छत्तीसगढ़

माओवादी डंप से मिले 20 लाख के गबन का आरोप, दो DSP जांच के घेरे में

Shantanu Roy
29 Sept 2026 6:17 PM IST
माओवादी डंप से मिले 20 लाख के गबन का आरोप, दो DSP जांच के घेरे में
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Kanker. कांकेर। जिले के आमाबेड़ा क्षेत्र के जंगलों में माओवादी डंप से बरामद करीब 20 लाख रुपये को सरकारी प्रक्रिया के तहत जमा कराने के बजाय कथित रूप से आपस में बांट लेने का मामला सामने आया है। आरोप दो तत्कालीन डीएसपी पर है। पुलिस ने मामले की प्राथमिक जांच पूरी कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है और अब आगे की कार्रवाई के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक मार्च-अप्रैल के दौरान मुरागांव क्षेत्र के जंगलों में माओवादी डंप की तलाश के लिए पुलिस टीम सर्चिंग पर निकली थी। इसी दौरान टोंडेमरका और मरमाकोनारी के जंगलों से दो अलग-अलग स्थानों पर नकदी मिलने की बात सामने आई। एक स्थान से करीब 15 लाख रुपये और दूसरे स्थान से करीब 5 लाख रुपये बरामद होने की जानकारी है।
आरोप है कि बरामद राशि को नियमानुसार जब्ती की कार्रवाई पूरी कर सरकारी खाते में जमा कराने के बजाय दोनों तत्कालीन डीएसपी ने रकम आपस में बांट ली। मामला पुलिस अधीक्षक तक पहुंचने के बाद विभागीय स्तर पर प्राथमिक जांच शुरू कराई गई। कांकेर पुलिस अधीक्षक निखिल कुमार राखेचा ने बताया कि थाना आमाबेड़ा और थाना कांकेर क्षेत्र के टोंडामरका तथा मरमाकोनारी गांवों में नक्सली डंप से बरामद लाखों रुपये के कथित गबन की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि एक स्थान से करीब 15 लाख और दूसरे स्थान से करीब 5 लाख रुपये की राशि से जुड़ा मामला है। इसकी जांच की जा रही है और जांच आगे बढ़ने के बाद विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। बताया जा रहा है कि दोनों मामलों की प्राथमिक जांच पूरी कर अगस्त महीने में रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा चुकी है।
हालांकि जांच रिपोर्ट को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। आगे की कार्रवाई उच्च अधिकारियों के निर्देश के बाद तय होने की बात कही जा रही है। सूत्रों के अनुसार दोनों तत्कालीन डीएसपी अपनी-अपनी टीम के साथ संवेदनशील नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सर्चिंग अभियान पर गए थे। इसी दौरान माओवादी डंप से नकदी मिलने की बात सामने आई। पुलिस की आंतरिक जांच में अब यह पता लगाया जा रहा है कि वास्तव में कितनी रकम बरामद हुई थी, उसकी जब्ती से संबंधित दस्तावेज तैयार किए गए थे या नहीं और राशि किस तरह इस्तेमाल या वितरित की गई।
जून-जुलाई में दोनों डीएसपी का तबादला अलग-अलग जिलों में किया जा चुका है। इनमें से एक की पदस्थापना कोरबा और दूसरे की दंतेवाड़ा में होने की जानकारी है। सूत्रों के मुताबिक आत्मसमर्पित माओवादियों से पूछताछ के दौरान भी इस मामले से जुड़ी कुछ जानकारियां सामने आने की चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में यह शिकायत भी सामने आई है कि दोनों अधिकारी आमाबेड़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में कुछ मौकों पर निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया से अलग तरीके से सर्चिंग पर गए थे। नक्सल प्रभावित इलाकों में आमतौर पर पुलिस बल और बम निरोधक दस्ते की मौजूदगी के साथ अभियान चलाया जाता है, क्योंकि इन क्षेत्रों में आईईडी और अन्य विस्फोटकों का खतरा बना रहता है।
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