छत्तीसगढ़
हाथियों का बढ़ा आतंक, तीन दिनों में 6 मकान और 83 किसानों की फसलें तबाह
Shantanu Roy
6 Aug 2026 9:17 PM IST

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छग
Raigarh. रायगढ़। जिले में मानसून की शुरुआत के साथ ही जंगली हाथियों की सक्रियता बढ़ गई है। भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में जंगलों से निकलकर हाथियों के झुंड अब गांवों के आसपास पहुंच रहे हैं। धरमजयगढ़ वन मंडल क्षेत्र में पिछले तीन दिनों में हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया है। हाथियों के हमले से 6 मकान, एक झोपड़ी, एक अहाता और एक ट्रैक्टर क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके अलावा 83 किसानों की फसलें भी हाथियों ने रौंदकर बर्बाद कर दी हैं।
वन विभाग के अनुसार, हाथियों द्वारा किए गए नुकसान की जानकारी मिलने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे का काम शुरू कर दिया गया है। विभागीय टीमें गांवों में पहुंचकर नुकसान का आकलन कर रही हैं। सर्वे पूरा होने के बाद शासन के नियमानुसार प्रभावित ग्रामीणों और किसानों को मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। धरमजयगढ़ वन मंडल में वर्तमान समय में 124 हाथी अलग-अलग दलों में विचरण कर रहे हैं। इनमें 35 नर हाथी, 57 मादा हाथी और 32 शावक शामिल हैं। हाथियों की इतनी बड़ी संख्या में मौजूदगी के कारण वन क्षेत्र से लगे गांवों में ग्रामीणों के बीच डर का माहौल बना हुआ है।
वन विभाग के मुताबिक, सबसे अधिक 51 हाथियों का दल लैलूंगा वन परिक्षेत्र के तीन अलग-अलग बीट क्षेत्रों में सक्रिय है। इसके अलावा कापू रेंज में 29 हाथी, बोरो रेंज में 23 हाथी, धरमजयगढ़ रेंज में 15 हाथी, छाल रेंज में 5 हाथी और बाकारूमा क्षेत्र में 1 हाथी मौजूद है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में खेतों में धान समेत अन्य फसलें तैयार होने लगती हैं, जो हाथियों को आकर्षित करती हैं। जंगलों में भोजन की कमी या फसलों की उपलब्धता के कारण हाथी अक्सर गांवों के नजदीक पहुंच जाते हैं। कई बार हाथी खेतों में घुसकर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं कुछ घटनाओं में मकानों और अन्य संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया जाता है।
किसानों का कहना है कि फसल नुकसान से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। एक ओर जहां खेती में मेहनत और खर्च अधिक होता है, वहीं हाथियों द्वारा फसल बर्बाद कर दिए जाने से उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों की निगरानी बढ़ाने और समय पर मुआवजा दिलाने की मांग की है। इधर, वन विभाग ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है। वनकर्मी लगातार गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं। हाथी मित्र दल द्वारा मुनादी कर लोगों को हाथियों की मौजूदगी और संभावित खतरे की जानकारी दी जा रही है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे रात के समय अकेले जंगल या खेतों की ओर न जाएं। हाथियों को देखकर उनके नजदीक जाने या उन्हें भगाने का प्रयास न करें। किसी भी क्षेत्र में हाथी दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था की जा सके। अधिकारियों का कहना है कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। विभाग का मुख्य उद्देश्य मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को कम करना तथा ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए हाथियों की लोकेशन पर नजर रखने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जा रही है। मानसून के दौरान हाथियों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है। आने वाले दिनों में भी हाथियों की गतिविधियों और नुकसान की स्थिति पर लगातार निगरानी जारी रखने की बात कही गई है।
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