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Bhongapaal. भोंगापाल। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज भोंगापाल में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान क्षेत्र को अनेक विकास परियोजनाओं की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जनता को संबोधित करते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिनमें पुलिया निर्माण से लेकर सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने वाली योजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा स्थानीय जनता के लिए उम्मीदों की नई किरण लेकर आया है।
नदी पार के गांवों को राहत: दो उच्च स्तरीय पुलियों की घोषणा
भोंगापाल क्षेत्र में आने-जाने में सबसे बड़ी समस्या रही है — पलेना और परोदा नदियों पर पुल का अभाव। इस समस्या को लेकर ग्रामीण वर्षों से मांग कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने जनभावनाओं को समझते हुए घोषणा की कि पलेना नदी और परोदा नदी पर उच्च स्तरीय पुलियों का निर्माण किया जाएगा, जिससे वर्षा ऋतु में होने वाली आवाजाही की समस्या से निजात मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार की प्राथमिकता अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक विकास की पहुंच सुनिश्चित करना है। पलेना और परोदा नदी पर पुल का निर्माण न केवल आवागमन को सुगम बनाएगा बल्कि ग्रामीणों की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी गति देगा।”
भोंगापाल बुद्ध महोत्सव के लिए 25 लाख की सौगात
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भोंगापाल बुद्ध महोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और बौद्ध परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने महोत्सव के सफल आयोजन के लिए ₹25 लाख की राशि देने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आने वाले वर्षों में इस महोत्सव को और अधिक भव्य बनाने के लिए निरंतर सहयोग करती रहेगी।
सांस्कृतिक दलों को मिलेगा बढ़ावा, 1 करोड़ की घोषणा
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए राज्य के सांस्कृतिक दलों के प्रोत्साहन के लिए ₹1 करोड़ की राशि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय लोक कलाकारों को मंच, साधन और अवसर उपलब्ध कराकर उनकी कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया जाए। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान हमारी अस्मिता है। हमारी सरकार कला, संस्कृति और भाषा के संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास करेगी।”
भोंगापाल बनेगा सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र
मुख्यमंत्री ने भोंगापाल को सांस्कृतिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना का भी ऐलान किया और इसके लिए ₹1 करोड़ रुपये की विशेष राशि स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बौद्ध पर्यटन और पारंपरिक सांस्कृतिक स्थलों को एक साथ जोड़कर एक विशेष सांस्कृतिक सर्किट तैयार किया जाएगा, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्राप्त होंगे।
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