छत्तीसगढ़

डॉक्टर दंपति का तलाक मंजूर, हाईकोर्ट ने चरित्र शंका को बताया मानसिक क्रूरता

Nil dhankar
10 Jan 2026 3:00 PM IST
डॉक्टर दंपति का तलाक मंजूर, हाईकोर्ट ने चरित्र शंका को बताया मानसिक क्रूरता
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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद ने कहा कि, बिना ठोस सबूत के जीवनसाथी पर अवैध संबंधों जैसे गंभीर आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। डॉक्टर पत्नी के डॉक्टर पति पर लगाए गए आरोप को निराधार माना है। वहीं, पति की तलाक की अर्जी मंजूर करते हुए गुजारा भत्ता के लिए पत्नी को 25 लाख रुपए देने का आदेश दिया है। दरअसल, सारंगढ़ निवासी डॉक्टर की शादी साल 2008 में भिलाई की रहने वाली महिला के साथ हुई थी। दोनों पक्षों का विवाह रायगढ़ में हुआ था। महिला भी पेशे से डॉक्टर हैं। शादी के बाद उनकी एक बेटी हुई। फिर कुछ समय बाद ही उनके संबंधों में दरार आ गया। जिसके बाद दोनों साल 2014 से अलग रह रहे हैं।

पति का आरोप है कि, शादी के कुछ समय बाद ही उसकी पत्नी का व्यवहार लगातार अपमानजनक और संदेहपूर्ण हो गया। पत्नी की तरफ से अवैध संबंधों के आरोप, बार-बार मानसिक प्रताड़ना और पारिवारिक सम्मानों को ठेस पहुंचाने के चलते वैवाहिक जीवन असहनीय हो गया। यह भी आरोप लगाया कि, पत्नी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा करने लगी। मांग में सिंदूर नहीं लगाना, मंगलसूत्र पहनने से इनकार करना और उस पर जानलेवा हमला भी किया। झूठे अवैध संबंधों के आरोप लगाकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। इसी आधार पर पति ने दुर्ग के फैमिली कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी लगाई। जिसे फैमिली कोर्ट ने खारिज कर दिया।

इस पर पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अपील की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पत्नी ने अपने लिखित बयान में पति का संबंध किसी अन्य महिला डॉक्टर से होने का गंभीर आरोप लगाया था। पत्नी ने दावा किया था कि वह महिला उसके घर में जबरन घुसी और तोड़फोड़ की। वहीं, हाईकोर्ट ने पाया कि अप्रैल 2019 में दोनों साथ में फिल्म देखने गए थे, इसलिए अलग रहने के आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता था। लेकिन, हाईकोर्ट ने क्रूरता के आधार पर तलाक मंजूर कर लिया। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि, एक शिक्षित भारतीय पत्नी का अपने पति पर बिना आधार और सबूत के चरित्र हनन का आरोप लगाना क्रूरता का सबसे बुरा रूप है। हाईकोर्ट ने माना कि पति के अवैध संबंधों के आरोपों को साबित करने में पत्नी नाकाम रही, जिससे पति को मानसिक पीड़ा हुई।


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