छत्तीसगढ़

यूरिया की किल्लत के बीच अंबिकापुर गोदाम पर छापा, दो ट्रक माल गायब

Shantanu Roy
26 Aug 2025 12:38 AM IST
यूरिया की किल्लत के बीच अंबिकापुर गोदाम पर छापा, दो ट्रक माल गायब
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Surguja. सरगुजा। सरगुजा संभाग में इस समय यूरिया की भारी किल्लत बनी हुई है। किसानों को जहां सरकारी समितियों से यूरिया नहीं मिल पा रहा, वहीं निजी दुकानदार और बिचौलिए इसका जमकर ब्लैक कर रहे हैं। इस बीच सोमवार को अंबिकापुर में खरसिया रोड स्थित शंकर ट्रेडर्स के गोदाम में प्रशासनिक टीम ने छापा मारा। शिकायत मिली थी कि यहां दो ट्रक यूरिया आया, लेकिन किसानों को एक भी बोरी उपलब्ध नहीं कराई गई। जानकारी के मुताबिक, सुबह 6 बजे और फिर 11 बजे शंकर ट्रेडर्स के गोदाम में दो ट्रक यूरिया
उतारा
गया। नियम के अनुसार यूरिया की हर खेप की एंट्री POS मशीन में होना जरूरी है और उसी के बाद किसानों को वितरण किया जा सकता है। लेकिन शिकायत थी कि यूरिया किसानों को देने के बजाय सामने खड़ी पिकअप वाहनों में लोड कर बाहर भेज दिया गया। जब कृषि विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची, तब तक पूरा गोदाम खाली किया जा चुका था। दुकान के बाहर "यूरिया नहीं है" का स्टिकर तक चिपका दिया गया था। हालांकि छापे के दौरान गोदाम से 37 बोरी यूरिया जरूर बरामद हुआ। अधिकारियों ने यूरिया जब्त कर खानापूर्ति की और लौट आए, लेकिन किसानों का कहना है कि कार्रवाई केवल दिखावे की रही।
किसानों पर संकट, चार गुना दाम पर मिल रहा यूरिया
सरगुजा की सहकारी समितियों में फिलहाल यूरिया का कोई स्टॉक नहीं है। किसानों को यह खाद 266 रुपये प्रति बोरी की दर पर मिलना चाहिए, लेकिन अब यह ब्लैक मार्केट में 800 से 1000 रुपये प्रति बोरी और कुछ जगहों पर 1500 रुपये तक बेचा जा रहा है। धान की फसल में इस समय यूरिया की सबसे अधिक आवश्यकता होती है। किसान मजबूरी में चार गुना कीमत चुकाकर खाद खरीद रहे हैं। जो किसान महंगा यूरिया नहीं खरीद पा रहे, उनकी फसल बर्बाद होने के कगार पर है।
नान दमाली गांव से आए किसान कमलेश्वर खलखो ने बताया –
"हम सुबह से यूरिया मिलने की खबर सुनकर यहां आए, लेकिन दुकान वालों ने मना कर दिया। यूरिया नहीं मिलने से धान सूख रहे हैं। सोसाइटी में यूरिया खत्म है और ब्लैक में बहुत महंगा बेचा जा रहा है।" इसी तरह किसान गेंदाराम टोप्पो ने कहा "बिचौलियों के पास यूरिया जमा है और वे 1500 रुपये तक में बेच रहे हैं। इससे फसल बर्बाद हो रही है। गरीब किसान इतने दाम कैसे चुका पाएंगे? प्रशासन कार्रवाई करे, तभी राहत मिलेगी।"
ट्रकों से हो रही सीधे निजी सप्लाई
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यूरिया बनाने वाली कंपनियां अब पहले की तरह रेलवे रेक के जरिए सरकारी समितियों को सप्लाई नहीं कर रहीं। इसके बजाय सीधे ट्रकों से निजी दुकानदारों और ट्रेडिंग कंपनियों को यूरिया भेजा जा रहा है। दुकानदार किसानों को मजबूर कर अन्य महंगे उत्पाद भी लेने पर दबाव बना रहे हैं। इस वजह से सरकारी समितियों में यूरिया की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है और किसानों को निजी व्यापारियों के भरोसे रहना पड़ रहा है। यही वजह है कि बिचौलिए किसानों से मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
प्रशासन की खानापूर्ति कार्रवाई पर सवाल
गोदाम पर छापे के दौरान प्रशासनिक टीम ने यूरिया की वास्तविक आवाजाही की गहराई से जांच नहीं की। किसानों का आरोप है कि अधिकारियों ने केवल 37 बोरी यूरिया जब्त कर लिया और लौट गए, जबकि हकीकत यह है कि सुबह और दोपहर में आए दोनों ट्रकों की पूरी खेप पिकअप से बाहर भेज दी गई थी। कृषि उप संचालक पितांबर सिंह दीवान ने कहा कि बरामद यूरिया को जब्त कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि किसानों और ग्रामीणों का मानना है कि जब तक बड़े स्तर पर जांच और कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ब्लैक मार्केटिंग पर रोक नहीं लगेगी।
धान की फसल पर मंडरा रहा खतरा
वर्तमान में धान की फसल में बाढ़ आ चुकी है और इस समय यूरिया का छिड़काव बेहद जरूरी है। समय पर खाद नहीं मिलने से पौधे पीले पड़ रहे हैं और कई खेतों में धान सूखने की स्थिति आ गई है। किसानों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में यूरिया की आपूर्ति नहीं हुई तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
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