छत्तीसगढ़

रायपुर पुलिस में तबादलों के बाद भी कई अधिकारी-कर्मचारी थानों में जमे

Shantanu Roy
29 Aug 2025 11:11 PM IST
रायपुर पुलिस में तबादलों के बाद भी कई अधिकारी-कर्मचारी थानों में जमे
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अपराधियों से गठजोड़ पर उठे सवाल
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस विभाग ने हाल ही में कई पुलिसकर्मियों के तबादले की सूची जारी की है। अपराधों पर लगाम लगाने और लंबे समय से एक ही थाने में जमे अधिकारियों को हटाने के उद्देश्य से यह प्रक्रिया अपनाई गई थी। रायपुर पुलिस कप्तान ने स्पष्ट संदेश दिया कि किसी भी थाने या चौकी में वर्षों से जमे अधिकारी अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। बावजूद इसके, शहर के कई थानों में अभी भी ऐसे पुलिसकर्मी जमे हुए हैं, जो वर्षों से अपनी पकड़ बनाए हुए हैं।

जानकारी के अनुसार, इन अधिकारियों और कर्मचारियों में सब इंस्पेक्टर (एसआई), असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (एएसआई), प्रधान आरक्षक और आरक्षक शामिल हैं। इनकी तैनाती लंबे समय से एक ही क्षेत्र में है और स्थानीय स्तर पर इनकी गहरी पैठ बन चुकी है। इससे अपराध पर अंकुश लगाने की बजाय कई मामलों में अपराधियों को संरक्षण मिलने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि कुछ पुलिसकर्मी नियमित रूप से अवैध कारोबारियों से सांठगांठ कर हफ्ता वसूली करते हैं। इनमें सट्टा चलाने वाले, गांजा-शराब बेचने वाले और गुंडा-बदमाश शामिल हैं। इस तरह की गतिविधियों से न केवल पुलिस विभाग की छवि धूमिल होती है बल्कि अपराध भी फल-फूल रहा है।

कप्तान का तबादला आदेश और हकीकत
पुलिस कप्तान ने अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए हाल ही में तबादले किए। इन आदेशों में कई थानों के स्टाफ को बदलने की बात कही गई थी। इसका मकसद यह था कि लंबे समय से एक ही जगह पर पदस्थ कर्मियों को हटाकर नई ऊर्जा और नई सोच के साथ काम करने का मौका दिया जाए। लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग है। अभी भी कई ऐसे पुलिस अधिकारी हैं जो 5 से 10 सालों से एक ही थाने में पदस्थ हैं। उनकी गहरी पकड़ न केवल अपराध जगत पर है बल्कि स्थानीय स्तर पर राजनैतिक और आर्थिक नेटवर्क से भी जुड़ी हुई है। यही वजह है कि वे तबादले के आदेश के बाद भी उसी थाने में कार्यरत बने हुए हैं।

अपराधियों के साथ गठजोड़ के आरोप
कई बार यह देखने को मिला है कि जिस थाने के अंतर्गत सट्टा, गांजा या अवैध शराब का कारोबार चलता है, वहां पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में रहती है। नागरिकों का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद यह कारोबार खुलेआम कैसे चल रहा है। सूत्र बताते हैं कि कुछ पुलिसकर्मी प्रतिमाह इन कारोबारियों से मोटी रकम वसूलते हैं और बदले में उन्हें सुरक्षा देते हैं। यही कारण है कि अपराधी निडर होकर अवैध कारोबार जारी रखते हैं।

जनता की नाराजगी और भरोसे का संकट
पुलिस विभाग पर लगे इस तरह के आरोप आम जनता में असंतोष को जन्म दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि जब कानून के रखवाले ही अपराधियों से मिलीभगत कर लेंगे तो आम नागरिक की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। यही वजह है कि अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और चोरी, लूट, नशे का कारोबार और सट्टेबाजी पर लगाम लगाना मुश्किल हो रहा है। इन हालातों को देखते हुए रायपुर पुलिस कप्तान पर दबाव बढ़ गया है कि वे तबादला आदेशों का कड़ाई से पालन करवाएं। यदि वर्षों से जमे पुलिस कर्मियों को हटाया नहीं गया तो अपराधियों और पुलिस के बीच का गठजोड़ खत्म नहीं हो पाएगा। यह स्थिति न केवल कानून-व्यवस्था को बिगाड़ रही है बल्कि पुलिस की साख को भी धक्का पहुंचा रही है।

नगर सैनिकों का बढ़ता दबदबा, अवैध कारोबार में संरक्षण की भूमिका
राजधानी से लगे आरंग इलाके में नगर सैनिकों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, आरंग थाने समेत कई थाना क्षेत्रों में नगर सैनिक सालों से जमे हुए हैं और उनकी पकड़ इतनी मजबूत है कि उनका रुतबा थाना प्रभारी से कम नहीं माना जाता। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इन नगर सैनिकों की शह पर इलाके में कई तरह के अवैध धंधे फल-फूल रहे हैं। इनमें नशे का कारोबार, अवैध शराब बिक्री, जुए-सट्टे के अड्डे और अवैध रेत उत्खनन जैसी गतिविधियां शामिल हैं। पुलिस व्यवस्था में सहयोगी माने जाने वाले नगर सैनिकों पर ऐसे गंभीर आरोप लगना चौंकाने वाला है।
सूत्र बताते हैं कि जिन नगर सैनिकों की ड्यूटी आमतौर पर कानून व्यवस्था और प्रशासनिक मदद के लिए होती है, वही अब खुद अवैध गतिविधियों के सहारा बनते दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि उनकी पकड़ इतनी गहरी है कि थाना प्रभारी भी बिना उनकी मर्जी के कोई कार्रवाई करने से हिचकिचाते हैं। आरंग और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से नशे का अवैध कारोबार और रेत उत्खनन की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब नगर सैनिकों के संरक्षण का एंगल जुड़ने से यह मामला और भी गंभीर हो गया है। जानकारों का कहना है कि इन गतिविधियों से न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि क्षेत्र में आपराधिक घटनाओं को भी बढ़ावा मिल रहा है।

क्राइम ब्रांच बना क्रीम ब्रांच
रायपुर शहर की क्राइम ब्रांच में लंबे समय से अधिकारी और कर्मचारी अपने पदों पर लगातार बने हुए हैं। शहर के पुलिस कप्तान लाल उम्मेद सिंह ने इस संबंध में कई बार लिखित और मौखिक आदेश जारी किए हैं। उनके निर्देशों के बावजूद कई अधिकारी और कर्मचारी अपने वर्तमान पदों पर बने हुए हैं। इससे न केवल विभागीय कार्य में असंतुलन की स्थिति बनी हुई है, बल्कि ट्रांसफर नीति के पालन में भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही विभाग में तैनात रहने से कार्यकुशलता और जिम्मेदारी में गिरावट आ सकती है। ट्रांसफर नीति का उद्देश्य कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियों और अनुभवों से जोड़ना होता है, जिससे विभाग में पारदर्शिता और अनुशासन बना रहे।
सूत्रों के मुताबिक क्राइम ब्रांच को क्रीम ब्रांच बनने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। क्योंकि सूत्र बताते है कि हालही में कुछ दिन पहले आर्म्स एक्ट मामलें में निगरानी बदमाश का छोटा भाई पिस्टल के साथ पकड़ाया था। मगर उसे क्राइम ब्रांच के दफ्तर में वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया और इस गंभीर अपराध से बचकर निकलने का षड्यंत्र रचा गया। इस षड्यंत्र को रचने के लिए क्राइम ब्रांच को पूरी रात जद्दोजहद करनी पड़ी और संबंधित निगरानी बदमाश के छोटे भाई को अगले दिन की दोपहर में लग्जरी गाडी XUV 700 ब्लैक कलर में बैठाकर रवाना किया गया। इससे ये समझ आ जाता है कि सालों से एक ही पद पर जमे अधिकारी-कर्मचारी एक अपराधी को बचाने के लिए कैसी-कैसी साजिशे रच सकते है। हालांकि, अधिकारियों के
लगातार
टिके रहने के कारण कई छोटे कर्मचारियों और जूनियर अधिकारियों में असंतोष देखा जा रहा है। वे चाहते हैं कि ट्रांसफर नियमों का सही तरीके से पालन हो और सभी के साथ समान व्यवहार किया जाए। पुलिस कप्तान लाल उम्मेद सिंह ने पहले भी अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे ट्रांसफर लिस्ट का पालन करें और किसी भी अधिकारी को नियमों के विरुद्ध लगातार एक ही स्थान पर तैनात न रहने दें। लेकिन इस दिशा में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
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