छत्तीसगढ़
धमतरी के करीब 40 चर्चों में गैर-ईसाइयों के प्रवेश पर रोक, क्रिश्चियन फोरम ने लिया फैसला
Shantanu Roy
23 Sept 2026 5:28 PM IST

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Dhamtari. धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में प्रार्थना और चंगाई सभाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच क्रिश्चियन फोरम ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है। फोरम के मुताबिक जिले के करीब 40 चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों में गैर-ईसाइयों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है। इनमें मेनोनाइट चर्च भी शामिल है। फैसले के बाद संबंधित चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों के बाहर सूचना बोर्ड लगाए जाने की बात सामने आई है। दरअसल, धमतरी जिले में पिछले कुछ समय से चंगाई और प्रार्थना सभाओं को लेकर विवाद की स्थिति बनती रही है। कुछ हिंदू संगठनों की ओर से इन सभाओं का विरोध किया जा रहा है। संगठनों की ओर से प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं। दूसरी ओर क्रिश्चियन फोरम और ईसाई संगठनों ने इन आरोपों को गलत बताते हुए इनसे इनकार किया है। इसी बीच कुछ दिन पहले कलेक्ट्रेट कार्यालय में 1500 से अधिक आवेदन पहुंचने की बात सामने आई थी। बताया गया कि इन आवेदनों में लोगों ने प्रार्थना सभाओं में अपनी इच्छा से शामिल होने की बात कही थी। लगातार सामने आ रहे विवादों के कारण प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी खड़ी हो रही थी।
शांति समिति की बैठक के बाद फैसला
प्रार्थना सभाओं को लेकर बढ़ते तनाव के बीच प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए शांति समिति की बैठक आयोजित की थी। बैठक में संबंधित पक्षों के साथ चर्चा कर शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया। इसके बाद क्रिश्चियन फोरम ने चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों में गैर-ईसाइयों के प्रवेश को लेकर यह निर्णय लिया है। क्रिश्चियन फोरम का कहना है कि बाहरी लोगों के प्रार्थना सभाओं में पहुंचने के बाद कई बार विवाद की स्थिति बनती है। ऐसे मामलों में पुलिस और प्रशासन को भी हस्तक्षेप करना पड़ता है। फोरम के मुताबिक लगातार बन रही ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए गैर-ईसाइयों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।
धर्मांतरण के आरोपों से फोरम का इनकार
फोरम ने प्रार्थना और चंगाई सभाओं में प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराए जाने के आरोपों को गलत बताया है। उसका कहना है कि विवाद और टकराव की स्थिति को रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। वहीं विरोध करने वाले संगठनों की ओर से धर्मांतरण से जुड़े आरोप पहले भी लगाए जाते रहे हैं। धमतरी में पिछले कुछ वर्षों से चंगाई सभा और प्रार्थना सभाओं को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। एक तरफ हिंदू संगठनों की ओर से धर्मांतरण और प्रलोभन के आरोप लगाए जाते हैं तो दूसरी तरफ ईसाई संगठन इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। अब करीब 40 चर्चों और प्रार्थना सभा स्थलों में गैर-ईसाइयों के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले के बाद प्रशासन की नजर भी स्थिति पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि क्रिश्चियन फोरम के इस निर्णय का प्रार्थना सभाओं को लेकर चल रहे विवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर क्या असर पड़ता है।
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