छत्तीसगढ़
BIG BREAKING: भारतमाला घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, 12.78 करोड़ की संपत्तियां अटैच
Shantanu Roy
2 Aug 2026 7:24 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए 12.78 करोड़ रुपये मूल्य की 62 चल एवं अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई रायपुर-विशाखापत्तनम राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान कथित फर्जीवाड़े और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। कुर्क की गई संपत्तियों में लगभग 4.69 करोड़ रुपये के शेयर और म्यूचुअल फंड निवेश भी शामिल हैं। ईडी का दावा है कि इन संपत्तियों को कथित अपराध से अर्जित धन से खरीदा गया था या फिर वे उसी के बराबर मूल्य की संपत्तियां हैं।
रायपुर स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत 31 जुलाई 2026 को प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी करते हुए यह कार्रवाई की। एजेंसी के अनुसार, जांच में मिले दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर यह पाया गया कि भूमि अधिग्रहण मुआवजे में कथित अनियमितताओं के जरिए बड़ी मात्रा में अवैध धन अर्जित किया गया और बाद में उसे विभिन्न निवेशों एवं संपत्तियों में लगाया गया। ईडी ने इस मामले में जय प्रकाश गांधी सहित 14 अन्य लोगों के खिलाफ रायपुर स्थित विशेष पीएमएलए अदालत में सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की है। जांच एजेंसी का आरोप है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये का अवैध लाभ प्राप्त किया। बाद में इस धन को वैध दिखाने के लिए विभिन्न वित्तीय साधनों और संपत्तियों में निवेश किया गया।
ईडी की जांच की शुरुआत छत्तीसगढ़ की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) द्वारा दर्ज एफआईआर क्रमांक 30/2025 के आधार पर हुई थी। यह एफआईआर 23 अप्रैल 2025 को दर्ज की गई थी, जिसमें अभनपुर के तत्कालीन एसडीओ (राजस्व) एवं CALA निर्भय साहू समेत अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में इस मामले में विशेष न्यायालय में आरोप पत्र भी प्रस्तुत किया गया।
जांच के दौरान एजेंसी को कई अहम तथ्य मिले। ईडी के अनुसार, कुछ भूमि मालिकों, निजी व्यक्तियों, भूमि दलालों और राजस्व अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत से पूरे षड्यंत्र को अंजाम दिया गया। जांच में सामने आया कि 30 जनवरी 2020 को अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित जमीनें खरीदी गईं। इसके बाद उन जमीनों का कथित रूप से फर्जी तरीके से विभाजन किया गया ताकि अधिक मुआवजा प्राप्त किया जा सके। जमीन को कई छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के नाम बिक्री एवं दान विलेख के माध्यम से हस्तांतरित किया गया। इससे मुआवजे की राशि कई गुना बढ़ गई।
ईडी ने अपनी जांच में दावा किया है कि जय प्रकाश गांधी और उनके परिवार को लगभग 56.76 लाख रुपये के वास्तविक अधिकार के बदले करीब 9.83 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला। एजेंसी के अनुसार, इससे लगभग 9.27 करोड़ रुपये की अवैध आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) उत्पन्न हुई। जांच में यह भी सामने आया कि इस धन को कई चरणों में अलग-अलग खातों और निवेश माध्यमों से घुमाया गया। बाद में इसे अचल संपत्तियों, शेयरों, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय निवेशों में लगाया गया। इस प्रक्रिया में परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी विभिन्न फर्मों के नामों का भी उपयोग किए जाने का आरोप है।
जांच के दौरान गांव उगेतारा से जुड़ा एक और मामला भी सामने आया। ईडी के अनुसार, उमा तिवारी ने स्वयं को मृतक भूमि स्वामी की गोद ली हुई बेटी बताते हुए कथित रूप से फर्जी राजस्व अभिलेखों के आधार पर लगभग 2.13 करोड़ रुपये का मुआवजा प्राप्त किया। एजेंसी इस पूरे मामले में दस्तावेजों की वैधता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। यह पहली बार नहीं है जब ईडी ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई की हो। इससे पहले 3 जून 2026 को एजेंसी ने जय प्रकाश गांधी को पीएमएलए की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। इसके अलावा 29 दिसंबर 2025 और 27 अप्रैल 2026 को की गई तलाशी कार्रवाई के दौरान 49 लाख रुपये नकद तथा लगभग 89.80 लाख रुपये मूल्य की 37,133 ग्राम चांदी जब्त की गई थी। साथ ही भूमि दलालों के कथित सिंडिकेट से जुड़ी 23.35 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी अस्थायी रूप से कुर्क की गई थीं।
ताजा कार्रवाई के बाद इस पूरे मामले में ईडी द्वारा अब तक करीब 36.14 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और वित्तीय लेनदेन, राजस्व अभिलेखों तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। ईडी का मानना है कि भारतमाला परियोजना जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना योजना में यदि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान अनियमितताएं होती हैं तो इससे न केवल सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचता है, बल्कि परियोजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर सार्वजनिक धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। वहीं, इस मामले में आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।
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