छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में बिजली दरें बढ़ीं, घरेलू और कमर्शियल उपभोक्ताओं पर बढ़ा भार

Shantanu Roy
15 Jun 2026 7:25 PM IST
छत्तीसगढ़ में बिजली दरें बढ़ीं, घरेलू और कमर्शियल उपभोक्ताओं पर बढ़ा भार
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1 जुलाई से लागू होंगी नई दरें
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं को अब अधिक भुगतान करना होगा, क्योंकि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने नई बिजली दरों की घोषणा कर दी है। नई दरों के अनुसार घरेलू, कमर्शियल और कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं पर बिजली का भार बढ़ गया है। ये नई दरें 1 जुलाई 2026 से पूरे राज्य में लागू होंगी। जारी आदेश के अनुसार घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के टैरिफ में 30 पैसे से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है। इस बदलाव से राज्य के लाखों घरेलू उपभोक्ताओं के मासिक बिजली बिल पर सीधा असर पड़ेगा। पहले से ही बढ़ती महंगाई के बीच बिजली दरों में यह वृद्धि आम जनता के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव का कारण बन सकती है।

कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली दरों में संशोधन किया गया है। व्यापारिक और व्यावसायिक उपयोग के लिए बिजली अब 20 पैसे से 40 पैसे प्रति यूनिट तक महंगी हो गई है। इस फैसले से छोटे और मध्यम व्यवसायों की लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। कृषि क्षेत्र को भी नई दरों का असर झेलना पड़ेगा। कृषि पंपों की बिजली दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। हालांकि, इस बीच सरकार ने गैर-सब्सिडी वाले कृषि पंप उपभोक्ताओं को राहत देते हुए ऊर्जा प्रभार पर दी जाने वाली छूट को 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है। इससे कुछ हद तक किसानों को अतिरिक्त भार से राहत मिलने की उम्मीद है।

CSERC द्वारा जारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाने, उत्पादन और वितरण लागत में बढ़ोतरी को संतुलित करने के उद्देश्य से यह संशोधन किया गया है। आयोग का मानना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं को देखते हुए टैरिफ में यह बदलाव जरूरी था। नई दरों के लागू होने के बाद राज्य में बिजली उपभोग की लागत में समग्र रूप से वृद्धि देखी जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार इसका सीधा असर घरेलू बजट, व्यापारिक गतिविधियों और कृषि उत्पादन लागत पर पड़ सकता है। हालांकि ऊर्जा विभाग के सूत्रों का कहना है कि छूट और अन्य प्रावधानों के जरिए कुछ श्रेणियों को राहत देने का प्रयास किया गया है, ताकि कमजोर वर्गों और किसानों पर अधिक दबाव न पड़े। 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाली इन नई दरों को लेकर उपभोक्ताओं में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहां एक ओर बढ़ती दरों को लेकर चिंता जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर बिजली आपूर्ति और व्यवस्था सुधार की उम्मीद भी की जा रही है।
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