छत्तीसगढ़
बस्तर दशहरा संकट में: तिरिया पंचायत ने रथ निर्माण के लिए लकड़ी कटाई पर लगाई रोक
Shantanu Roy
25 Aug 2025 8:09 PM IST

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Jagdalpur. जगदलपुर। दुनिया भर में अपनी अनूठी परंपरा और भव्यता के लिए प्रसिद्ध बस्तर दशहरा इस बार बड़ी पेचीदगी में फंस गया है। जगदलपुर के तिरिया ग्राम पंचायत ने रथ निर्माण के लिए जंगल से लकड़ी कटाई पर रोक लगाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल दशहरा के नाम पर 70 से 80 पुराने और विशालकाय पेड़ काटे जाते हैं, जिससे जंगल लगातार खत्म हो रहा है और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरणीय संकट गहराता जा रहा है। ग्राम पंचायत ने वन अधिकार अधिनियम 2006 का हवाला देते हुए यह निर्णय लिया और स्पष्ट किया कि बिना ग्रामसभा की अनुमति के जंगल से पेड़ नहीं काटे जा सकते। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि दशहरा के नाम पर हर साल हजारों घन फीट लकड़ी की खपत होती है, लेकिन इसके बदले में न तो पेड़ लगाए जाते हैं और न ही जंगल की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाए जाते हैं।
ग्रामसभा के इस निर्णय ने दशहरा समिति और जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। दशहरा समिति के अध्यक्ष महेश कश्यप ने कहा कि “बस्तर दशहरा हमारी 600 साल पुरानी परंपरा है। रथ निर्माण इस उत्सव का सबसे अहम हिस्सा है, लेकिन पर्यावरण भी उतना ही ज़रूरी है। हम कोशिश करेंगे कि परंपरा और पर्यावरण दोनों के बीच संतुलन बनाया जाए।” बस्तर दशहरा न सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बस्तर की पहचान और पर्यटन का बड़ा केंद्र भी है। हर साल हजारों देशी-विदेशी पर्यटक इस अनोखे उत्सव को देखने जगदलपुर आते हैं। ऐसे में रथ निर्माण पर संकट गहराने से दशहरा के आयोजन पर भी सवाल उठ खड़े हो गए हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने ग्रामसभा के फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि बस्तर दशहरा जैसी परंपरा को बचाने के लिए वैकल्पिक उपाय तलाशने होंगे। पर्यावरणविदों का सुझाव है कि रथ निर्माण में लोहे, फाइबर या अन्य पर्यावरण अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे परंपरा भी बरकरार रहे और जंगलों की सुरक्षा भी हो। दूसरी ओर, परंपरावादी ग्रामीणों और दशहरा से जुड़े पुजारियों का मानना है कि रथ सिर्फ जंगल से काटी गई पवित्र लकड़ी से ही बन सकता है। उनका कहना है कि यह उत्सव देवी-देवताओं से जुड़ा है और परंपरा के साथ समझौता करना उचित नहीं होगा। फिलहाल, जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है और पंचायत, दशहरा समिति और ग्रामीणों के बीच संवाद स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।
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