छत्तीसगढ़

पर्यटन नक्शे में तेजी से बढ़ता छत्तीसगढ़

Nilmani Pal
20 Feb 2026 8:18 AM IST
पर्यटन नक्शे में तेजी से बढ़ता छत्तीसगढ़
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छत्तीसगढ़ की माटी और आबो हवा के पर्यटन विकास के लिए सबसे अच्छी और सबसे सुंदर प्रकृति का प्रसूति मानी जाती है तो राज्य के मुख्यमंत्री असली आदिवासी नेता के पर्यटन के लिए सबसे कारागार और अच्छे उपायों को अपनी नीति के अनुरूप अमलीजामा पहनाने में कही भी पीछे नहीं हट रहे। आदिवासी सीएम के लिए गए निर्णय के अनुसार पर्यटन क्षेत्र में विगत दो सालों में छत्तीसगढ़ विश्व के पर्यटन पटल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर अब धाक ज़माने की ओर आगे बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ का अधिकांश भू-भाग प्राकृतिक जंगलों पहाड़ों से झरनों से आदिवासी और छत्तीसगढ़ी परंपराओं को लेकर समेटा पड़ा है और केरल गोवा पॉन्डिचेरी ऊटी मनाली जैसे पर्यटन स्थल से भी ज़्यादा ने सुगम रास्ते हरियाली और जल स्रोतों पहाड़ों से आकर्षण आबो हवा तरोताजा पर्यावरण के साथ देश का नाम छत्तीसगढ़ पर्यटन क्षेत्र में रोशन कर रहा है। आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया राष्ट्रव्यापी पर्यटन के लिए प्रमोशन के लिए कई सारे रूह्र किए गए जिसका परिणाम बहुत अच्छा शुरुआती दौर में दिखने को मिला. फिल्म सिटी का कॉरिडोर हो भोरमदेव मंदिर का कॉरिडोर हो होम स्टेट नीति हो जिसमें ब्याज की सब्सिडी ग्रामीण समुदाय को पर्यटन के आधार में समर्थन करती है.


छत्तीसगढ़ पर्यटन ने भी इस स्पेन थाईलैंड और वियतनाम जैसे विदेशों में आयोजित वैश्विक यात्रा कार्यक्रम भाग लेकर अपने अंतरराष्ट्रीय दृश्यता को बढ़ाया है,यह बहुत बड़ी उपलब्धि है, मायाली बग़ीचा विकास बड़े पैमाने पर ये पर्यटन क्षेत्र में भी बड़ा काम हुआ है, भारत सरकार ने तीन प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक मायाली बग़ीचा को सर्किट के तौर पर मंज़ूर किया गया। और 10 करोड़ रुपए के पर्यटन विकास के लिए राशि मंज़ूर किया जिसे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भूमि पूजन करके नई शुरुआत कर दी। ग्वालियर के संयोग से गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया जिसमें जापानी संस्कृति फिल्ड और असाइनमेंट और कार्यशाला शामिल थी जिसमें 45 छात्रों ने भाग लिया इसका उद्देश्य पर्यटन मूल्य की श्रृंखला में सेवा की गुणवत्ता और कार्यबल क्षमता मज़बूत करना है।


होम स्टेट की नई नीति के अनुसार 2025-2030 के बीच में पाँच सो नए होम स्टे विकसित करना और उसके लिए कम से कम दस करोड़ रुपये का बजट को भी आवंटित करना ये एक विशेष कार्यक्रम के तहत आम जनों के लगाव और ज़रूरी पर्यटन के विकास के लिए भी था। चित्रकूट ग्लोबल डेस्टिनेशन डेवलपमेंट सिफऱ् उनका विकास के होटल छग जौहर का पुनरुध्दार कर कई महान पर्यटन योजनाओं पर कार्य करना लगातार पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ में छग पर्यटन विश्व के मानस पटल पर आगे लाने का बड़ा कारनामा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के देख रेख में आगे बढ़ता जा रहा है इसी कड़ी में एथनिक डेस्टिनेशन ग्लोबल ब्रांडिंग की रणनीति पर छत्तीसगढ़ राज्य भारत के प्रमुख ईकोएथनिक गंतव्य आधुनिक गतिविधियां के रूप में स्थापित होने जा रहा है. छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास को गहरी सोच और अपना पन लिए हुए आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सच्चाई के साथ आगे बढ़ाने का संकल्प लेकर बिना शोर-शराबे तामझाम के आगे बढ़ाने का काम किया।


सीएम साय ने कहा कि मैनपाट महोत्सव हर साल मनाया जाएगा। यह समारोह सरगुजा की संस्कृति और अस्मिता को दिखाने का अच्छा माध्यम है। आने वाले समय में यहां की संस्कृति से देश दुनिया परिचित होगी। मु यमंत्री साय ने कहा कि मैनपाट महोत्सव में बाहर से आने वाले और स्थानीय कलाकारों को मंच मिलेगा और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने मैनपाट में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 1 करोड़ रुपए और सीतापुर में सर्व सुविधायुक्त बस स्टैंड बनाने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में मैनपाट महोत्सव की तिथियां पहले से तय की जाएंगी और महोत्सव को और भव्य बनाने के लिए अधिक राशि स्वीकृत की जाएगी। समारोह में सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ का चौतरफा विकास हो रहा है। बस्तर पिछले 40 साल से ज्यादा समय तक आंतकवाद का दंश झेल रहा था। पिछले दो सालों में प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की दृढ़ इच्छा शक्ति से यह क्षेत्र नक्सवाद से मुक्त हो रहा है। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करना है। जो लगभग अंतिम चरणों में चल रहा है।


छत्तीसगढ़ सरकार ने साल 2025 से 2030 के लिए एक नई होमस्टे नीति को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी बहुल क्षेत्रों, विशेषकर माओवाद प्रभावित बस्तर संभाग में पर्यटन को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस नीति को स्वीकृति दी गई। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा बल नक्सल विरोधी अभियानों को सक्रिय रूप से अंजाम दे रहे हैं।

बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्र छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध आदिवासी विरासत के लिए प्रसिद्ध हैं। होमस्टे नीति के माध्यम से इन क्षेत्रों को न केवल घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाया जाएगा, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर भी प्राप्त होंगे।

स्थानीय जीवन और संस्कृति का अनुभव

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, होमस्टे परियोजनाओं के माध्यम से पर्यटकों को ग्रामीण जीवन शैली, स्थानीय संस्कृति, आदिवासी कला, हस्तशिल्प और भोजन का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा। स्थानीय कारीगर, कलाकार और किसान अपने उत्पादों और सेवाओं के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होंगे जिससे 'वोकल फॉर लोकल' जैसे राष्ट्रीय अभियान को भी मजबूती मिलेगी। यह नीति न केवल आर्थिक विकास का साधन बनेगी, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक समझ को भी बढ़ावा देगी। बस्तर जैसे क्षेत्र, जो अब तक सुरक्षा और अविकास की छाया में रहे हैं, इस नीति के तहत पर्यटन मानचित्र पर उभरते हुए नजर आएंगे।

छत्तीसगढ़ होमस्टे परियोजनाओं के प्रमुख लाभ

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू की गई होमस्टे नीति 2025–30 से जुड़े कई व्यापक और स्थायी लाभ हैं। ये लाभ राज्य के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय विकास से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित है:

1. ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों का आर्थिक सशक्तिकरण

· स्थानीय लोगों को आय के नए स्रोत मिलेंगे। वे अपने घरों को पर्यटकों के लिए किराए पर देकर अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे।

· महिलाओं और युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे पलायन में भी कमी आएगी।

2. पर्यटन को बढ़ावा

· राज्य के कम विकसित लेकिन सांस्कृतिक रूप से समृद्ध क्षेत्रों में पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा।

· यह नीति छत्तीसगढ़ को भारत के स्थायी और अनुभवात्मक पर्यटन मानचित्र पर लाएगी।

3. स्थानीय संस्कृति, कला और हस्तशिल्प का संरक्षण

· पर्यटक स्थानीय नृत्य, संगीत, व्यंजन, और कारीगरी का प्रत्यक्ष अनुभव करेंगे, जिससे इन पारंपरिक विधाओं को संरक्षण मिलेगा।

· लोकल उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी, जिससे कारीगरों को आर्थिक लाभ होगा।

4. माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास

· बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्र, विकास की मुख्य धारा से जुड़ेंगे, जिससे वहां के युवाओं को हिंसा की बजाय विकास से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।

· सरकार और आम जनता के बीच विश्वास निर्माण को बल मिलेगा।

5. सतत (Sustainable) पर्यटन

· होमस्टे मॉडल प्राकृतिक संसाधनों का सीमित उपयोग करता है और स्थानीय पारिस्थितिकी के अनुकूल होता है।

· इससे बड़े होटल उद्योगों से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान से बचा जा सकता है।

6. ‘वोकल फॉर लोकल’ को बल

· स्थानीय उत्पादों और सेवाओं को प्राथमिकता मिलने से आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।

· यह नीति आत्मनिर्भर भारत अभियान के लक्ष्यों को भी मजबूती प्रदान करेगी।

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