
अमीरों के हाथ में सौंप रहे गरीबों का हिस्सा
रिश्वतखोरी के चलते सपनों पर फिरा पानी
रायपुर। राजधानी रायपुर में गरीबों के लिए आवास सुनिश्चित करने वाली महत्वकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत निर्मित EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) फ्लैटों के आवंटन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कमल विहार और इंद्रप्रस्थ कॉलोनियों में फ्लैट वितरण की प्रक्रिया पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिससे योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय आवेदकों ने रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के वरिष्ठ अधिकारियों पर मनमानी और चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है, साथ ही रिश्वतखोरी की शिकायतें भी सामने आई हैं।
ऑनलाइन प्रक्रिया दरकिनार, एक्सेल से 'शॉर्टलिस्टिंग'
जानकारी के अनुसार, विवाद की जड़ चयन प्रक्रिया को लेकर है। आवेदकों का आरोप है कि रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के कुछ वरिष्ठ अधिकारी नियमानुसार काम नहीं कर रहे हैं। आवंटन के लिए जिस ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से आवेदन फॉर्म खोले जाने थे, उसे जानबूझकर इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। इसके बजाय, सभी आवेदनों को एक एक्सेल फाइल (Excel File) में डालकर, उसके माध्यम से मनमाने ढंग से शॉर्टलिस्ट करने की कोशिश की जा रही है।
आवेदकों और स्थानीय निवासियों का स्पष्ट मत है कि जब आवेदन की पूरी प्रक्रिया ही ऑनलाइन थी, तो चयन के लिए किसी भी तरह से ऑफलाइन या एक्सेल शीट का उपयोग करने की कोई जरूरत नहीं थी। उनका कहना है कि यह कदम सीधे तौर पर पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है और इसमें बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की आशंका है।
'फ्लैट दिलाने' के नाम पर रिश्वतखोरी के आरोप
आरोपों के मुताबिक, RDA अधिकारियों द्वारा यह 'ऑफलाइन' तरीका इसलिए अपनाया जा रहा है ताकि वे मनचाहे और चुनिंदा लोगों को ही फ्लैट आवंटित कर सकें, भले ही वे वास्तविक पात्र हों या नहीं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि लाभार्थियों से फ्लैट दिलाने के नाम पर अवैध रूप से पैसे की मांग की जा रही है। शिकायतें मिली हैं कि पात्र आवेदकों से 40,000 से 50,000 रुपये तक की राशि की मांग की जा रही है। यह सीधे तौर पर आवास योजना के मूल उद्देश्य को खत्म करता है, जो कि जरूरतमंद और गरीब परिवारों को सस्ती दर पर आवास उपलब्ध कराना है।
मांग अधिक, फ्लैट कम: आवेदकों में आक्रोश
यह अनियमितता तब सामने आई है जब फ्लैटों की मांग उपलब्ध संख्या से काफी अधिक है। आंकड़ों के अनुसार:
* कमल विहार में कुल 76 EWS फ्लैट उपलब्ध हैं।
* इंद्रप्रस्थ में कुल 77 EWS फ्लैट उपलब्ध हैं।
* दोनों कॉलोनियों को मिलाकर, RDA के पास 430 से अधिक ऑनलाइन आवेदन जमा हुए हैं।
सीमित संख्या में फ्लैट और आवेदकों की अधिक संख्या के बीच, चयन प्रक्रिया का निष्पक्ष और पारदर्शी होना अत्यंत आवश्यक है। एक्सेल फाइल के माध्यम से संदिग्ध शॉर्टलिस्टिंग ने उन सैकड़ों वास्तविक गरीब आवेदकों के बीच गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है, जो वर्षों से अपने घर का सपना देख रहे हैं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद, स्थानीय लोगों और आवेदकों ने एक स्वर में उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि इस मामले की तुरंत और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि कौन से अधिकारी इस अनियमितता में शामिल हैं।
आवेदकों ने जोर देकर कहा है कि:
* वास्तविक पात्रों को उनका अधिकार मिलना चाहिए।
* RDA को ऑनलाइन सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हुए, सभी आवेदकों के सामने, सार्वजनिक रूप से चयन करना चाहिए।
* आवास योजना की पारदर्शिता को हर हाल में बनाए रखा जाना चाहिए।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना, जिसका उद्देश्य देश के हर गरीब को पक्का घर देना है, ऐसी शिकायतों के कारण बदनाम नहीं होनी चाहिए। यह आवश्यक है कि राज्य सरकार और संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लें और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए, चयन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से पारदर्शी बनाएं। इस अनियमितता ने न केवल RDA की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी उजागर किया है कि गरीबों के हक पर कैसे सेंध लगाई जा रही है। इस मामले में RDA अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए अगला कदम क्या होना चाहिए?





