
x
छग
Raipur/New Delhi. रायपुर/नई दिल्ली। भारत ने आज अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रविवार को अपने सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान ‘बाहुबली रॉकेट’ LVM3-M5 के माध्यम से भारतीय नौसेना के अत्याधुनिक संचार उपग्रह GSAT-7R (CMS-03) को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया। यह प्रक्षेपण भारत के रक्षा और संचार तंत्र को नई दिशा और मजबूती प्रदान करेगा। यह मिशन श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया। उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद रॉकेट ने उपग्रह को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में सटीक रूप से स्थापित किया। GSAT-7R अब तक का ISRO द्वारा प्रक्षेपित सबसे भारी संचार उपग्रह है।
भारत के लिए गर्व का क्षण, टीम ISRO को हार्दिक बधाई !
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) November 2, 2025
भारत के ‘बाहुबली’ प्रक्षेपण यान #LVM3M5 ने आज भारतीय नौसेना के सबसे उन्नत संचार उपग्रह GSAT-7R (CMS-03) को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया है। यह ISRO द्वारा प्रक्षेपित अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह है जो… pic.twitter.com/Fv1riHnO0M
जिसे विशेष रूप से भारतीय नौसेना की सामरिक संचार और समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness) को मजबूत करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। ISRO वैज्ञानिकों के मुताबिक, GSAT-7R उपग्रह नौसेना को महासागरों में वास्तविक समय संचार, जहाजों और विमानों की ट्रैकिंग जैसी अत्याधुनिक क्षमताएं प्रदान करेगा। यह उपग्रह GSAT-7 और GSAT-7A श्रृंखला का हिस्सा है, जिसे रक्षा बलों की नेटवर्क-केंद्रित ऑपरेशंस को सक्षम बनाने के लिए तैयार किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सफलता पर ISRO और देश के वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि “यह मिशन भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता, रक्षा सशक्तिकरण और अंतरिक्ष विज्ञान में नई ऊंचाइयों का प्रतीक है। भारत आज धरती से लेकर अंतरिक्ष तक अपने दम पर नई कहानी लिख रहा है।” रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि GSAT-7R की सफलता से भारत की नौसेना को हिंद महासागर से लेकर दूर-दराज समुद्री सीमाओं तक बेहतर नियंत्रण और समन्वय की सुविधा मिलेगी। यह उपग्रह भविष्य में मानवरहित प्रणालियों, सैटेलाइट नेविगेशन और इंटेलिजेंस सर्विलांस मिशनों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।
ISRO के अध्यक्ष ने भी इस उपलब्धि को “भारत की अंतरिक्ष और रक्षा साझेदारी की दिशा में बड़ा कदम” बताया। उन्होंने कहा कि LVM3-M5 रॉकेट ने एक बार फिर अपनी विश्वसनीयता और शक्ति साबित की है। इस मिशन के साथ भारत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह अब वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष तकनीक और रक्षा उपग्रह प्रक्षेपण में अग्रणी देशों की पंक्ति में मजबूती से खड़ा है। इसरो के वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि न केवल विज्ञान और तकनीक की जीत है, बल्कि यह भारत की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम भी है। देशभर में इस मिशन की सफलता पर गर्व और उत्साह का माहौल है।
TagsISROLVM3-M5 लॉन्चGSAT-7R उपग्रहभारतीय नौसेना संचार उपग्रहबाहुबली रॉकेटभारत अंतरिक्ष मिशननरेंद्र मोदीरक्षा सशक्तिकरणइसरो की सफलताश्रीहरिकोटा लॉन्चभारत स्पेस टेक्नोलॉजीMaritime Domain AwarenessGSAT सीरीजभारतीय उपग्रह प्रक्षेपणISRO newsIndia Space AchievementLVM3 rocket launchLVM3-M5 launchGSAT-7R satelliteIndian Navy communication satelliteBahubali rocketIndia space missionNarendra Modidefence empowermentISRO successSriharikota launchIndia space technologyGSAT seriesIndian satellite launch
Next Story





