1 करोड़ लेकर टामन गिरोह ने बना दिया डिप्टी कलेक्टर, CBI जांच में खुलासा

रायपुर। राजधानी से लगभग 125 किलोमीटर दूर बारनवापारा के घने जंगलों में सीजीपीएससी भर्ती घोटाले की साजिश रची जा रही थी। CBI ने विस्तृत एवं गहन जांच के पश्चात 31/12/2025 को सक्षम न्यायालय में अंतिम चार्जशीट प्रस्तुत की, जिसमें CGPSC के अध्यक्ष, सचिव एवं परीक्षा नियंत्रक सहित कुल 13 आरोपियों को अभियुक्त बनाया गया। जांच के दौरान बारनवापारा रिसॉर्ट में पड़े रेड में कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज व 29 अभ्यर्थियों की सूची मिली थी। CBI ने 29 नए लोगों को गवाह के रूप में शामिल किया है। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि ये 29 अभ्यर्थी एक ही कोचिंग सेंटर के संचालक (उत्कर्ष चंद्राकर) के मार्गदर्शन में परीक्षा में शामिल हुए थे। हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि इन 29 में से किसी भी अभ्यर्थी का अंतिम चयन नहीं हुआ और वे कोई पद नहीं प्राप्त कर सके ।
भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सीजीपीएससी 2021 की परीक्षा 26 से 29 जुलाई को हुई थी। अभ्यर्थियों को राज्य सेवा परीक्षा का असली प्रश्न पत्र दिया गया और उन्हें कमरों में ही परीक्षा हल करने की व्यवस्था की गई। आरोपितों ने परीक्षा से लेकर चयन तक की प्रक्रिया के कई राज सीबीआइ के सामने उजागर किए हैं। विकास और उत्कर्ष चंद्राकर ने सीजीपीएससी मेंस का प्रश्नपत्र साल्वर को दिया। चार्जशीट में यह भी स्पष्ट हुआ कि पीएससी में चयन के लिए पद के अनुसार भारी-भरकम रेट तय थे, जैसे डिप्टी कलेक्टर बनने के लिए एक करोड़ रुपये।
गौरतलब है कि CGPSC 2021 की मुख्य परीक्षा 26 से 29 जुलाई 2022 के बीच तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में आयोजित की गई थी। CBI का कहना है कि इस घोटाले में कई उच्च पदस्थ अधिकारी, नेता और प्रभावशाली लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हो सकते हैं, जिनकी भूमिका की जांच जारी है।
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