छत्तीसगढ़

राहुल-सोनिया गांधी को बताया हाइब्रिड नस्ल अजय चंद्राकर ने

Shantanu Roy
11 Aug 2026 6:57 PM IST
राहुल-सोनिया गांधी को बताया हाइब्रिड नस्ल अजय चंद्राकर ने
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Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में झीरम घाटी मामले की एनआईए स्पेशल कोर्ट में चल रही सुनवाई को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के बयानों पर तीखा पलटवार करते हुए राहुल गांधी और सोनिया गांधी को लेकर ‘हाइब्रिड नस्ल’ कहा और दबे शब्दों में विदेशी होना बताया। उन्होंने कांग्रेस पर झीरम घाटी मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस के नेता खुद ही जज बन जाएं और कांग्रेस भवन से ही फैसला सुना दें।
गौरतलब है कि इसी विदेशी मुद्दे को लेकर दो दशक पहले सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री बनने नहीं दिया गया। शरद पवार और ममता बनर्जी सहित दर्जनों नेताओं ने अलग पार्टी बनाई और कांग्रेस छोड़ी।

अजय चंद्राकर ने कहा कि झीरम घाटी जैसे गंभीर मामले में न्यायिक प्रक्रिया चल रही है और ऐसे में राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस को मामले की सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है और पार्टी केवल झीरम मामले को लेकर राजनीति करना चाहती है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से अदालत की प्रक्रिया का सम्मान करने की बात कही। दरअसल, झीरम घाटी मामले की सुनवाई को लेकर कांग्रेस की ओर से भाजपा पर सवाल उठाए गए थे। कांग्रेस नेताओं के बयानों पर
प्रतिक्रिया
देते हुए चंद्राकर ने कहा कि यदि कांग्रेस को लगता है कि वह पूरे मामले का फैसला खुद कर सकती है तो उसके नेता खुद जज बन जाएं और कांग्रेस भवन से ही निर्णय सुना दें। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद और बढ़ने की संभावना है।


महिलाओं की राजनीति में भूमिका को लेकर कांग्रेस की ओर से भाजपा पर लगाए गए आरोपों पर भी अजय चंद्राकर ने पलटवार किया। कांग्रेस की ओर से कहा गया था कि भाजपा के नेता महिलाओं की राजनीति में सबसे ज्यादा दखल देते हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चंद्राकर ने कांग्रेस की राजनीतिक व्यवस्था पर ही सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस खुद महिला और महिला पुत्र के इर्द-गिर्द चल रही है। चंद्राकर ने इसी दौरान राहुल गांधी और सोनिया गांधी को लेकर ‘हाइब्रिड नस्ल’ कहा कि ये देसी नस्ल के भी नहीं हैं। भाजपा विधायक की इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।

वहीं, छत्तीसगढ़ में ‘पार्षद पति’ व्यवस्था खत्म करने से संबंधित सरकार के राजपत्र जारी होने के फैसले का अजय चंद्राकर ने समर्थन किया। उन्होंने इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय निकायों में आरक्षण की व्यवस्था की गई है और निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को स्वयं अपनी जिम्मेदारियां निभाने का अवसर मिलना चाहिए। चंद्राकर ने कहा कि नगरीय निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत और पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। ऐसे में महिला प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति या परिवार के अन्य सदस्य राजनीतिक भूमिका निभाएं, यह व्यवस्था महिला सशक्तिकरण के मूल उद्देश्य के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर राजनीतिक और गैर-राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर काम किया जाना चाहिए।

भाजपा विधायक ने कहा कि निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को अपने पद की जिम्मेदारी स्वयं संभालने और निर्णय लेने का अधिकार मिलना चाहिए। इससे स्थानीय स्तर पर महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी मजबूत होगी और महिला नेतृत्व को बढ़ावा मिलेगा। झीरम घाटी मामले की सुनवाई और महिला प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों पर अजय चंद्राकर के बयानों ने छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। एक ओर जहां झीरम मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय निकायों में महिला प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी जारी है।
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