छत्तीसगढ़
CG: व्याख्याता पर गंभीर आरोप, बर्खास्तगी की मांग को लेकर ग्रामीणों का चक्काजाम
Shantanu Roy
14 Oct 2026 1:32 PM IST

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Kawardha. कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड स्थित ग्राम पोलमी में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के एक व्याख्याता के खिलाफ गंभीर आरोपों को लेकर विवाद बढ़ गया है। व्याख्याता की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप), बजरंग दल और ग्रामीणों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ट्रैक्टर खड़े कर चक्काजाम किया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की। वहीं, शिक्षा विभाग ने शिकायत पर प्रारंभिक जांच के बाद व्याख्याता को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्न कर दिया है। इसके साथ ही निलंबन की सिफारिश करते हुए लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र भेजा गया है।
जानकारी के अनुसार, पोलमी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पदस्थ व्याख्याता मोहम्मद फिरोज खान के खिलाफ ग्राम पंचायत के सरपंच, उपसरपंच, शाला विकास एवं प्रबंधन समिति और ग्रामीणों ने शिकायत की थी। शिकायत में व्याख्याता पर छात्राओं से संबंधित गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों और संगठनों ने कथित धर्मांतरण तथा छात्राओं को बहला-फुसलाकर संबंध बनाने जैसे आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से 13 अक्टूबर को जारी पत्र के अनुसार, शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विभागीय जांच के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए जांच अधिकारी नियुक्त किया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जांच अधिकारी की रिपोर्ट में शिकायत को प्रथम दृष्टया सही पाया गया और संबंधित व्याख्याता को प्रारंभिक तौर पर दोषी माना गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने व्याख्याता के निलंबन की अनुशंसा करते हुए लोक शिक्षण संचालनालय को पत्र भेजा है। साथ ही तत्काल प्रशासनिक व्यवस्था के तहत व्याख्याता को विद्यालय से हटाकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में संलग्न कर दिया गया है। हालांकि, कार्यालय में संलग्न किया जाना बर्खास्तगी नहीं है और अंतिम विभागीय कार्रवाई संबंधित सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगी। इधर, शिक्षा विभाग की कार्रवाई के बावजूद ग्रामीणों और हिंदू संगठनों का विरोध जारी रहा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल कार्यालय में संलग्न करने से मामला समाप्त नहीं होगा। उनकी मांग है कि संबंधित व्याख्याता को सेवा से बर्खास्त किया जाए और लगाए गए गंभीर आरोपों के संबंध में एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
मंगलवार, 13 अक्टूबर की सुबह प्रदर्शनकारियों ने ग्राम पोलमी में धरना शुरू किया। सुबह करीब नौ बजे से लोग सड़क पर एकत्र होने लगे। प्रदर्शनकारियों ने टेंट लगाकर और सड़क पर ट्रैक्टर खड़े कर चक्काजाम किया। इस दौरान अपनी मांगों को लेकर ग्रामीणों और संगठनों के कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। नायब तहसीलदार पूजा सिंह और विकासखंड शिक्षा अधिकारी दीपक ठाकुर ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। अधिकारियों ने निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी संबंधित व्याख्याता की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं से संबंधित शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मामले में कड़ी कार्रवाई आवश्यक है। वहीं, प्रशासन की ओर से जांच प्रक्रिया और नियमों के अनुसार निर्णय लेने का आश्वासन दिया गया है।
इस पूरे मामले में यह महत्वपूर्ण है कि व्याख्याता पर लगाए गए आरोप अभी अंतिम रूप से प्रमाणित नहीं हुए हैं। विभागीय जांच में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने और किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक आरोप न्यायिक प्रक्रिया में सिद्ध होने के बीच अंतर होता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में संबंधित आरोपों पर किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष की पुष्टि नहीं हुई है। पोलमी में हुए इस प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग की कार्रवाई और आगे के प्रशासनिक फैसले पर लोगों की नजर बनी हुई है। एक तरफ ग्रामीण और संगठन बर्खास्तगी तथा गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ विभाग ने निलंबन की अनुशंसा कर व्याख्याता को डीईओ कार्यालय में संलग्न कर दिया है। अब आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और सक्षम अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करेगी।
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