सांसद संग स्कूली बच्चों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भी किया योगाभ्यास

महासमुंद। पुरातत्व, ऐतिहासिक नगरी एवं पर्यटन स्थल सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर परिसर में ग्यारहवां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। यह आयोजन पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग रायपुर मंडल द्वारा किया गया । कार्यक्रम में रूपकुमारी चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस अवसर पर सांसद चौधरी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जो तन, मन और आत्मा का संतुलन स्थापित करता है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से आज पूरा विश्व योग की महत्ता को समझते हुए 21 जून को योग दिवस मनाता है। योग व्यक्ति को न केवल निरोग बनाता है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक सोच भी प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार योग को जन-जन तक पहुँचाने निरंतर कार्य कर रही है।उन्होंने कहा कि इसे हम दिनचर्या में शामिल करें।योग की महत्ता को पूरे विश्व में स्वीकार किया गया है। उन्होंने बताया कि 193 देशों के मौजूदगी में 177 देशों ने योग दिवस मनाए जाने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सिरपुर को यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल के रूप में स्थापित करने पुरजोर प्रयास जारी है। सांसद में भी आवाज उठाई गई है।
छत्तीसगढ़ बीज निगम के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने कहा कि ने सभी प्रदेशवासियों से योग को दैनिक जीवन में अपनाने की अपील करते हुए कहा कि "योग करें, निरोग रहें, यही हमारे जीवन की सच्ची पूँजी है।" उन्होंने कहा कि योग हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। इसे शामिल करें और स्वस्थ्य रहें। स्काउट गाइड संघ के जिलाध्यक्ष येतराम साहू ने कहा कि आज का दिन भारत के उस योग विधा को अपनाने का दिन है । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से आज योग को पूरे विश्व ने अपनाया है। आज योग को हर व्यक्ति को अपनाने की जरुरत है।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने योग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग मानव जीवन को स्वस्थ और संतुलित बनाए रखने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि योग से न केवल शारीरिक बल प्राप्त होता है, बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। यह हृदय रोग, रक्तचाप जैसी कई बीमारियों से बचाव में सहायक है।उन्होंने कहा कि योग की परंपरा भारत में अत्यंत प्राचीन रही है और आज पूरे विश्व ने इसके महत्व को स्वीकार किया है। उन्होंने योगाचार्यों के मार्गदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन योग करना चाहिए, क्योंकि "पहला सुख निरोगी काया" है। जब शरीर स्वस्थ होता है, तब जीवन के सभी कार्य—खाना, रहना, सोना, कार्य करना—सार्थक और सुखद प्रतीत होते हैं।





