छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सौम्या चौरसिया 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल
Shantanu Roy
19 Dec 2025 7:09 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई तेज करते हुए राज्य प्रशासनिक सेवा की निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया को आज विशेष अदालत में पेश किया। विशेष PMLA कोर्ट ने सौम्या चौरसिया को 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने के आदेश दिए। सौम्या को दो दिन पहले ईडी ने गिरफ्तार किया था और प्रारंभिक रिमांड पूरी होने के बाद आज फिर कोर्ट में पेश किया गया। सौम्या चौरसिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की डिप्टी सेक्रेटरी रह चुकी हैं, पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। ईडी के अनुसार सौम्या की गिरफ्तारी पप्पू बंसल उर्फ लक्ष्मी नारायण अग्रवाल, तांत्रिक केके श्रीवास्तव और कारोबारी अनवर ढेबर के होटल मैनेजर दीपेन चावड़ा के बयानों के आधार पर की गई है। इसके साथ ही जांच एजेंसी को सौम्या, रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर–चैतन्य बघेल के बीच हुई चैट्स से कई अहम डिजिटल सबूत भी हाथ लगे हैं।
ईडी की जांच में यह सामने आया है कि सौम्या चौरसिया को शराब सिंडिकेट से लगभग 115.5 करोड़ रुपये की POC (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) प्राप्त हुई थी। डिजिटल रिकॉर्ड, जब्त दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और लिखित बयानों के आधार पर एजेंसी का दावा है कि सौम्या शराब घोटाले के कथित सिंडिकेट की सक्रिय सदस्य थीं और नीति निर्माण से लेकर अवैध कमाई के वितरण तक की प्रक्रिया में उनकी भूमिका रही। इसी मामले में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को भी ईडी ने प्रोडक्शन रिमांड पर कोर्ट में पेश किया। अदालत ने निरंजन दास को तीन दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया है। ईडी अब सौम्या चौरसिया से मिले इनपुट के आधार पर निरंजन दास से पूछताछ करेगी। उल्लेखनीय है कि निरंजन दास पहले से ही आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा दर्ज शराब घोटाले की एफआईआर में न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी के अनुसार छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल 2019 से 2023 के दौरान शराब नीति में बदलाव कर एक संगठित सिंडिकेट के जरिए करीब 3200 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया। आरोप है कि नीति की शर्तें इस तरह बनाई गईं कि चुनिंदा कंपनियों और सप्लायरों को ही लाभ मिल सके।
इन कंपनियों ने नोएडा की एक फर्म के जरिए नकली होलोग्राम और सील तैयार करवाईं। नकली होलोग्राम लगी महंगी शराब को सरकारी दुकानों के माध्यम से बेचा गया, जिससे शासन को बिक्री की वास्तविक जानकारी नहीं मिल पाती थी और बिना एक्साइज टैक्स दिए शराब की बिक्री होती रही। इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस अवैध कमाई का उपयोग राजनीतिक गतिविधियों, कांग्रेस भवन निर्माण और नेताओं, अधिकारियों व मंत्रियों तक रकम पहुंचाने में किया गया। इसी कड़ी में अब तक कई बड़े नामों पर कार्रवाई हो चुकी है। शराब घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, चैतन्य बघेल, रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारी भी आरोपी बनाए गए थे, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई। सौम्या चौरसिया के खिलाफ कुल पांच बड़े मामलों में जांच चल रही है। वे 1164 करोड़ रुपये के चार घोटालों में पहले भी जेल में रह चुकी हैं। 3200 करोड़ के शराब घोटाले में यह उनकी दोबारा गिरफ्तारी है। इसके अलावा 500 करोड़ और 540 करोड़ रुपये के कोल लेवी घोटाले, 575 करोड़ रुपये के डीएमएफ घोटाले और 49 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी ईडी और ईओडब्ल्यू की जांच जारी है। ईडी की ताजा कार्रवाई के बाद इस बहुचर्चित घोटाले में जांच का दायरा और व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।
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