
जेम पोर्टल के माध्यम से नहीं हो रही खरीदी, कोटेशन से खरीदी लगातार जारी
पशुपालन विभाग में जिलो के माध्यम से पशु औषधी, वैक्सीन एवं फीड सप्लीमेंट की खरीदी में 10फीसदी सामग्री की आपूर्ति जिलों में लेकर बाकी सामग्री का डीलरों के माध्यम से बिल लगाकर पूरा भुगतान प्राप्त कर कई वर्षों से करोड़ो का भ्रष्टाचार जारी।
पिछले कई सालों से पशुपालन विभाग में संचालनालय स्तर से नियम विरूद्ध तरीके से भण्डार कय नियमों का खुला उल्लंघन करते हुए प्रतिवर्ष करोड़ो का भ्रष्टाचार किया जा रहा है जिसमें विभाग के कर्मचारी अधिकारी एवं स्थानीय दवा विक्रेता (डीलर) मिलकर अपने हिसाब से निविदा में नियम व शर्त डलवाकर भ्रष्टाचार कर रहें है जिससे सरकार को हर साल कई करोड़ का नुकसान हो रहा है। जिसमें पशु औषधी वैक्सीन एवं फीड सप्लीमेंट की निविदा नियम विरूद्ध तरीके से की गई जैसे कि दवा निर्माता कंपनियों से निविदा बुलाकर उनके डिलरो से आपूर्ति लिया जाता है एवं डीलरों को ही भुगतान किया जाता है जो कि नियम विरूद्ध है। उपरोक्त कार्यवाही जानबूझकर संचालनालय एवं जिला स्तर के कर्मचारी अधिकारी व स्थानीय दवा विक्रेताओं ( डीलर) से मिलकर भ्रष्टाचार कर रहें है ।
यहां यह देखा जा रहा है कि जिन कंपनियों के द्वारा पशु औषधी वैक्सीन एवं फीड सप्लीमेंट का दर निविदाओं के माध्यम से कई वर्षों से भरा जा रहा है उस दर पर दवाईयां नहीं मिल सकती जिलो के द्वारा दवाईयों की मांग कंपनियों से की जाती है।
रायपुर (जसेरि)। भाजपा के वरिष्ठ नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित पशुपालन मंत्री सहित सभी बड़े नेताओं को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई है और पूरे प्रकरण में सीबीआई जाँच पुलिस जाँच और आवश्यक जाँचें तो आवेदन दिया है पशुपालन विभाग में पशु दवाई और वैक्सीन फिर सप्लीमेंट्री खऱीदिए जो टेंडर मंगाए गए थे वेटनरी ऐलोपैथिक मेडिसिन 2025 2026 ऐसे अन्य टेंडरों के लिए विभाग के बड़े अधिकारी अपनी मनमानी का टेंडर के नियमों के विरुद्ध सप्लाई का सुचारु रूप से कार्य जारी रखें आदेश का उल्लंघन किया जा रहा है सरकार के स्पष्ट आदेश होने के बावजूद कोटेशन के द्वारा माल खऱीदा जा रहा है टेण्डर के पास हो जाने के उपरांत भी 15 फीसदी दवाइयां और वैक्सीन टेंडर के द्वारा क्रय की जा रही है बाक़ी का कोटेशन के द्वारा ही खऱीदी चालू है अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से जि़ले स्तर में इसका निष्पादन किया जा रहा है जो नियम के विपरीत है और सरकार के आदेश का खुला उल्लंघन हो रहा है जिला स्तर पर ये दवाइयों की डिमांड पैदा की जाती है और जो डीलरों के पास उपलब्ध दवाई होती है उसी का कोटेशन के द्वारा क्रय करना बताया जाता है जबकि दवाई की बिक्री न होकर से बिलों की बिक्री होती है जिससे करोड़ों रुपया शासन की राजस्व की हानि हो रही है और पशुपालकों को दवाई और वैक्सीन उसे वंचित होना पड़ रहा है ख़ाली बिल का लेन देन ग़लत दवा विक्रेता अधिकारियों को बड़ी रक़म देकर अपना उल्लू सीधा कर रहा है भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकीराम कंवर की लिखित शिकायत के उपरांत जाँच समिति के गठन किया गया था जाँच समिति का भी गठन होने के उपरांत पूरे प्रकरण को जाँच कर ही रही थी उसी दर यान उसी अधिकारी द्वारा कोटेशन से दवाइयों की खऱीदी मनमाने ढंग से की गई जाँच समिति की रिपोर्ट का भी इंतज़ार नहीं किया जबकि जाँच के लिए स्वात सचिव ने रिपोर्ट माँगी थी उस रिपोर्ट का भी इंतज़ार नहीं किया गया और अधिकारी संचालक पशुपालन चंद्रकांत वर्मा ने भी अपनी बपौती समझ कर मनमाना खऱीदी कर रहा है।
टेंडर के उप नियम 4.1 का पालन नहीं किया गया है तकनीकी विशेषज्ञों से राय नहीं ली गई है। इसी तरह नियम 4 के उप नियम 4.7 अ का पालन नहीं किया गया है सामग्री के साथ मात्रा का उल्लेख नहीं किया गया है एवं अनुमानित मूल्य भी नहीं है मनमाने तरीके से रूपये 2,00,000/- की अमानत राशि रखी गई है जबकि अनुमानित मूल्य का एक प्रतिशत लेना होता है जिसका पालन नहीं किया गया है इसी तरह नियम 4 के अप नियम 4.9 ब, स का भी पालन नहीं किया गया है निविदा समिति के द्वारा अपने चाहते ठेकेदारों को काम दिलाने कमीशन खोरी करने की नीयत से निविदा समिति ने अपने मन से निर्माता को ऑथराइज्ड डिस्ट्रीब्यूटर अपॉइंट करने के लिए बोला जा रहा है जबकि नियमों में इस तरह का कोई नियम नहीं है विभाग के अधिकारी निविदा समिति एवं आपूर्तिकर्ताओं के द्वारा नियम विरुद्ध निविदाओं को करा कर अपात्र लोगों के द्वारा आपूर्ति करने की साजिश की जा रही है भंडार कय के सभी नियमों को ताक में रखकर निविदा समिति एवं आपूर्तिकर्ताओं के द्वारा कमीशन खोरी करने के लिए नियम विरुद्ध निविदा की जा रही है पूर्व में भी इसी प्रकार निविदा की गई है दवा आपूर्तिकर्ताओं के द्वारा अपने सुविधा अनुसार निविदा की नियमों एवं शर्तों को कराकर आपूर्ति का काम लेने की तैयारी है डिस्टीब्यूटरों के द्वारा जिलों में पूरी मात्रा में दवाइयां भी सप्लाई नहीं की जाती है भुगतान पूरी मात्रा का लिया जाता है इस संबंध में प्रदेश के सभी जिलों में ऐसा ही घोटाला चल रहा है कई जिलों के विरुद्ध प्रमाणित भ्रष्टाचार पाए गए हैं नियम विरुद्ध निविदा करने निविदा समिति, जिला अधिकारियों ऑथराइज्ड डिसटीब्यूटरों के भ्रष्टाचार कर विभाग और सरकार को बदनाम कर रहे।
उसके टेंडर होने के बावजूद दवाईयां पुरी मात्रा में कंपनी वालों को सप्लाई करने के लिये कहा जाए तो वे नहीं कर सकते संचालनालय के द्वारा निविदा पूर्ण कर सभी जिले के जिला अधिकारियों को रेट कॉन्टेक्ट कय आदेश देने हेतु भेज दिया जाता है परंतु सारे जिला अधिकारी डीलरों को जो मांग पत्र देते है उसका मात्र 10 फीसदी ही पशु औषधी, वैक्सीन एवं फीड सप्लीमेंट की सप्लाई की जाती है 90 फीसदी मांग पत्र का बिल लगाकर पुरा भुगतान प्राप्त किया जाता है जिसे जिले के अधिकारी डिलरों के द्वारा आपस में मिलीभगत कर बड़ा भ्रष्टाचार किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार के पशुपालन विभाग के अंतर्गत पशुधन : स्वास्थ्य की रक्षा के लिए विभाग द्वारा फार्मोकॉपियल मेडिसिन एवं वैक्सीन का कार्य किया जाता है एवं उससे मु त में पशुओं का उपचार किया जाता है इस संबंध में संचालनालय पशुधन के द्वारा निविदा क्रमांक 3269, 3130 एवं 3887 दिनांक 26/5/2025, 20/5/2025 एवं 24/6/2025 किया गया है निविदा में भंडारकर नियमों का उल्लंघन किया गया है जिसमें नियम 3 के उप नियम 3,1,1 का पालन नहीं किया गया है जेम से खरीदी नहीं की जा रही है एवं निविदा के पूर्व वित्त विभाग से अनुमति भी नहीं ली गई है। स्वास्थ्य सचिव सचिव छत्तीसगढ़ को जनता से रिश्ता की टीम ने सहला निगार को इस नंबर पर 9111015611 पर काल लगाया गया। प्रकरण में संपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए औैर शिकायत कर जांच समिति की बिना रिपोर्ट के ही कोटेशन द्वारा खरीदी के संबंध में प्रकाशित होने वाली खबर पर पूरी जानकारी लेने के लिए काल किए थे पर उन्होंने काल रिसिव नहीं किया। लेकिन स्वास्थ्य सचिव सहला निगार के पहल पर ही जांच समिति की दवाई खरीदी प्रकरण में बनाई गई थी।





