छत्तीसगढ़

राजधानी बना नशे का गढ़ : जहां चलता है बार और होटल वालों का कानून

Nil dhankar
30 July 2026 11:13 AM IST
राजधानी बना नशे का गढ़ : जहां चलता है बार और होटल वालों का कानून
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राजधानी में बेखौफ चल रहा सट्टा और नशे का कारोबार

अब नाबालिग बच्चे और महिलायें भी इस काम में संलिप्त

छुटभैये नेताओं की फैक्ट्री में तैयार हो रहे है सटोरिए और नशे के सौदागर

रायपुर। राजधानी में नशे के कारोबार बेखौफ चल रहा है । बार मालिक जब तक चाहे शराब परोस सकता हैं। आधी रात को जब शहर के लोग गहरी नींद सोने लगते हैं तब राजधानी के होटलों,क्लबों और बारों में नशे का सूरज ऊगता है जो अपने ताप से बार सहित लोगों को जला रहा है।

देर रात अगर कोई हादसा हो जाये तो फिर कोई माईबाप नहीं। हार्डवेयर की दुकन में लगी आग से ऑक्टोपस बार भी जलकर खाक हुई । आगजनी की भयावहता का अंदाज इस बात से ही लगाया जा सकता है कि आग बुझाने में काफी मशक्कत करना पड़ा, भरी बरसात में फायर ब्रिगेड की लगभग 15 गाड़ी आग बुझाने में लगी रही।लेकिन सुबह तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका। और लगभग चार से पांच दुकानें जलकर खाक हो गई गई यह बार रायपुर का वर्षो पुराना बार है जहां शराब नहीं पीने वालों शराबियों की जमात से अलग कर दिया जाता है। आक्टोपस बार में दारू नहीं पिया तो क्या पिया। बिगड़े रईस लोगों का यह स्टेट सिंबल बार है जहां जहां दारू पीने के बार जन्नत नसीब हो जाता है।

पीने के बाद लड़ाई झगडे भी होना आम बात

प्रत्यक्ष्दर्शी बताते हैं की देर रात बार, होटल खुले रहते हैं और पीने के बाद लड़ाई झगडे भी होना आम बात है। पुलिस प्रशासन को आगजनी की बारीकी से जाँच करना चाहिए। राजधानी में नशे के कारोबार को जितना रोकने की कोशिश हो रही है उतना ही ज्यादा तादात में इसका कारोबार फ़ैल रहा है। कारोबारी अब नए ट्रेंड में भी काम करने लगे हैं , पहले खुद ही इन सब गंदे कामो को अंजाम देते रहे हैं लेकिन अब इस काम में महिला और बच्चो को भी लगा दिए हैं। जानकार लोग बताते हैं कि इसी वजह से इन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती और इसी बात का ये फायदा उठाते हुए अपने काम को ठिकाना बदल बदल कर अंजाम देते रहते हैं। देखा जा रहा है कि राजधानी और आसपास इलाके में सट्टा, गांजा, और नशाखोरी का तेजी से विस्तार हो रहा है।

सटोरियों औऱ नसे के सौदागरों की जद में राजधानी

राजधानी का ऐसा कोई इलाका नहीं है, जहां नशे के सौदागर, सटोरिए न हों। गली,मोहल्लों के अलावा वीआइपी रोड स्थित होटलों में नशे का करोबार बड़े पैमाने पर चल रहा है। राजधानी के वीआईपी रोड के अलावा अन्य होटल तो इन सबका अड्डा बन गया है। जहां होटल की केटेगिरी देखकर अलग अलग तबके के लोग इन सब कामों में लिप्त पाए जा रहे हैं। गांजा, अफीम, चरस, ब्राउन शुगर, शराब के साथ गली-गली में पनपते सट्टे के कारोबार पर रोक लगाने की मांग तो समाजसेवी करते ही रहते हैं लेकिन सट्टा गांजा जुआ शराब नशाखोरी है की रूक ही नहीं रही है।

पुलिस की आखों में धूल झोंकने जगह-जगह अड्डे बना लिए

खुद पुलिस के आला अफसर भी कोशिश करते हैं कि इन सब पर अंकुश लगे इसके लिए जगह जगह छापामार कार्रवाई तो करते जरूर हैं लेकिन हालत जस का तस है। असामाजिक तत्वों ने अपने धंधों को चलाने के लिए जगह-जगह पर अड्डे बना लिए हैं। उनका संचालन बेखौफ किया जा रहा है। कालीबाड़ी चौक स्थित सुलभ शौचालय के आगे खाली मैदान में दिन और रात सट्टा, जुआ, गांजा, अवैध शराब और नशीली दवाई बेची जा रही हैं। पुलिस की निष्क्रियता के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। पुलिस के आला अधिकारी असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने को लेकर लगातार अफसरों को चेताते हैं। नजीजतन, अवैध कारोबार कुछ दिनों तक बंद रहता है लेकिन फिर से अवैध कारोबार करने वाले मोहल्लों में सक्रिय हो जाते हैं।

पुरे शहर में फैला जाल

जनता से रिश्ता प्रतिनिधि ने पुरानी बस्ती, गंज, गोलबाजार, कोतवाली, खमतराई, गुढिय़ारी, तेलीबांधा, न्यू राजेंद्रनगर इलाके का जायजा लेकर लोगों से बातचीत की। लोगों ने बताया कि पुलिस का दबाव अब बेअसर साबित होने लगा है। खुलेआम सटोरिए सट्टा-पट्टी काट रहे हैं। शराब-गांजा बेचने वाले भी बेधडक़ धंधा कर रहे हैं। शराब की दुकानों के बंद होने के बाद शराब का रेट तीन गुना तक हो जाता है। यही हाल राजधानी के अन्य मोहल्लों का भी है।

रात में होता है गुलजार

रिंगरोड 1-2, रायपुरा, टाटीबंध, महोबा बाजार, पुरानी बस्ती के लाखेनगर चौक, नर्मदापारा, चूनाभ_ी, गुढिय़ारी के पहाड़ीपारा चौक, गोलबाजार थाने के ठीक सामने गली में, नेहरुनगर, कालीबाड़ी, पेंशनबाड़ा, ओसीएम चौक के पास, खमतराई ओवरब्रिज, सड्डू, मोवा माना, नवा रायपुर आदि स्थानों पर लंबे समय से सट्टा-पट्टी, शराब, गांजा बेचने का कारोबार चल रहा है। रहवासियों की शिकायत थाना पुलिस हमेशा नजरअंदाज कर देती है। तय अड्डों पर बैठे कोचिया खुलेआम देसी, अंग्रेजी शराब के साथ-साथ गांजा आदि बेच रहे हैं। शराब, गांजा बेचने का काम सुबह छह बजे से शुरू होता है और शराब दुकान खुलने के दो घंटे बाद तक चलता है। दोपहर एक बजे शराब की अवैध ब्रिकी बंद कर दी जाती है। फिर रात नौ बजे से दोबारा यह काम शुरु होता है, जो सुबह 4 बजे तक अनवरत चलते रहता है।

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