रहने वाले वकील और आरटीआई एक्टिविस्ट राजेंद्र गुप्ता ने ग्वालियर के आबकारी विभाग में पदस्थ अपर आयुक्त राजेश हेनरी के खिलाफ शिकायत की है।

उन्होंने बताया है कि राजेश हेनरी ने साल 1990-91 में फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाकर आपराधिक षडयंत्र किया, जिसके आधार पर अपने आप को आदिवासी समुदाय का होना बताकर आबकारी विभाग में नौकरी शुरू की। इसके बाद मध्यप्रदेश के कई जगहों पर पदस्थ रहे और फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर 35 साल से जॉब करते रहे। राजेंद्र गुप्ता का आरोप है कि आबकारी विभाग के अफसरों को सालों से पता है कि राजेंद्र हेनरी ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के सहारे नौकरी पर कब्जा जमाया है। लेकिन, उनके इस आपराधिक षडयंत्र को विभाग के अफसर परदा डालते रहे और उन्हें बचाने की कोशिश करते रहे।

राजेंद्र गुप्ता ने सूचना के अधिकार कानून के तहत आबकारी अफसर राजेश हेनरी की जाति प्रमाणपत्र को लेकर विभागीय दफ्तर से जानकारी जुटाई, जिसके आधार पर पता चला कि राजेश हेनरी ने बिलासपुर तहसील के सील और साइन लगे जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किया है। लेकिन, जब बिलासपुर तहसील कोर्ट के दायरा पंजी में साल 1990-91 के प्रकरण की जानकारी ली, तब पता चला कि तहसील कार्यालय में उनके जाति प्रमाण पत्र का प्रकरण ही दर्ज नहीं है।

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