छत्तीसगढ़
खेत बचाओ अभियान के तहत जिला स्तरीय जैविक एवं प्राकृतिक कृषि कार्यशाला का आयोजन
Shantanu Roy
15 Jun 2026 11:28 PM IST

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छग
Mahasamund. महासमुंद। भारत सरकार के निर्देशानुसार देशव्यापी “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत आज विकासखण्ड बागबाहरा के कृषि उपज मंडी प्रांगण में जिला स्तरीय खेत बचाओ अभियान कार्यक्रम सह जैविक एवं प्राकृतिक कृषि कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री एवं खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, सांसद रूपकुमारी चौधरी, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष चन्द्रहास चन्द्राकर, विधायक बसना डॉ. संपत अग्रवाल, पूर्व राज्यमंत्री एवं संसदीय सचिव पूनम चन्द्राकर, येतराम साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष मोंगरा किशन पटेल, जिला पंचायत उपाध्यक्ष भीखमसिंह ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिले के प्रभारी मंत्री दयालदास बघेल ने किसानों से खेती में जैविक एवं प्राकृतिक पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही बेहतर उत्पादन का आधार है। रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग के साथ जैविक खाद, प्राकृतिक संसाधनों एवं पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने से भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि को सुरक्षित बनाया जा सकता है।
सांसद रूपकुमारी चौधरी ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेती में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ पर्यावरण संरक्षण भी आवश्यक है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के सीमित एवं संतुलित उपयोग पर जोर देते हुए किसानों और आम नागरिकों से प्राकृतिक एवं जैविक खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा जनभागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की। उन्होंने 01 जून से 30 जून 2026 तक चलाए जा रहे देशव्यापी खेत बचाओ अभियान के उद्देश्य एवं महत्व की जानकारी भी दी।
कार्यशाला में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस दौरान असंतुलित रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव, जैविक खेती के लाभ, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर वैज्ञानिक परिचर्चा आयोजित की गई।
कृषक चौपाल एवं संगोष्ठी के माध्यम से किसानों को हरी खाद, नील हरित काई (ब्लू ग्रीन एल्गी), जैव उर्वरक एवं जैविक खाद के उपयोग की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने यूरिया एवं डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके, एसएसपी, टीएसपी, 20:20:0:13, जैव उर्वरक, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी, सूक्ष्म पोषक तत्वों के उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसा के अनुसार संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम में कृषि विभाग द्वारा किसानों को मिट्टी परीक्षण, फसल पोषण प्रबंधन एवं प्राकृतिक खेती से संबंधित तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराई गई। अधिकारियों ने बताया कि खेतों की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के लिए जैविक कार्बन बढ़ाना, रासायनिक उर्वरकों का विवेकपूर्ण उपयोग और कृषि में प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण समय की आवश्यकता है। इस अवसर पर उप संचालक कृषि महासमुंद एफ.आर. कश्यप, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी बागबाहरा जितेन्द्र चन्द्राकर, कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक, कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में जिले के कृषक उपस्थित रहे।
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