
परदेशिया फैक्ट्री मालिक कर रहे नेतागिरी, चोला सामाजिक नेता का और काम नकली समानों का
खाद्य सामग्री, कास्मेटिक, साबुन, शैंपू, पेस्ट, इलेक्ट्रानिक, मोबाइल, सिगरेट, शराब, गुटखा
उपभोक्ता नकली खाद्य सामग्री खाते ही हो रहे है पैरालेसिस अटैक के शिकार
बच्चे घटिया चिप्स -कुरकुरे औऱ गंदे पानी से बनाए आइस्क्रीम खाकर हो रहे है कुपोषित, डिहाइड्रेशन
नकली ब्रांडेड उत्पादों से पटा रायपुर का बाजार, गुढिय़ारी-डुमरतलाई, बंजारी चौक बना सबसे बड़ा केंद्र
नकली चना बेसन और आटा की भरमार मटर दाल को चना दाल का आकार दे रहे
तिल्दा, बलौदाबाजार, देवपुरी, लालपुर परदेशिया लोगों ने लगाई अवैध फैक्ट्रियां जानलेवा नकली खाद्य सामग्री का हो रहा उपयोग
नकली खाद्य सामग्री मसाले, बेसन, कुरकुरे जैसे अन्य रोजमर्रा की खपत वाली वस्तु के निर्माता अब सामाजिक और राजनीतिक नेतागिरी अब नकली धंधे को छुपाने के लिए कर रहे
सनातन का अपमान
शहर में देवी-देवताओं के नाम से भी लोग दुकानदारी चला रहे हैं और सामान इस्तेमाल में लेन के बाद रैपर को नाली में भी फेकने से नहीं चूकते जो सनातन का अपमान है। जिस जगह बेसन,आटा या अन्य खाने की चीजें बन रही है वहां तो फैक्ट्री का और भी बुरा हाल है। वहां देवी देवताओं की तस्वीर का अपमान किया जाता है। वहीं सामाजिक संगठन और छत्तीसगढ़ के प्रमुखकर्ता धर्ता जो अपने आप को छत्तीसगढ़ अस्मिता का रखवाला कहते हैं इनपर चूप क्यों? और छत्तीसगढ़ शासन के ड्रग-फूड कंट्रोलर विभाग मोटी रकम की आड़ में जनता के साथ खिलवाड़ तो नहीं कर रहे?
रायपुर (जसेरि)। राजधानी में बड़े -बड़े राइसमिलर औऱ चनादाल बेसन उत्पादक अधिक कमाई के लिए लाखड़ी दाल औऱ बटरा चना का बेसन बनाकर पैकेजिंग में देवी-देवताओं का फोटो छाप कर उपभोक्ताओ को इमोशनल ब्लेकमेलिंग कर अपने नकली उत्पाद को बेखौफ बेच रहे है। छत्तीसगढ़ का पूरा बाजार घटिया औऱ नकली खाद्य सामग्री बेचने वाले माफिया के जद में है। बाजार में में ग्लेमरस पैकेजिंग कर देवी-देवताओं के प्रिंट करवा कर शहर सहित आसपास के गांवों में नकली खाद्य सामग्री बेचकर मालामाल हो रहे है औऱ उपभोक्ता सस्ते में मिल रहे नकली खाद्य सामग्री को खरीद कर खतरनाक बीमारी के शिकार हो रहे है। बीपी, शुगर तो आन बात हो गई है, अब तो नकली खाद्य सामग्री खाते ही लोग पैरालेसिस अटैक के शिकार हो रहे है। साथ ही बच्चे घटिया चिप्स -कुरकुरे औऱ गंदे पानी से बनाए जा रहे आइसक्रीम खाकर कुपोषण के शिकार हो रहे है। नकली सामान बनाने वाले विभिन्न समाजों के मुखिया बन गए हैं और अपने कार्यक्रमों में बड़े बड़े नेताओं को बुलाकर सामाजिक आयोजन करवाकर नेताओं के साथ फोटो खिचवाकर अधिकारीयों को दिखते हैं और धौंस जमाते हैं की हमारा बड़े नेता से बहुत अच्छा स बन्ध है, अधिकारी भी फोटो देखकर डर जाते हैं और छापेमारी की कार्रवाई करने से पीछे हट जाते हैं।
राजधानी में सट्टा-जुआ, नशीली दवाई, गांजा, शराब के चंगुल से अभी मुक्त भी नहीं हुआ कि लगातार छापेमार कार्रवाई के बाद भी काले कारोबारियों ने कमाई के नए-नए जुगाड़ निकाल लिए है। पिछले दिनों डूमरतराई में भारी मात्रा में नकली उत्पाद मिलने की शिकायत पर जब खाद्य और औषधि विभाग ने छापेमार कार्रवाई की तो कई चौकांने वाले तथ्य सामने आए। नकली उत्पाद बनाकर बड़ी कंपनियों को नुकसान पहुंचाने का कारोबार बेखौफ धड़ल्ले से चल रहा है।
जानकार सूत्रों ने बताया कि पहले भाठापारा, तिल्दा को नकली ब्रांडेड उत्पाद का सेंटर माना जाता था, जहां सैकड़ों बार छापामार कार्रवाई में टीवी से लेकर ब्रांडेड कंपनियों के कई उत्पाद पकडाए है जो रिपैकिंग के साथ नकली रैपर में ब्रांडेड उत्पाद वाली कंपनी के नाम से पैकेजिंग करने का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। नकली उत्पाद बेचकर खुलेआम कारोबारी कमाई कर रहे है।
सूत्रों ने बताया कि डूमरतराई में कई होलसेलर और डिस्ट्रीब्यूटर्स हैं, जिनके संरक्षण में ही ब्रांडेड कंपनियों के नकली उत्पाद कम रेट पर बेचकर खुदरा और छोटे व्यापारियों को सस्ता देने का लालच देकर मनमाना कमाई कर रहे है। इसके पहले नकली चाय पत्ती खपाने के मामले में गोलबाजार में छापामार कार्रवाई की गई थी। सूत्रों की मानें तो गुढिय़ारी नकली उत्पाद का प्रदेश का सबसे बड़ा केंद्र होने बन गया है। इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से करीब होने के कारण यहां आनलाइन आर्डर के सामानों की भी सप्लाई धड़ल्ले से निजी वाहनों से हो रही है।
डूमरतराई, गुढिय़ारी और गोलबाजार नए केंद्र
रामसागरपारा से थोक कारोबार का डूमरतराई शि ट होने के बाद अब डूमरतराई नकली उत्पाद का सबसे बड़ा दूसरा केंद्र बन चुका है। यहां एमआरपी रेट से 30 फीसद कम रेट पर किराना व्यापारियों को नकली माल खपाने दिया जा रहा हैं। तेल, साबुन, आटा, नमक, पेस्ट, ब्रश, घी, साबुदाना, काजू, लौंग, शै पू, दाल-चावल के साथ जितने ब्रांडेड कंपनियां है उनके नकली उत्पाद कम रेट पर खपाया जा जाता है।
नकली इलेक्ट्रॉनिक समान भी खप रहे मार्केट में
प्रशासन की कोई भी टीम नहीं करती जांच, उपभोक्ता हो रहे हैं शिकार। शहर में ब्रांडेड के नाम पर नकली डेली नीड्स के प्रोडक्ट के अलावा इलेक्ट्रानिक्स आइटम भी बिक रहे हैं। ब्रांडेड इलेक्ट्रानिक्स आइटम के नाम पर नकली और लोकल स्तर पर असेंबल सामान बेचे जा रहे हैं। इसकी जांच करने के लिए प्रशासन की कोई भी एजेंसी करने नहीं जाती है। उपभोक्ता ब्रांडेड सामान की कीमत में नकली सामान खरीद रहे हैं। कई बार नकली मोबाइल, चार्जर, बैटरी, पॉवर बैंक, इयरफोन, पेनड्राइव जैसी चीजें बरामद हो चुकी हैं। इसके बाद भी इसकी निगरानी के लिए पुलिस या प्रशासन की जि मेदार टीम मैदान में नहीं उतरती।
त्योहार में बढ़ेगी खपत
पिछले दिनों त्योहारी सीजन में मार्केट में बड़ी मात्रा में नकली इलेक्ट्रानिक्स आइटम खपाए गए। ब्रांडेड कंपनियों के अधिकारियों के मुताबिक त्योहार के सीजन में लोकल स्तर पर नकली आइटम काफी तैयार होते हैं। और इसे ऑफर के नाम पर खपाते हैं। असली और नकली इलेक्ट्रानिक्स आइटम में अंतर करना आमलोगों के लिए मुश्किल होता है। इस कारण इसकी पहचान नहीं हो पाती है।
खुलेआम बेचते हैं कोई रोक नहीं
रविभवन, लालगंगा, शास्त्री बाजार जैसे बड़े मार्केट में भी कई दुकानदार खुलेआम लोकल और ब्रांडेड के नाम से बेसन और आता सहित अन्य माल बेच रहे हैं। मोबाइल एसेसीरिज हो या कोई अन्य इलेक्ट्रानिक सामान हो, उसमें दो तरह सामान रखते हैं। ब्रांडेड और लोकल। कई ब्रांडेड आइटम में लेबल तो कंपनी के होते हैं, लेकिन उसका उपयोग करने के बाद पता चलता है कि वह नकली आइटम है।
सडक़ किनारे सज गए बाजार
शहर के प्रमुख सडक़ों के किनारे फुटपाथ कई दुकानें खुल गई हैं, जिनमें ब्रांडेड कंपनियों के नाम से मोबाइल एसेसिरीज बेची जा रही है। सस्ता होने के कारण लोग इसकी जमकर खरीदी कर रहे हैं, लेकिन इसकी गारंटी नहीं होती और न ही कोई बिल दिया जाता है।
कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती
पुलिस ने कई बार नकली मोबाइल, चार्जर, बैटरी, पॉवर बैंक सहित मोबाइल एसेसीरिज को पकड़ा है, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ती है। केवल जिसके पास सामान मिलता है, उसके खिलाफ कार्रवाई होती है। इसके बाद उसके आगे नहीं बढ़ती है।
नकली प्रोडक्स का खेल
असली के रेट में नकली माल बेचने का धंधा राजधानी में बेखौफ चल रहा है। इसे रोकने के लिए ठोस पहल नहीं हो रही है। केवल ब्रांडनेम देखकर ही खरीदारी करना नुकसानदायक साबित हो रहा है। वॉशिंग पाउडर, शैंपू, चाय, इंजन ऑयल, बेयरिंग, घड़ी, चश्मा, फेयरनेस क्रीम, कोल्डक्रीम आदि जैसी कई चीजें ब्रांडेड के नाम पर नकली बनाकर बेचा जा रहा है। इसका खुलासा संबंधि ब्रांड कंपनी की इन्वेस्टीगेशन टीमों की छापेमारी से हुआ है। कंपनियों की शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई भी की, लेकिन इस नकली के कारोबार में रोक अब तक नहीं लग पाई है। पिछले एक साल में ब्रांडेड के नाम पर नकली सामान बेचने के एक दर्जन मामले सामने आ चुके हैं।
ग्रामीण इलाकों में ज्यादा खप रहा
शहर से लगे ग्रामीण इलाकों के छोटे-छोटे आउटलेट्स और दुकानों में ब्रांडेड के नाम नकली सामान ज्यादा खप रहा है। ग्रामीण इलाकों में शहर से ही माल जाता है। इसके रोकथाम के लिए कोई प्रयास भी नहीं हो रहा है।





