छत्तीसगढ़

रायपुर का हृदय स्थल बूढ़ातालाब बना अपराध और नशे का अड्डा

Shantanu Roy
2 Jan 2026 7:04 PM IST
रायपुर का हृदय स्थल बूढ़ातालाब बना अपराध और नशे का अड्डा
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बूढ़ातालाब बना गुंडागर्दी और नशे का गढ़, आम लोगों का आना-जाना बंद
रायपुर का हृदय स्थल बूढ़ातालाब अब नशे के कारोबार का ठीहा
शाम ढलते ही अपराधियों के हवाले बूढ़ातालाब, परिवारों में डर
बूढ़ातालाब में खुलेआम सूखा-गीला नशा, प्रशासन की चुप्पी
हिस्ट्रीशीटर मुकेश बनिया के इशारे पर चल रहा नशे का नेटवर्क
अंधेरे का फायदा उठा रहे असामाजिक तत्व, बूढ़ातालाब असुरक्षित
बाइकर्स गैंग और नशेड़ी युवकों का अड्डा बना बूढ़ातालाब
गांजा-चरस से लेकर अवैध शराब तक, बूढ़ातालाब में सब कुछ उपलब्ध
राजधानी रायपुर की पहचान पर धब्बा बनता बूढ़ातालाब
बूढ़ातालाब में नशे का कारोबार फल-फूल रहा
हिस्ट्रीशीटर का साया: बूढ़ातालाब में अपराधियों का राज
बूढ़ातालाब: जहां सैर-सपाटा था, अब नशे का धंधा
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर का ऐतिहासिक और हृदय स्थल माने जाने वाला बूढ़ातालाब, जिसे विवेकानंद सरोवर के नाम से भी जाना जाता है, आज अपनी बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। कभी शहर की शान और लोगों के सुकून का केंद्र रहा यह स्थल अब स्थानीय लोगों के अनुसार गुंडागर्दी, नशे और
अवैध गतिविधियों
का ठीहा बनता जा रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आम नागरिकों और परिवारों का यहां आना-जाना लगभग बंद हो गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बूढ़ातालाब परिसर में शाम ढलते ही घना अंधेरा पसर जाता है। इसी अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व यहां सक्रिय हो जाते हैं। आरोप है कि रोजाना इस क्षेत्र में बाइकर्स गैंग का जमावड़ा लगता है और खुलेआम नशे का कारोबार फल-फूल रहा है। गांजा, चरस, अफीम, नशीली सिरप और अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का आरोप है कि यह पूरा नेटवर्क शहर के एक कुख्यात हिस्ट्रीशीटर मुकेश बनिया के इशारे पर चल रहा है, हालांकि पुलिस या प्रशासन की ओर से इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दे रही है।
बूढ़ातालाब में लोगों के टहलने और मनोरंजन के लिए नगर निगम द्वारा पहले कई सुविधाएं विकसित की गई थीं। पैदल पथ, बैठने की जगह, लाइटिंग और सौंदर्यीकरण के कार्यों ने कभी इस इलाके को जीवंत बना दिया था। एक समय था जब दूर-दूर से लोग शाम के समय बूढ़ातालाब का नजारा देखने आते थे, परिवार यहां घंटों समय बिताते थे और यह स्थल रायपुर की पहचान माना जाता था। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह उलट चुकी है। स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि शाम होते ही बूढ़ातालाब आम लोगों के लिए असुरक्षित हो जाता है। बाइकर्स गैंग खुलेआम स्टंट करते नजर आते हैं, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को डर का माहौल झेलना पड़ता है। कई बार आपसी विवाद, गाली-गलौच और मारपीट की घटनाएं भी सामने आई हैं, लेकिन इन पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
एक और गंभीर आरोप अवैध पार्किंग वसूली को लेकर है। बूढ़ातालाब घूमने बाइक या वाहन से पहुंचने वाले लोगों से कथित तौर पर पार्किंग संचालकों के गुंडों द्वारा मनमाने ढंग से पैसे वसूले जाते हैं। न तो कोई तय दर है और न ही कोई रसीद दी जाती है। कई बार इसका विरोध करने पर लोगों के साथ बदसलूकी की शिकायतें भी सामने आई हैं। इससे आम नागरिकों में आक्रोश है और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब बूढ़ातालाब में न तो बोटिंग की सुविधा बची है और न ही कोई ऐसा मनोरंजन का साधन, जिसकी वजह से परिवार यहां आना चाहें। पूरा क्षेत्र असामाजिक तत्वों के कब्जे में जाता दिख रहा है। नागरिकों का आरोप है कि पुलिस की नियमित गश्त न होने और निगरानी की कमी के कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
कुछ दिन पहले रायपुर शहर की महापौर ने भी बूढ़ातालाब का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मौके पर मौजूद एक नगर निगम अधिकारी को जमकर फटकार लगाई थी और व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। उस समय उम्मीद जगी थी कि हालात सुधरेंगे, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि निरीक्षण के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ। उल्टे बूढ़ातालाब की स्थिति दिन-ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है। शहर के सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि बूढ़ातालाब सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि रायपुर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर है। यदि समय रहते यहां सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह स्थल पूरी तरह अपराधियों के कब्जे में चला जाएगा।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यहां पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की जाए, सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, नियमित पुलिस पेट्रोलिंग हो और नशे के कारोबार पर कठोर कार्रवाई की जाए। वहीं, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि राजधानी के इस हृदय स्थल पर आज भी आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कुल मिलाकर, बूढ़ातालाब की मौजूदा हालत राजधानी रायपुर की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक सक्रियता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या प्रशासन और पुलिस मिलकर इस ऐतिहासिक धरोहर को फिर से उसके पुराने गौरव में लौटा पाएंगे या यह अपराध और अव्यवस्था का प्रतीक बनकर रह जाएगा।
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