छत्तीसगढ़

रायगढ़ गैंगरेप केस में 6 दोषी, दो को उम्रकैद की सजा

Shantanu Roy
29 Sept 2026 7:27 PM IST
रायगढ़ गैंगरेप केस में 6 दोषी, दो को उम्रकैद की सजा
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Raigarh. रायगढ़। पुसौर थाना क्षेत्र में वर्ष 2024 में महिला के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय (एट्रोसिटी एक्ट), रायगढ़ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने छह आरोपियों को दोषी ठहराते हुए दो आरोपियों को आजीवन कारावास और चार आरोपियों को 20-20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। फैसला 28 सितंबर 2026 को सुनाया गया। अदालत ने आरोपी सच्चिदानंद साहू उर्फ मुन्नू और उत्तम मिरधा को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(v) के तहत आजीवन कारावास से दंडित किया है। वहीं कृष्णा उर्फ राहुल चौहान, नरेन्द्र उर्फ छोटू सिदार, बबलू चौहान और राहुल खड़िया को भारतीय न्याय संहिता की धारा 70(1) तथा धारा 190 के तहत 20-20 वर्ष के कारावास की सजा दी गई है। अभियोजन के अनुसार घटना 19 अगस्त 2024 की शाम की है। पीड़िता अकेले पैदल मेला देखने जा रही थी। इसी दौरान मुख्य मार्ग पर उसकी मुलाकात पूर्व परिचित कृष्णा उर्फ राहुल चौहान और उसके साथियों से हुई।

आरोप है कि आरोपी महिला को जबरन तालाब की ओर ले गए, जहां अन्य युवक भी पहुंच गए। अभियोजन के मुताबिक आरोपियों ने महिला के साथ बारी-बारी से बलपूर्वक दुष्कर्म किया। घटना के बाद उसे धमकाते हुए अपने साथ ले जाने का प्रयास भी किया गया। किसी तरह पीड़िता वहां से निकलकर गांव की महिलाओं के पास पहुंची और पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद सरपंच को सूचना दी गई और अगले दिन 20 अगस्त 2024 को पुसौर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मामले में अपराध क्रमांक 194/2024 दर्ज कर भारतीय न्याय संहिता की धारा 70(1), 140(3), 351(3) के तहत विवेचना शुरू की गई। पुलिस जांच के दौरान कुल नौ आरोपियों की पहचान हुई। इनमें आठ को पकड़ा गया, जबकि दो विधि से संघर्षरत बालक पाए गए। एक अन्य विधि से संघर्षरत बालक फरार था, जिसकी बाद में मृत्यु होने के कारण उसे प्रकरण से पृथक किया गया। दो विधि से संघर्षरत बालकों के खिलाफ अलग से किशोर न्यायालय में चालान पेश किया गया। मामले की प्रारंभिक विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी पुसौर निरीक्षक रोहित बंजारे ने की, बाद में तत्कालीन CSP रायगढ़ आकाश शुक्ला ने जांच आगे बढ़ाई।

विवेचना के दौरान आरोपी सच्चिदानंद साहू उर्फ मुन्नू और उत्तम मिरधा के खिलाफ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)(s), 3(1)(r) और 3(2)(v) भी जोड़ी गई। जांच पूरी होने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। पुलिस के अनुसार वर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में प्रकरण के सभी साक्षियों की समय पर न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराई गई। विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल ने मामले में
अभियोजन पक्ष
की ओर से पैरवी की। सभी साक्ष्यों और दलीलों पर सुनवाई के बाद विशेष न्यायालय ने छह आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने पीड़िता को क्षतिपूर्ति योजना के तहत नियमानुसार प्रतिकर राशि प्रदान करने की अनुशंसा भी की है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि महिलाओं और कमजोर वर्ग के विरुद्ध गंभीर अपराधों में पुलिस संवेदनशीलता और गंभीरता से कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि साक्ष्य आधारित विवेचना, आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारी और न्यायालय में प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिकता है।
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