कोसरंगी-खरोरा में कैंसर बीमारी की जड़, दो करोड़ से ज्यादा मांगूर

प्रदेश में हो रहा प्रतिबंधित जहरीली करोड़ों मांगूर मछली का उत्पादन
ग्रामीणों ने मिलकर विधायक से लेकर गृहमंत्री और मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र भेजा
डब्ल्यूएचओ ने मांगूर मछली को पूरे विश्व में प्रतिबंधित किया है पर छत्तीसगढ़ के मत्स्य के भ्रष्ट अधिकारी मोटा माल कमाने के चक्कर में कर रहे अनदेखी
राजधानी सहित पूरे प्रदेश में कैंसर जैसे बड़े रोग फैलाती मछलियां खुलेआम बेधडक़ विश्व में प्रतिबंधित होने के बावजूद बिक रही, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, मत्स्य विभाग बेखबर
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में कंैसर के बढ़े मरीज, इलाज के अभाव में जा रही जान
खरोरा पुलिस और क्राइम स्काट की नजरों से बचकर कोसरंगी में करोड़ों जहरीली मांगूर मछली पालने का अवैध धंधा
जनता से रिश्ता में सोमवार को छपी खबर के बाद कुछ अधिकारियों ने मांगूर मछली के उत्पादनकर्ता से मिलकर मामले को दबाने के लिए रकम का लेनदेन किया
रायपुर। पूरे विश्व में जहरीली मांगूर मछली प्रतिबंधित है पर छत्तसीगढ़ में मत्स्यपालन विभाग वालों ने अपनी आंखो में हिरयाली का चश्मा लगा रखा है जिसके कारण विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी को इंगोर कर पिछले दरवाजे से रोहू, कतला, बाम, टेंगना,कोतरी, संरांगी, तेलिपया के नाम पर प्रतिबंधित मांगूर का उत्पादन कर प्रदेश की जनता को जहर परोस रहे है। जिसके कारण मांगूर खाने वाले कई प्रकार के शारीरिक रोगों से ग्रसित हो रहे है। छत्तीसगढ़ में मांगूर के उत्पादन का जनता से रिश्ता की टीम ने जगदलपुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बचेली, कोंडागांव, चरामा, नारायणपुर, माकड़ी, बालोद, गुंडरदेही, गुरूर, अर्जुनी, दुर्ग-भिलाई के के आसपास के 30-40 गांवों में प्रतिबंधित मांगूर का उत्पादन बेखौफ हो रहा है। इसके अलावा राजनांदगांव, डोंगरगढ़, बोरतलाव, कवर्धा, मुंगेली, बेमेतरा, भाठापारा, बिलासपुर, बिल्हा, रतनपुर, सिमगा, नांदघाट, अंबिकापुर, बलरामपुर, सरगुजा, बैकुंठपुर, जशपुर, मैनपाट, धमतरी, महासमुंद, सरायपाली, बसना, गरिय़ाबंद, राजिम छुरा, अभनपुर, नया रायपुर के आसपास के गांवों में चोरी छिपे नहीं खुलेआम मांगूर मछली का उत्पादन हो रहा है।
राज्य में उत्पादन के साथ ही पड़ोसी राज्यों से मांगूर मछली की तस्करी भी बड़े पैमाने पर हो रही है। गृहमंत्री के जिले में मांगुर(मोंगरा) मछली के उत्पादन करने वालों पर कार्रवाई की गई थी लेकिन अन्य जिलों में मांगुर मछली पालन करने वालों पर कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई है। जानकारी के अनुसार राजधानी से लगे खरोरा से पांच किलोमीटर दूर कोसरंगी गांव में दो किसानों द्वारा मांगुर मछली का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा रहा है। जिस पर संबंधित विभाग की नजर नहीं है, अगर है भी तो इस अवैध उत्पादन पर रोक नहीं लगाई जा रही है। गांव के लोगों का कहना है कि पुलिस और फिसरी विभाग से कई बार शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। गांव वालों ने बताया कि सुखदेव और मनीष ये दो किसान मछली पालन कर रहे हैं और इनके द्वारा मांगुर मछली का उत्पादन किया जा रहा है।
सड़े-गले मांस परोसा जाता है : मछली पालन के विशेषज्ञों की मानें तो यह मांगूर मछली को जानवरों के सड़े गले मांस खिलाए जाते है जिसके कारण यह मछली मात्र जो महीने में दो से पांच किलो तक वजनी हो जाती है। इसके खाने मात्र से लकवा सहित आखों और आंतों से संबंधित बीमारी तय माना जाता है। जिसका इलाज पूरे विश्व में कही हो ही नहीं सकता है। जिसने मांगूर काया उसका मरना तय माना लिया जाता है।





