छत्तीसगढ़
आदिवासी बालक आश्रम अमरकोट बना बच्चों के सर्वांगीण विकास का केन्द्र
Shantanu Roy
8 April 2026 6:14 PM IST

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Mahasamund. महासमुंद। सरायपाली विकासखंड मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित आदिवासी बालक आश्रम अमरकोट ने बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पहले यहां बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ, पढ़ाई में रुचि की कमी और अनुशासनहीनता जैसी चुनौतियाँ आम थीं। समय के साथ आश्रम में कार्यरत अधीक्षक और कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों ने बच्चों के जीवन में नई ऊर्जा और दिशा का संचार किया है। आज अमरकोट आश्रम शाला बच्चों के सर्वांगीण विकास का केंद्र बन चुकी है। यहां के छोटे-छोटे बच्चे अनुशासन, संस्कार, शिष्टाचार और आत्मविश्वास के साथ अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बच्चों को बागवानी, किचन गार्डन और वृक्षारोपण जैसी गतिविधियों में शामिल किया गया, जिससे उनमें प्रकृति के प्रति लगाव और जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई। आश्रम में भोजन की गुणवत्ता में सुधार किया गया है और साफ-सफाई, रहन-सहन और नियमित दिनचर्या पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अब छात्र अपनी पढ़ाई में रुचि लेने लगे हैं। उन्हें अपने कमरे और सामान की देखभाल, स्वच्छता और अनुशासन का महत्व समझाया जा रहा है।
खेल-कूद के क्षेत्र में भी बच्चों की सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है। खो-खो, कबड्डी, क्रिकेट और बैडमिंटन के साथ-साथ पारंपरिक खेलों जैसे गोटी और पिठ्ठल में भी बच्चे उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं। इससे उनका शारीरिक और मानसिक विकास सुनिश्चित हो रहा है। दिनचर्या बच्चों के जीवन को नई दिशा दे रही है। सुबह योग और प्रार्थना से दिन की शुरुआत होती है, जिसके बाद पढ़ाई और सत्र आयोजित किए जाते हैं। शाम को प्रेरणादायक कहानियों और जीवन मूल्यों पर आधारित कार्यक्रम बच्चों को नैतिक शिक्षा देते हैं। इसके अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम, ड्राइंग और पेंटिंग जैसी गतिविधियाँ बच्चों की प्रतिभा को निखारने में मददगार साबित हो रही हैं।
अधिकारियों ने बताया कि आश्रम में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं। बच्चों में आत्मनिर्भरता, जिम्मेदारी और टीम भावना विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप अब बच्चे न केवल पढ़ाई और खेलों में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, बल्कि सामाजिक और नैतिक मूल्यों में भी सुधार दिख रहा है। अध्यक्ष ने कहा कि यह प्रयास केवल आश्रम तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में और अधिक गतिविधियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों की क्षमताओं का विकास किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह आदर्श मॉडल अन्य बालक आश्रमों के लिए प्रेरणास्त्रोत बनेगा। आश्रम के बच्चों की उपलब्धियों और उनकी सकारात्मक जीवनशैली ने अमरकोट आश्रम को बच्चों के सर्वांगीण विकास का आदर्श केंद्र बना दिया है। यहां का अनुशासन, साफ-सफाई, खेल-कूद, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों का समन्वय बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।
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