
जिला /शहर अध्यक्ष के लिए अहम होगा महंत, बाबा, भूपेश और बैज की सलाह
कांग्रेस में निष्ठावान और पीढिय़ों से जुड़े शुक्ला-वोरा परिवार की उपेक्षा
कांग्रेस की विचारधारा वाले मूल कांग्रेसी आज भी हासिए पर
नए नवेले छुटभैया नेताओं की कांग्रेस में आ चुकी बाढ़
छुटभैया नेताओं ने चापलूसी से पद पाकर कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया
बिल्डर लाबी, सट्टा लाबी, रिसार्ट लाबी का बोलबाला
नाड़ा पैजामा छाप नेताओं के कारण कांग्रेस की छबि दिन प्रतिदिन धूमिल
रायपुर । कांग्रेस ने बनाया नया सिस्टम सिस्टम नया चेहरा सब वही पुराने 2008 और 2009 और 2010 से कार्य करने वाले कांग्रेस के कर्णधार शूरवीर बहादुर नेता अध्यक्ष बनने की जुगाड़ में पुराने कांग्रेसियों की विचारधारा से और कांग्रेस की परंपरा के अनुरूप कार्य करने की शैली के लिए मशहूर कार्यकर्ता और नेता लगभग सभी घर बैठे हुए है, वहीं 2008 के बाद जो भी कांग्रेस में सक्रिय तौर पर ये बहादुर सिपाही जैसा कार्य कर रहे। वैसे नेताओं की फ़ौज में भी लगभग मायूस और असहाय हो गई है फिर भी कांग्रेस पार्टी को संगठन चुनाव के लिए नई-नई तकनीक का इस्तेमाल करना पड़ रहा है जबकि पुराने तकनीक में कांग्रेस के समर्पित और विचारधारा से ओत-प्रोत नेता ही पदाधिकारी बनते आ रहे थे, लेकिन अब चमचागिरी जुगाड़ और सारी व्यवस्था का इंतज़ाम मुख्य कारण होता है कि कांग्रेस पार्टी का नेता बनाने की, वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने पूरे प्रदेश में संगठन चुनाव का नया सिस्टम दिल्ली के माध्यम से बनाया है पर्यवेक्षक सभी जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं से बातचीत करने के उपरांत अध्यक्ष उपाध्यक्ष महामंत्री तय करेंगे।
पर्यवेक्षक प्रत्येक जिले-नगर कांग्रेस कमेटी में बैठक लेकर नाम तय करेंगे : कांग्रेस के पर्यवेक्षक प्रत्येक जिले में बैठक लेकर भीड़ और समूह का विचार जानने के उपरांत अपनी राय 2 नामों से या तीन नामों की अब सिंगल नामों से आगे प्रेषित करेंगे। अब सवाल है जो ज़्यादा भीड़ लाएगा बैठक में, जिसके ज़्यादा लोग उपस्थित होंगे, भले किराया पर लाई गई भीड़, भले ही वह कांग्रेस की विचारधारा से ओतप्रोत न हो, भले वह नए नवेले वाले मज़दूर नेता हो जिसकी बल संख्या ज़्यादा होगी, उसी के आधार पर पर्यवेक्षक अपना अभिमत आगे बढ़ाएंगे। उसी के आधार पर चुनाव डिसाइड किया जाएगा। नाड़ा पायजामा छाप है नए नवेले कांग्रेसी नेताओं का इसमें बोलबाला होने की संभावना है शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए प्रमुख दावेदारों में से लगातार कांग्रेस पार्टी में कार्य करने वाले जुझारू नेताओं की वैसे तो कमी नहीं है। पुराने कांग्रेसी परिवार लगभग वरिष्ठ कांग्रेसजन घर बैठ जाने के कारण शहर कांग्रेस अध्यक्ष जैसा पद भी प्रदेश अध्यक्ष की सहमति के उपरांत ही तय हो पाएगा। वैसे भी राज्य में भाजपा ने संपूर्ण कार्यकारिणी घोषित कर दी है। इसलिए कांग्रेस में अब जल्द कार्यकारिणी बनाने का दबाव बना हुआ है।
राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी : कांग्रेस की राजनीति में जिला /शहर अध्यक्ष चुनाव को लेकर गहमा -गहमी भरे माहौल में पर्यवेक्षकों के आते ही राजनीतिक सरगर्मी औऱ भी बढ़ गई। कांग्रेस का जिला अध्यक्ष होना किसी जमाने में किसी मंत्री की तरह पावर फुल माना जाता था। नगर बदलते राजनीतिक परिवेश में नेतागिरी का स्वभाविक स्वरूप ही बदल चुका है। अब पार्टी के प्रति निष्ठा ने व्यक्तिविशेष की निष्ठा तक सिमट तक रह गई है। नए नवेले नेताओ के पैसे के दम पर किसी भी पद पर काबिज होने का सिलसिला पिछले 15 सालों से निरंतर चल रहा है। एैसे में पर्यवक्षकों की रिपोर्ट की औपचारिकता पर सवाल उठने लगे है। पार्टी के प्रति समर्पित नेता हासिए पर है और अपने रसूख और पैसे के बल पर कांग्रेस में पद प्रतिष्ठा पाकर कांग्रेस की विचारधारा की धज्जियां उड़ाने वाले लोग कांग्रेस की दुहाई दे रहे है। एैसे में पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट फाइल में बंद रहेंगे औऱ सिफारिसी लोग फिर के कांग्रेस में काबिज होकर अपनी स्वार्थ की राजनीति से दूषित करेंगे जिससे पार्टी को फायदा के बजाय नुकसान ही होगा। कहां है शुक्ला परिवार, वोरा परिवार, प्रमोद चौबे, ठाकुर परिवार, प्रमोद दुबे पुराने और वरिष्ठ कांग्रेसजनों का नगणनिय भूमिका बनाते जा रहे हैं। नए नवेले कांग्रेसजन।
कांग्रेस पहले मुस्लिम को शहर अध्यक्ष बनाती थी जैसे स्व. अब्दुल हमीद हयात, और स्व. इकबाल अहमद रिजवी 25 सालों से ज्यादा शहर कांग्रेस अध्यक्ष की पद पर रहे। अब ब्राह्मण समुदाय को बनाने की तैयारी, पुराने नेताओं का नाम लेंगे श्रीकुमार मेनन, सुबोध हरितवाल और प्रीति शुक्ला के अलावा भूपेश बघेल समर्थक नए नवेले जोगी कांग्रेस से आए कई कार्यकर्ता और नेता भी अपनी दावेदारी की दौड़ में शामिल हो सकते हैं। परदेशिया गैंग भी अपनी संभावना तलाश रही है।





