
शरद मिश्रा
रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि समूचे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता-जनार्दन के लिए संकल्प, समर्पण और समाधान की एक सटीक मिसाल हो सकते हैं। पिछले करीब 40 सालों से जनता में दुःख दर्द में हमेशा काम आने वाले एक सर्वप्रिय नेता की छवि कायम रखते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने देश के अन्य नेताओं को अपने संकल्प, समर्पण से ज़नहित पर समाधान की जो राह दिखाई है वो अद्भुत, अविश्वसनीय और अविस्मरणीय है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगातार 8 बार के विधायक, (1989 से 2023) तक 2018 के निर्वाचन को छोड़कर हर बार पिछले बार से ज्यादा वोट मार्जिन से जीतना कोई आसान काम नहीं है। रायपुर शहर में बृजमोहन अग्रवाल अगर सड़क पर पैदल चल दें तो उनके साथ समूचा रायपुर कदम ताल करते हुए साथ साथ चलने लगेगा। 1989 में ही अपने पहले निर्वाचन में अविभाजित मध्यप्रदेश की तत्कालीन सुंदर लाल पटवा की भाजपा सरकार में स्थानीय शासन मंत्री बने बृजमोहन अग्रवाल को अविभाजित मध्यप्रदेश में ही सर्वश्रेष्ठ विधायक का सम्मान भी हासिल हुआ। देश में ऐसे कुछ नेता,जनप्रतिनिधि अवश्य हैं, जो अपने निर्वाचन क्षेत्र से पिछले 20, 30 सालों से लगातार जीतते आ रहे हों लेकिन उनके और रायपुर के बृजमोहन अग्रवाल के चमत्कारिक राजनैतिक उत्कर्ष- वैभव की बात करें तो हमें मिलेगा कि बिना किसी जोर दबाव, दबंगई के जनता के मन मस्तिष्क यानी जेहन में जो स्थान बृजमोहन अग्रवाल ने बनाया है वो देश के अन्य नेताओं के लिए अनुकरणीय हो सकता है। सबके प्रति प्रेम, सहयोग, दोस्ती, मित्रता का भाव बृजमोहन अग्रवाल के व्यक्तित्व की सबसे अहम खासियत है, उसमें समय के साथ लगातार
और निखार भी आता जा रहा है। बृजमोहन अग्रवाल 65 पार हो चुके हैं लेकिन ऊर्जा और सक्रियता पर अभी भी 40 के बांके जवान को मीलों पीछे छोड़ देंगे। उनमें अभी भी 15 साल की राजनैतिक मेहनत और सक्रियता पूरी तन्मयता से बाकी है। आधी रात में भी जनता को मदद करने में हमेशा से आगे रहने वाले आपके, हमारे ही नहीं बल्कि सबके मोहन भैय्या यानी बृजमोहन अग्रवाल रायपुर से 2024 की लोकसभा में सांसद बनने के बाद छत्तीसगढ़ पर संसद में लगातार सवाल उठाकर विकसित छत्तीसगढ़ पर केंद्र की मोदी सरकार के लिए और पुख्ता आधार तैयार करने में प्रबल सहयोग कर रहे हैं। पिछले साल भर से बृजमोहन अग्रवाल की दैनिक गतिविधियों को प्रत्यक्ष रूप से देखने के बाद मुझे लगता है कि अपनी ऊर्जा को जनहित पर उपयोगी बनाना बृजमोहन अग्रवाल से आज के अन्य जन प्रतिनिधियों को निस्संकोच सीखना चाहिए। मेरी नजर में चलते रहने का नाम है बृजमोहन अग्रवाल ......शुरू से जनता की मदद करने को ही अपनी सर्वस्व खुशी मानने वाले बृजमोहन अग्रवाल के अंदर प्रेम, मोहब्बत का ऐसा विपुल सलिल है, जो हर किसी के सहयोग के लिए ता उम्र अपनी उन्मुक्त लहरों से हिलोरे मारता रहेगा। पिछले साल बृजमोहन अग्रवाल जी के छोटे बेटे आदित्य के विवाह समारोह में शामिल होने का मुझे भी सौभाग्य मिला, जिसके बाद मुझे रायपुर की जनता में बृजमोहन अग्रवाल के लिए प्यार और सम्मान को और नज़दीक से देखने-सुनने, समझने का अवसर मिला। समारोह के लिए दिल्ली से रायपुर जाने के दौरान ट्रेन में ही छत्तीसगढ़ जा रहे लोगों की जुबान में उनके बेटे की शादी की चर्चा थी। रायपुर शहर का हर नागरिक समारोह के लिए अपना सहयोग करने के लिए ऐसा उत्सुक था जैसे कि ये उसके अपने घर की ही शादी हो, और ऐसा क्यों न हो। आखिर ये शादी समारोह उनके अपने ही नहीं बल्कि रायपुर के सबके मोहन भैय्या के बेटे का था। रात को ढाई बजे भी जनता के लिए उपलब्ध होना, लोगों की शादी ब्याह में जाकर अपना प्रेम भाव आशीष देना, लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराना, किसी निर्दोष को ठीक ढंग से समझते हुए पुलिस कार्रवाई से बचाना आदि मोहन भैय्या के अनुकरणीय कार्य हैं। बृजमोहन का अर्थ "बृज (वृंदावन) का आकर्षक व्यक्ति" या "बृज का मोहन (कृष्ण)" होता है। यह नाम भगवान कृष्ण का ही एक रूप है, जो कृष्ण के मनमोहक और जादुई व्यक्तित्व को दर्शाता है। अपने इसी नाम को अपने जादुई व्यक्तित्त्व से हमेशा चरितार्थ करने वाले बृजमोहन अग्रवाल अब भले ही वरिष्ठ, उम्र दराज़ नेताओं में शुमार किए जाते हों लेकिन वर्तमान में उनकी ऊर्जा और सक्रियता की तुलना किसी और युवा नेता से आप अभी भी यत्र-तत्र सर्वत्र नहीं कर पाएंगे। छत्तीसगढ़ पर महीन से महीन बारीक जानकारी रखते हुए उसे राज्य के विकास के लिये बेहतर से बेहतर ढंग से क्रियान्वित करना कोई मोहन भैय्या से सीखे। पत्रकारिता जगत में पत्रकारों के बीच मित्रवत व्यवहार मोहन भैय्या के अंदर पत्रकारिता कौशल का कुशल परिचायक है। खबरों को विषय वस्तु के साथ सटीक ढंग से संपादित करना शायद बृजमोहन अग्रवाल जी से आज के पत्रकारों को सीखना चाहिए। तभी तो कॉंग्रेस नेता दिग्विजयसिंह ख़ुद ब खुद कहते हैं कि नेताओं का मीडिया विभाग बृजमोहन अग्रवाल के मीडिया विभाग जैसा होना चाहिए। दिग्विजय सिंह के इस कथन की वजह है कि बृजमोहन अग्रवाल जी की मीडिया टीम में एक से एक धुरंधर पत्रकार हैं,जो उनके लिए कार्य कर रहे हैं। बृजमोहन अग्रवाल जी की पत्रकारों से दोस्ती भी पूरे देश में चर्चित है। संसद सत्र के दौरान पत्रकारों की बृजमोहन अग्रवाल के नाम पर उत्सुकता इसका प्रमाण है,और मैं इसका प्रत्यक्ष साक्षी रहा हूं। चेन्नै, हैदराबाद से दिल्ली होते हुए बनारस, लखनऊ, इलाहाबाद, भोपाल, रायपुर के पत्रकारों में बृजमोहन जी को लेकर एक विशेष लगाव और प्यार देखने को मिलता है। बेहद पारखी नज़र और एकांतिक दृष्टिकोण के धनी बृजमोहन अग्रवाल में आदमी और उसकी फ़ितरत पहचानने की अद्भुत कला है। उनके अंदर का यारबाज भाव एक निश्छल और बेहद संवेदनशील हृदय के रूप में किसी जरुरतमंद की मदद करने को हमेशा आतुर रहता है। यारों के यार
बृजमोहन अग्रवाल जैसे को तैसा की फिलॉसफी को फॉलो करते हैं। जब पार्टी के कार्यक्रमों में गिने-चुने लोग जुटते थे, संसाधन सीमित हुआ करते थे। लेकिन उस समय भी कार्यकर्ताओं से मधुर और मित्रता का व्यवहार कायम रखने के लिए बृजमोहन जी की उत्सुकता और इसके लिए उनका वैचारिक संकल्प भी अटूट था। जो कार्यकर्ताओं के लिए आज भी निर्मल पावन कमल भाव के साथ बिलकुल तरोताजा है।
अपने इसी दोस्ताना व्यवहार की वज़ह से उन्होंने समूचे छत्तीसगढ़ में पार्टी के संगठन की नींव मजबूत की। उनका जीवन मित्रवत व्यवहार करते हुए कठिन से कठिन कार्य को प्रेम से सम्पन्न करवाने का अद्भुत उदाहरण रहा है। व्यक्तिगत राजनीति से परे रहकर संगठन को खड़ा करना, कार्यकर्ताओं को जोड़ना और विचारधारा के प्रति उनको एकनिष्ठ बनाए रखना रायपुर और छत्तीसगढ़ के अजेय योद्धा बृजमोहन अग्रवाल के अब तक के जीवन का सबसे मुख्य ध्येय रहा है। पुराने से पुराने कार्यकर्ताओं को पार्टी और अपने से सालों साल जोड़े रखना बृजमोहन अग्रवाल जी से देश को अन्य नेताओं से सीखने की कोशिश एक बार जरूर करनी चाहिए। कार्यकर्ताओं के आमंत्रण पर उनके यहां वैवाहिक अवसर या अन्य शुभ अवसर पर हर हाल में जाना, अपनी व्यस्तताओं के बीच भले ही 2 बजे रात में लेकिन अपनी उपस्थिति देने में बृजमोहन अग्रवाल एक अनुपम मिसाल हैं। नए हो या पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान दिलाते रहना एवं पार्टी के अन्य समर्पित लोगों से मधुर संबंध बनाये रखने में बृजमोहन अग्रवाल एक पूर्ण कुशल महारथी हैं। कार्यकताओं की हर हाल सुध लेने में एवं जनसंघ एवं संस्थापक कार्यकर्ताओं को हमेशा अपनी धरोहर समझने वाले बृजमोहन अग्रवाल आज भले ही 65 पार हो गए हैं लेकिन वे अभी भी अपनी सक्रियता से अपनी चमत्कारिक राजनैतिक कला कौशल की स्वर्णिम आभा रायपुर ही नहीं समूचे छत्तीसगढ़ की जनता जनार्दन में आसानी से बिखेर देंगे या ऐसा कहें कि ता उम्र बिखेरते रहेंगे।
अविभाजित मध्यप्रदेश में 80 के मध्य दशक में रायपुर शहर की एमजी रोड में कॉंग्रेस के तत्कालीन कद्दावर मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह को काले झंडे दिखाकर मनमानी सत्ता के खिलाफ़ अपने अंदर के गुस्से को ज़ाहिर करते हुए जन-मानस में अपने अंदर के नेता को प्रतिष्ठित करने वाले मोहन भैय्या ने 2000 में मध्यप्रदेश की दिग्विजय सिंह सरकार के दौरान छत्तीसगढ़ के हीरा खदानों को विदेशी कंपनी डिबियर्स को देने का पुरजोर विरोध किया और नतीजन कंपनी के अफसरों को रायपुर एयरपोर्ट से ही वापस लौटना पड़ा। 2013 में कृषि, पशुपालन, मछलीपालन, जल संसाधन, आयाकट, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री बनने के बाद उनकी उत्कृष्ट कार्य कुशलता जनता-जनार्दन के सामने आई। तब से ही बृजमोहन अग्रवाल के बारे में ऐसी मान्यता चल पड़ी कि जिस भी विभाग की जिम्मेदारी बृजमोहन अग्रवाल को सौंपी जाती है, उस विभाग को नई ऊचाईयाँ मिलती है और उसका कायाकल्प हो जाता है। बृजमोहन अग्रवाल को कृषि विभाग का नेतृत्व मिलते ही वर्ष 2014, 2015 एवं 2016 में निरंतर तीन वर्षों तक छत्तीसगढ़ को कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त हुआ। इस वर्ष ही बृजमोहन अग्रवाल को व्यक्तिगत तौर पर एग्रीकल्चर लीडरशीप अवार्ड से नवाजा गया। बृजमोहन अग्रवाल के अब तक के अन्य कार्यों में रायपुर में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण,65,000 लोगों के बैठने की क्षमता वाला भारत में दूसरा और विश्व का चौथा सबसे बड़ा खूबसूरत क्रिकेट स्टेडियम का रायपुर में निर्माण हुआ। इसके साथ पर्यटन के क्षेत्र में राज्य के विभिन्न पर्यटन क्षेत्रों का विकास एवं विभिन्न मोटलों का निर्माण, राज्य के विभिन्न पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों में होने वाले बड़े-बड़े मेलों को महोत्सव का स्वरूप दिलाने के साथ-साथ राज्य के त्रिवेणी संगम राजिम में विशाल कुम्भ मेले की शुरूआत करना प्रमुख रूप से शामिल हैं। राजधानी रायपुर के इतिहास में नया अध्याय जोड़ते हुए शहर के बीचो-बीच केनाल पर सड़क निर्माण के अलावा पिछले 36 वर्षों से प्रदेश की राजधानी रायपुर के सर्वागीण विकास में सबसे अहम भूमिका निभाई है। इनके कार्यकाल में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा, पुरातत्व को संजोने के लिए लगभग 200 एकड़ में पुरखौती मुक्तांगन का निर्माण हुआ। पर्यावरण को अभिव्यक्त करने वाले इस संग्रहालय की संरचना को देखकर पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे अब्दुल कलाम जी भी अभिभूत हुए थे।
रायपुर के महादेव घाट को राष्ट्रीय स्तर के पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करते हुए भव्य लक्ष्मण झूले के साथ एक खुबसूरत उद्यान का निर्माण किया गया।
4,000 लोगों की क्षमता वाले बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम का निर्माण किया गया।
प्रदेश के लाखों किसानों को लाभान्वित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कृषि मेला काआयोजन किया गया। बृजमोहन अग्रवाल के मंत्री कार्यकाल के दौरान ही
प्रदेश में आयोजित होने वाले 32 स्थानीय आयोजनों को राष्ट्रीय मेले का स्वरूप प्रदान किया गया।
यह उपलब्धियाँ इनके अब तक के सफल नेतृत्व का ही परिणाम है। बृजमोहन अग्रवाल की कार्यशैली, विषयों में पकड़ एवं 36 वर्षों के लम्बे कार्यानुभव को देखते हुए केन्द्र सरकार ने उन्हें देश की महात्वाकांक्षी योजना "प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना" के सलाहकार समिति का चेयरमेन बनाया है। साथ ही बृजमोहन अग्रवाल छत्तीसगढ़ भारतीय जनता पार्टी के कोर ग्रुप सदस्य के रूप में अहम जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाते हुए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रवादी विचारों और जनहित के कार्यों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका अभी भी अहम है।
बृजमोहन अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की प्रक्रिया में विधानसभा में हुई बहस में छत्तीसगढ़ राज्य की पुरजोर व तर्कपूर्ण वकालत की थी।
विधानसभा में जनसमस्याओं तथा समाज व प्रदेश की विचारणीय गंभीर मुद्दों पर बहस में भी बृजमोहन अग्रवाल सबसे आगे रहे।
युवा पीढ़ी में सार्थक व रचनात्मक राजनीति के प्रति रूझान पैदा करते हुए उनकी अध्ययनशीलता को प्रोत्साहन देने में मोहन भैया की रूचि जग जाहिर है। देर रात तक देश दुनिया और राज्य में जारी राजनैतिक और सामाजिक गतिविधियों का अध्ययन करना बृजमोहन अग्रवाल का दैनिक शगल है। विभिन्न सामाजिक संगठनों में सक्रिय भागीदारी करते हुए राजनीतिक चेतना का विकास करना बृजमोहन अग्रवाल की बौद्धिक विशेषता है। ऐसी लगातार सक्रियता और प्रभावशाली कार्य प्रणाली ही बृजमोहन अग्रवाल यानी मोहन भैया को पूरे प्रदेश का सबसे लोकप्रिय जननेता बनाती है। प्रेम भाव से सहयोग की भावना के साथ बृजमोहन अग्रवाल का जन सेवा ही धर्म है, कर्म है। बृजमोहन अग्रवाल का य़ह स्वतः स्फूर्त प्रण है कि वे सदैव से जनता की सेवा में तत्पर हैं और ता उम्र रहेंगे। जन सेवा की ऐसी अप्रतिम निश्छल भावना की वज़ह से बृजमोहन अग्रवाल को शायद ही कोई हो छत्तीसगढ़ में जो उनसे चिर परिचित ना हो, अपने अंदर अदभुत सम्मोहन रखने वाले बृजमोहन अग्रवाल हमारे ही नहीं, तुम्हारे ही नहीं बल्कि सब के मोहन भैय्या हैं। नर सेवा की भावना सदैव से ही उनके मन में रही है, यही उनकी एक बड़ी पहचान भी है। बृजमोहन अग्रवाल का बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ाव रहा। छात्र जीवन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में रहकर छात्रहित में संघर्षरत रहें। वे रायपुर के दुर्गा महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष, रविशंकर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के प्रतिनिधि,विश्वविद्यालय छात्रसंघ के सलाहकार व कल्याण महाविद्यालय भिलाई के अध्यक्ष भी रहें। छत्तीसगढ़ में स्व.विद्या भैया के बाद अगर किसी के नाम के साथ भैया शब्द बेहद चर्चित हुआ है तो वो है मोहन भैया, ये जनता का उनके प्रति स्नेह,आदर और प्रेम भाव ही है। बृजमोहन अग्रवाल एक ऐसा नाम एक ऐसी शख्सियत जो जातिगत, धार्मिक भेद भाव से ऊपर ऊठ कर अपने आप में एक संसार है इसलिए तो कहते हैं लोग कि अमीर हो या गरीब, बृजमोहन अग्रवाल ही सबके करीब। बृजमोहन अग्रवाल छत्तीसगढ़ के हर दिल अज़ीज नेता हैं। समाज के हर वर्ग में वे बेहद ही लोकप्रिय हैं। हर कोई उन्हें अपना मानता है क्योकि वे आवाम को मजहब में बांटकर नहीं देखते हैं। उनका मानना है कि हिंदुस्तान रूपी गुलदस्ते में सारे मजहब एक फूल की तरह हैं। जिसकी खुशबू सारी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करती है। वे कहते हैं कि हमारा भाई-चारा ही हमारी असली ताकत है। अपनी इसी ताकत के दम पर हम अपने देश को विश्व का सिरमौर बनाएंगे। उनका यह भी मानना है कि राजनीति केवल पद और प्रतिष्ठा का विषय नहीं होती, यह संबंधों और संस्कारों की भी एक अनवरत लंबी यात्रा होती है। यही कारण है कि जब भी बृजमोहन अग्रवाल प्रवास पर निकलते हैं, तो अपने दौर के कार्यकर्ताओं से मिले बिना उनका कार्यक्रम पूर्ण ही नहीं होता। यदि समय मिलता है तो उनसे मिलने स्वयं पहुँचते हैं, अन्यथा कार्यक्रम स्थल पर मिलने का प्रयास अवश्य करते हैं।
रायपुर की हर धड़कन के साथ हर पल खड़े रहे उसके अपने बृजमोहन भैया रायपुर के आत्मविश्वास और साहस भी हैं। रायपुर की हँसी, रुदन और नील नील अंबर में दूर दूर तक फैली खुशहाली भी हैं। रायपुर के सरकारी दफ्तरों की फाइल में लोककल्याण की महकती सोंधी सोंधी खुशबू हैं। चाह और फर्ज के बीच रायपुर सहित समूचे छत्तीसगढ़ में फैला मोहन भैया का नूर सांसद बनने के बाद अब समूचे देश में भी जगमगाए। असीम शुभकामनाओं के साथ।





