छत्तीसगढ़

सामुदायिक भवन, मुस्लिम हाल पर अतिक्रमण

Nilmani Pal
12 Nov 2025 11:57 AM IST
सामुदायिक भवन, मुस्लिम हाल पर अतिक्रमण
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रायपुर (जसेरि)। सरकारी जमीन पर बने सामुदायिक भवन का उपयोग निजी व्यक्ति या निजी संस्थानों द्वारा किये जाने से आम जनता को लाभ नहीं मिल पाता, निजी व्यक्तियों द्वारा कब्ज़ा करने से उसकी मनमानी चलती है और अनाप शनाप पैसे किराये और मेंटेनेंस के नाम से लिया जाता है जिससे गरीबो या मध्यम वर्ग के लोगों को सस्ते में सामुदायिक भवन उपलब्ध करने की सरकार की मंशा पर पानी फिर जाता है इस लिए नगर निगम को ही इसके संचालन की जिम्मेदारी निभाना चाहिये। देखा जाए तो सामुदायिक भवनों पर कब्ज़ा कोई नई बात नहीं है।

कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे डा शिव कुमार डहरिया की पत्नी शकुंतला डहरिया की एनजीओ राष्ट्रीय सद्भावना समिति पर भी रायपुर के शताब्दी नगर स्थित सामुदायिक भवन सहित कुछ सामुदायिक भवनों पर कब्जे का आरोप लगा था जिसे बाद में नगर निगम द्वारा मुक्त करा लिया गया था भाजपा ने उस वक्त जमकर विरोध प्रदर्शन किया था लेकिन अभी ढेबर और उसके गुर्गो द्वारा किये गए कब्जे पर चुप रहना समझ से परे है। जबकि जनता से रिश्ता में छपी खबर के बाद नगर निगम कमिश्नर में जांच के आदेश भी दिए थे लेकिन जाँच अभी तक अधूरी रही। राजधानी के एक नहीं तीन सामुदायिक भवन पर पूर्व महापौर एजाज ढेबरऔर उनके गुर्गे कब्ज़ा जमाने के मामले में निगम कमिश्नर ने तत्काल संज्ञान लेकर जांच के आदेश दिए थे लेकिन जाँच में क्या निकला जानकारी नहीं मिल पाई है। जाँच के पूर्व कमिश्नर ने यह भी कहा था कि अगर शिकायत सही पाई गई तो जब से कब्जा किया है उस पर मय ब्याज के राजस्व वसूली की जाएगी। नगर निगम कमिश्नर ने स्पष्ट कहा है कि निगम की संपत्ति पर कोई भी कब्जा या अतिक्रमण नहीं कर सकता। एैसे कब्जा करने वालों की निगम प्रशासन कुंडली निकाल रही है। जितने भी लोगों ने अवैध तरीके से निगम की संपत्ति पर कब्जा जमाया है जांच उपरांत उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस सन्दर्भ में कल कुछ लोगों ने जनता से रिश्ता को फिर से शिकायत भेजी है जिसमे पूर्व महापौर एजाज ढेबर और उसके गुर्गों द्वारा छोटा मुस्लिम हॉल पर कब्जे को तत्काल हटाने की मांग की गई है। गौरतलब है की पिछले दिनों जनता से रिश्ता समाचार पत्र ने उत्कल सामुदायिक भवन विद्या नगर बैरन बाजार, छोटा मुस्लिम हाल मोतीबाग और नगर निगम मुख्यालय के पीछे स्थित कुतुबी सामुदायिक हाल में एजाज ढेबर के कब्जे का समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इन तीनों सामुदायिक भवन का पैसा उन्ही के द्वारा वसूला जा रहा है और सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है कहने को तो एसी हाल है लेकिन उद्घाटन के एक सप्ताह बाद वहां की एसी जब से बंद हुआ है आज तक सुधारा नहीं गया है। और पैसा भी मनमाने तरीके से बेहिसाब लिया जा रहा है। सरकारी पैसे का निजी उपयोग गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है लेकिन अधिकारी भी चुपचाप बैठे हैं। कांग्रेस सरकार को गए लगभग दो साल होने को आ रहे हैं उसके बाद अब प्रदेश और नगर निगम में भाजपा की सरकार बैठी है उसके बाद भी सामुदायिक भवनों का जिम्मा एजाज ढेबर किस हैसियत से उठा रहे हैं जांच का विषय है। हालांकि सामुदायिक भवनों का निजी हाथों में संचालन होने के कई कारण हैं, जैसे सरकारी नियंत्रण की कमी, संसाधनों की कमी और निजी संस्थाओं की व्यावसायिक रुचि आदि आदि लेकिन यहाँ इस तरह की कोई बात ही नहीं है सरकार खुद इसका जिम्मा उठा सकती है। लेकिन ये बात लोगों के गले नहीं उतर रही है।

गरीब और मध्यम वर्ग को फायदा मिले

सरकारी सामुदायिक भवनों पर पूर्व महापौर एजाज ढेबर या उनके परिवार के सदस्यों का कब्ज़ा हो जाना बहुत ही गंभीर बात है सरकार को संज्ञान में लेकर तत्काल अपने हाथो में या कुछ लोगों की कमिटी बनाकर उनको सौंप देना चाहिए। कहा जाता है कि जब सरकारी भवन निजी संस्थाओं या व्यक्तियों द्वारा चलाए जाते हैं, तो उनके दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है, जिससे सरकार का मूल उद्देश्य गरीबों को या छोटे प्रोग्राम के लिए सुलभ दर में उपलब्ध कराने की मंशा विफल हो जाता है। नगर निगम को इन भवनों से आय भी बढ़ती है लेकिन इससे निगम की आय तो नहीं बढ़ी परन्तु एजाज ढेबर और उसके परिवार की आय जरूर बढ़ गई है। और ऐसा होने से आम जनता के लिए इन सुविधाओं का उपयोग महंगा हो गया है।

सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम ही हों

अगर निजी हाथों में प्रबंधन जाता है, तो समुदाय के कुछ वर्ग इसका विरोध करते हैं, क्योंकि वे चाहते हैं कि इन भवनों का उपयोग केवल सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए हो। ये राजनीतिक सभा के लिए भी संचालित कर रहे हैं जिसका लोगों ने जमकर विरोध भी किया है. नगर निगम प्रशासन को चाहिए कि लोगों की इन समस्याओं का समाधान निकालने के लिए, सरकारी निकायों को इन भवनों के प्रबंधन पर कड़ा नियंत्रण रखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इनका उपयोग सार्वजनिक हित के लिए ही हो।

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