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Ambikapur. अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर शहर में बांकी जलाशय की माइनर नहर पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। गुरुवार को खरसिया रोड स्थित श्रीगढ़ इलाके में बहुमंजिला मकानों को तोड़ने के लिए प्रशासन और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान मकान मालिकों ने कार्रवाई का विरोध करते हुए जमकर नाराजगी जताई। कई लोगों ने जमीन की नापजोख पर सवाल उठाते हुए अतिक्रमण हटाने के लिए अतिरिक्त समय देने की मांग की। प्रशासन ने तीन दिनों के अभियान में अब तक 60 लोगों का अवैध कब्जा हटाने की जानकारी दी है।
बहुमंजिला मकानों को तोड़ने पहुंचा प्रशासन, हंगामा
जानकारी के मुताबिक, अंबिकापुर के श्रीगढ़ क्षेत्र में बांकी जलाशय की माइनर नहर पर अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार को नहर की जमीन पर बने बहुमंजिला मकानों के मालिकों को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद गुरुवार को प्रशासनिक अधिकारी और जल संसाधन विभाग की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची। बड़े मकानों को तोड़े जाने की कार्रवाई को लेकर मौके पर हंगामे की स्थिति बनी रही। मकान मालिकों ने प्रशासन से मोहलत मांगी और दावा किया कि निर्माण उनकी निजी जमीन पर किया गया है।
नहर पर कब्जे से कई इलाकों में जलभराव की समस्या
बताया जा रहा है कि बांकी जलाशय की माइनर नहर पर निर्माण होने के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही थी। इसके चलते अंबिकापुर के भारत माता चौक, कुंडला वसुंधरा कॉलोनी और नेशनल हाईवे से जुड़े क्षेत्रों में लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई थी। प्रशासन और जल संसाधन विभाग का कहना है कि नहर के मूल स्वरूप को बहाल करने और पानी की निकासी सुचारु बनाने के लिए अतिक्रमण हटाना जरूरी है।
मकान मालिक बोले- अपनी जमीन पर किया निर्माण
श्रीगढ़ निवासी तुलसी राम अग्रवाल ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में उन्होंने 12.5 डिसमिल जमीन खरीदी थी। उनके मुताबिक, खरीदी गई जमीन में से सात डिसमिल हिस्से पर निर्माण किया जा रहा है, जबकि लगभग पांच डिसमिल जमीन खाली है। तुलसी राम अग्रवाल ने दावा किया कि उन्होंने नहर की जमीन पर कब्जा नहीं किया है। उनका आरोप है कि जमीन की नापजोख में गड़बड़ी की गई है और इसी आधार पर निर्माण तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है।
डेढ़ करोड़ के नुकसान का दावा
श्रीगढ़ निवासी जगदेव विश्वकर्मा ने भी प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि नहर की वास्तविक चौड़ाई 12 मीटर है, लेकिन उसे 20 मीटर बताया जा रहा है। उनका दावा है कि संबंधित जमीन उनकी पुश्तैनी संपत्ति है और उन्होंने नहर के लिए कोई मुआवजा भी नहीं लिया है। जगदेव विश्वकर्मा के मुताबिक, सही तरीके से जमीन की नापजोख किए बिना मकान तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि निर्माण तोड़े जाने पर उन्हें करीब डेढ़ करोड़ रुपए का नुकसान होगा।
तीन दिनों में 60 लोगों का अतिक्रमण हटाया
जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की संयुक्त टीम ने पिछले तीन दिनों में नहर की जमीन से 60 लोगों का अवैध कब्जा हटाने की जानकारी दी है। जांच के दौरान नहर के लिए अधिग्रहित जमीन पर कई मकान और बहुमंजिला इमारतें बनी हुई मिली हैं। जानकारी के अनुसार, कुछ भू-माफियाओं द्वारा नहर की जमीन पर कब्जा कर प्लॉटिंग के नाम पर जमीन बेचने की बात भी सामने आई है। हालांकि, संबंधित जमीनों के दस्तावेजों और बिक्री की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
200 लोगों का कब्जा चिन्हित, जारी रहेगी कार्रवाई
जल संसाधन विभाग के अनुसार, बांकी जलाशय की माइनर नहर की भूमि पर करीब 200 लोगों का कब्जा चिन्हित किया गया है। जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता अशोक निरंजन ने बताया कि नहर के मूल स्वरूप को बहाल करने के उद्देश्य से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नहर के अंतिम छोर तक कब्जा हटाने की कार्रवाई जारी रखी जाएगी। फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई के बीच मकान मालिकों की आपत्तियां और जमीन की नापजोख को लेकर विवाद बना हुआ है।
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