छत्तीसगढ़
CG: रिश्वत मामले में पकड़े गए बाबू को कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा
Shantanu Roy
10 April 2026 6:21 PM IST

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छग
Sarguja. सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ममता पटेल की अदालत ने रिश्वत मामले में दोषी पाए गए एक लिपिक को तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर अर्थदंड भी लगाया है। यह मामला वर्ष 2020 में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा की गई कार्रवाई से जुड़ा है, जिसमें आरोपी को 10 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। मामले के अनुसार, बतौली ब्लॉक के मिडिल स्कूल घोघरा में पदस्थ रहे हेडमास्टर बरनावास मिंज 28 फरवरी 2017 को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें अवकाश नकदीकरण और सातवें वेतनमान के एरियर्स सहित लगभग 7 लाख रुपए की राशि प्राप्त होनी थी।
इस प्रक्रिया के लिए उन्होंने बीईओ कार्यालय के लिपिक प्रमोद गुप्ता से संपर्क किया था। आरोप है कि प्रारंभ में आरोपी लिपिक ने बिल तैयार करने के नाम पर 5 हजार रुपए की रिश्वत ली थी। इसके बाद उसने सेवानिवृत्त शिक्षक को यह कहकर और पैसे की मांग की कि कोषालय में बिल जमा कराने के लिए 10 हजार रुपए अतिरिक्त देने होंगे, तभी एरियर्स की राशि जारी हो पाएगी। लगातार दबाव और परेशान होकर पीड़ित ने मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो से की। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की जांच की और योजना बनाकर कार्रवाई की। 30 दिसंबर 2020 को बतौली स्थित बीईओ कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई करते हुए आरोपी प्रमोद गुप्ता को 10 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। इसके बाद मामले को न्यायालय में पेश किया गया।
लंबी सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश ममता पटेल की अदालत ने आरोपी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाया। अदालत ने उसे तीन वर्ष के कठोर कारावास के साथ 5000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। यदि अर्थदंड अदा नहीं किया जाता है तो उसे अतिरिक्त छह माह का कारावास भुगतना होगा। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा और ऐसे मामलों में कठोर दंड दिया जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर रोक लग सके। इस फैसले के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि यह मामला एक सेवानिवृत्त शिक्षक से जुड़ा हुआ था, जिन्हें अपने ही हक की राशि के लिए रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया था।
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