छत्तीसगढ़

वरिष्ठ अधिकारी द्वारा आदिवासी महिला कर्मचारी के साथ अभद्र व्यवहार, शिकायत दर्ज

Shantanu Roy
2 Jan 2026 5:48 PM IST
वरिष्ठ अधिकारी द्वारा आदिवासी महिला कर्मचारी के साथ अभद्र व्यवहार, शिकायत दर्ज
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पीड़ित महिला ने की विभागीय जांच की मांग
Raipur. रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य आरक्षण कार्यालय में पदस्थ एक महिला कर्मचारी ने वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक अवधेश त्रिवेदी द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की शिकायत की है। महिला ने इस घटना का विवरण अपने आवेदन पत्र में प्रस्तुत करते हुए तत्काल विभागीय जांच और उचित कार्यवाही की मांग की है। आवेदन के अनुसार, घटना दिनांक 31 दिसंबर 2025 की है। महिला कर्मचारी शाम करीब 03:30 से 04:00 बजे के बीच मंडल कार्यालय पहुंची थीं। उनका उद्देश्य वरिष्ठ अधिकारी डी.सी.एम. से अपनी प्रमोशन फाइल के संबंध में चर्चा करना था। वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि डी.सी.एम. किसी कार्य में व्यस्त हैं। इसके बाद महिला ने सीनियर डी.सी.एम. अवधेश त्रिवेदी को फोन लगाकर नम्रतापूर्वक फाइल के आगे बढ़ाने के लिए अनुरोध किया।

आवेदन में बताया गया कि सीनियर डी.सी.एम. ने फोन पर कहा कि फाइल आगे बढ़ा दी गई है, लेकिन उन्होंने महिला से यह पूछते हुए कहा कि उन्हें किसने बताया कि फाइल उनके टेबल पर है। महिला ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी उन्हें कार्मिक विभाग के कर्मचारी आनंद और वाणिज्य विभाग के बृजेश से मिली है। इस पर सीनियर डी.सी.एम. अवधेश त्रिवेदी ने आवेश में आकर जोर-जोर से चिल्लाना शुरू किया। उन्होंने महिला को आँख दिखाते हुए कहा, “तुम मुझे नहीं जानती कि मैं कौन हूँ, मैं तुम्हारा सीनियर डी.सी.एम. हूँ और तुम मुझे बार-बार आरोप लगा रही हो। आप हर समय इसी तरीके का कार्य करती हो।”

वही इस मामलें में सीनियर डी.सी.एम. अवधेश त्रिवेदी ने कहा है कि उनके द्वारा ऐसी कोई भी बातें नहीं कही गई है। जिन वरिष्ठ अधिकारियों तक शिकायत की गई है वो जांच कर सकते है और वे अपने सीनियर को जवाब दे देंगे। वही सीनियर सीनियर डी.सी.एम. अवधेश त्रिवेदी ने पत्रकार के सवाल से खीज कर ये कहा कि फोन पर पत्रकारिता ना करें। मैं अपने सीनियर को जवाब दे दूंगा।

महिला ने कहा कि उन्होंने गलत जानकारी नहीं दी है और केवल कार्यालय से प्राप्त तथ्य साझा किए हैं। इसके बावजूद, सीनियर डी.सी.एम. ने ए.सी.एम. के चेम्बर में छह से सात अन्य कर्मचारियों के सामने महिला कर्मचारी को अपमानित किया। उन्होंने डाटा कर चिल्लाया और कार्यालय के कर्मचारियों के सामने उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई। आवेदन में बताया गया कि कार्यालय से बाहर निकलने के बाद भी महिला कर्मचारी को अन्य स्टाफ के सामने दोबारा अपमानित किया गया। इस घटना के बाद महिला ने मानसिक रूप से आघात का अनुभव किया और रात भर नींद नहीं ले सकीं। महिला ने लिखा कि सीनियर अधिकारी द्वारा उनके साथ झूठे आरोप लगाए गए और उन्हें बार-बार यह कहकर मानसिक पीड़ा दी गई कि वह इस तरह का कार्य हमेशा करती हैं।

महिला ने अपने आवेदन में यह भी लिखा कि लोक सेवक होने के नाते उच्च अधिकारी का कर्तव्य है कि वे कर्मचारियों के साथ संवेदनापूर्वक व्यवहार करें। किसी कर्मचारी, विशेषकर आदिवासी महिला के साथ सार्वजनिक स्थान पर अपमानजनक व्यवहार करना, विभाग और प्रशासन की प्रतिष्ठा के लिए अनुचित है। आवेदन में महिला ने आग्रह किया है कि इस मामले की विभागीय जांच कर सीनियर अधिकारी के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना से उन्हें व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों रूप से क्षति हुई है और उनकी गरिमा को ठेस पहुँची है।

इस घटना ने कार्यालय में कर्मचारियों के बीच भी चिंता पैदा कर दी है। कर्मचारी बताते हैं कि उच्च अधिकारियों के सामने सार्वजनिक रूप से अपमानित होना न केवल पीड़ित कर्मचारी के लिए बल्कि पूरे कार्यालय के माहौल के लिए भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई न होने से कर्मचारियों में असुरक्षा और मानसिक तनाव बढ़ सकता है। सरकारी कार्यालयों में समानता और सम्मान के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है। किसी भी कर्मचारी के साथ जाति, लिंग या पद के आधार पर अपमानजनक व्यवहार करना न केवल पेशेवर आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि यह कानूनन भी शिकायत का आधार बन सकता है।


महिला कर्मचारी ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया कि आदिवासी महिला होने के कारण उन्हें और भी संवेदनशील रूप से देखा जाना चाहिए था। उन्हें आशा है कि विभाग उनकी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सीनियर अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा। रेलवे प्रशासन ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। कर्मचारी सूत्रों का कहना है कि इस प्रकार की शिकायतों की जांच स्वतंत्र समिति के माध्यम से की जाती है और संबंधित अधिकारी के कार्य व्यवहार पर नोटिस जारी किया जा सकता है। सामान्यतः, रेलवे कार्यालयों में कर्मचारियों के बीच सम्मान और संवाद की महत्ता बहुत अधिक है। उच्च अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे कर्मचारियों के साथ संवाद में विनम्रता और संवेदनशीलता बनाए रखें। इस घटना ने इस आवश्यकता को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया है।

आवेदन में महिला ने विभाग से यह भी कहा कि भविष्य में किसी भी महिला या आदिवासी कर्मचारी के साथ इस प्रकार का व्यवहार न हो और विभागीय स्तर पर इस दिशा में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ। इस मामले की विभागीय जांच और कार्रवाई की निगरानी के लिए उच्च अधिकारियों के स्तर पर ध्यान दिया जा रहा है। कर्मचारियों का मानना है कि यदि उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो कार्यालय में मनोबल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और कर्मचारियों में असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है। इस घटना के प्रकाश में यह स्पष्ट है कि लोक सेवकों के लिए संवेदनशीलता, समानता और सम्मान जैसे मूल्यों का पालन करना अनिवार्य है। सीनियर अधिकारी द्वारा आदिवासी महिला कर्मचारी के साथ सार्वजनिक अपमानजनक व्यवहार न केवल व्यक्तिगत स्तर पर नुकसानदेह है, बल्कि इससे सरकारी कार्यालय की प्रतिष्ठा पर भी प्रश्न उठता है। इसलिए, महिला कर्मचारी ने अपने आवेदन के माध्यम से विभाग से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सीनियर अधिकारी के खिलाफ कड़ा कदम उठाया जाए और सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में कोई भी कर्मचारी इस प्रकार के व्यवहार का शिकार न हो।
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