छत्तीसगढ़

तीन सरकारी सामुदायिक भवनों पर एजाज ढेबर का कब्जा!

Nilmani Pal
24 Oct 2025 11:30 AM IST
तीन सरकारी सामुदायिक भवनों पर एजाज ढेबर का कब्जा!
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नगर निगम मालिक: चोर चोरी कर रहा मालिक नींद में...

रायपुर (जसेरि)। राजधानी के एक नहीं तीन सामुदायिक भवन जो निगम की जमीन में नगर निगम ने स्वयं निर्मित की है उस पर पूर्व महापौर एजाज ढेबर एवं उनके गुर्गे कब्ज़ा जमाये बैठे हैं। बैरन बाजार उत्कल सामुदायिक भवन विद्यानगर, छोटा मुस्लिम हाल मोतीबाग और नगर निगम मु यालय के पीछे स्थित कुतुबी सामुदायिक हाल में एजाज ढेबर का कब्ज़ा है। ये तीनो सामुदायिक भवन का पैसा उन्ही के द्वारा वसूला जा रहा है और सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है कहने को तो एसी हाल है लेकिन उद्घाटन के एक सप्ताह बाद वहां की एसी जब से बंद हुआ है आज तक सुधारा नहीं गया है। और पैसा भी मनमाने तरीके से बेहिसाब लिया जा रहा है। सरकारी पैसे का निजी उपयोग गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है लेकिन अधिकारी भी चुपचाप बैठे हैं. कांग्रेस सरकार को गए लगभग दो साल होने को आ रहे हैं उसके बाद अब प्रदेश और नगर निगम में भाजपा की सरकार बैठी है उसके बाद भी सामुदायिक भवनों का जि मा एजाज ढेबर किस हैसियत से उठा रहे हैं जाँच का विषय है। हालांकि सामुदायिक भवनों का निजी हाथों में संचालन होने के कई कारण हैं, जैसे सरकारी नियंत्रण की कमी, संसाधनों की कमी और निजी संस्थाओं की व्यावसायिक रुचि आदि आदि लेकिन यहाँ इस तरह की कोई बात ही नहीं है सरकार खुद इसका जि मा उठा सकती है। लेकिन ये बात लोगो के गले नहीं उतर रही है। किसी प्रकार के टेंडर या सामाजिक संगठन एनजीओ के माध्यम से चलाए जाने की कोई पुष्टि नहीं हो रही है।

सरकार की मंशा विफल

सरकारी सामुदायिक भवनों पर पूर्व महापौर एजाज ढेबर या उनके परिवार के सदस्यों का कब्ज़ा हो जाना बहुत ही गंभीर बात है सरकार को संज्ञान में लेकर तत्काल अपने हाथो में या कुछ लोगों की कमिटी बनाकर उनको सौप देना चाहिए। उदाहरण के लिए पूर्व में छत्तीसगढ़ के एक गांव दौरेला में एक सामुदायिक भवन पर सरपंच के बेटे ने कब्ज़ा करके कबाडख़ाना बना दिया था। इस सामुदायिक भवन के दुरुपयोग और कब्जे को लेकर ग्रामीणों में काफी विवाद हुआ था। वही हाल अब राजधानी के इन तीनो सामुदायिक भवनों का होने वाला है। कहा जाता है कि जब सरकारी भवन निजी संस्थाओं या व्यक्तियों द्वारा चलाए जाते हैं, तो उनके दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है, जिससे सरकार का मूल उद्देश्य गरीबों को या छोटे प्रोग्राम के लिए सुलभ दर में उपलब्ध कराने की मंशा विफल हो जाता है।

आय के स्रोत और रखरखाव

नगर निगम को इन भवनों से आय भी बढ़ती है लेकिन इससे निगम की आय तो नहीं बढ़ी परन्तु एजाज ढेबर और उसके परिवार की आय जरूर बढ़ गई है। और ऐसा होने से आम जनता के लिए इन सुविधाओं का उपयोग महंगा हो गया है। वे इसका सही तरीके से उपयोग नहीं करते, तो निगम को हस्तक्षेप करना पड़ता है। लेकिन वार्ड की जनता के द्वारा नगर निगम में शिकायत करने के बावजूद कुछ हासिल नहीं हो रहा है। शिकायतों का अंबार जनता से रिश्ता अखबार के द तर में वार्डवासी आकर दे रहे।

लोगो की अपेक्षाएँ और विवाद

एजाज ढेबर के इन सामुदायिक भवनों के सञ्चालन से हमेशा विवाद होते रहता है सामुदायिक भवनों के निर्माण के बाद, उनके उपयोग को लेकर समुदाय के विभिन्न वर्गों के बीच विवाद पैदा हो जाता है।अगर निजी हाथों में प्रबंधन जाता है, तो समुदाय के कुछ वर्ग इसका विरोध करते हैं, क्योंकि वे चाहते हैं कि इन भवनों का उपयोग केवल सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए हो। ये राजनितिक सभा के लिए भी संचालित कर रहे हैं जिसका लोगों ने जमकर विरोध भी किया है. नगर निगम प्रशासन को चाहिए कि लोगों की इन समस्याओं का समाधान निकालने के लिए, सरकारी निकायों को इन भवनों के प्रबंधन पर कड़ा नियंत्रण रखना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इनका उपयोग सार्वजनिक हित के लिए ही हो।

ऐसा शासकीय भवन में कब्जा नहीं हो सकता। फिर भी आप ने मेरे संज्ञान में लाया है तो मैं इसकी जांच करवाता हूं। तत्काल कार्रवाई के आदेश जारी करता हूं।

- विश्वदीप (आईएएस)

कमिश्नर नगर निगम

कौन से अधिकारों से नगर निगम के शासकीय सामुदायिक भवन एजाज़ ढेबर के क़ब्ज़े में है या एजाज़ ढेबर इनका किराया वसूलता है किस अधिकार से क्या अभी तक सरकार बदली नहीं क्या अभी भी एजाज़ ढेबर महापौर है प्रशासन की इतनी गहरी नींद समझ से परे किसके दबाव पर अवैध क़ब्ज़ा की कार्रवाई क्यों नहीं हो रही अमानत में खयानत और सीधा धोखा धड़ी और 420 का मामला बनता है सरकारी धन का सीधा दोहन करना और सरकारी धन को अपना बताकर हड़पना क्या यह अपराध नहीं है कौन रोक रहा कार्रवाई करने से.....!

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