छत्तीसगढ़
पूना मारगेम पहल के तहत 37 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता: CM साय
Shantanu Roy
30 Nov 2025 7:17 PM IST

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छग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की गई है। पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन जैसी दूरदर्शी नीति के तहत आज 37 माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हुए, जिसे राज्य सरकार और सुरक्षा बलों की सतत रणनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। यह समर्पण केवल संख्या नहीं, बल्कि बस्तर में शांति और विकास की ओर बढ़ते कदम का प्रतीक है। राज्य सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अब तक पूरे छत्तीसगढ़ में 487 से अधिक नक्सली न्यूट्रलाइज, 1849 से ज्यादा गिरफ्तार, और 2250 से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह बदलाव उस संगठित और निरंतर अभियान का परिणाम है, जिसमें पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने मैदान में मजबूती से काम किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार बस्तर क्षेत्र में आत्मसमर्पण की बढ़ती संख्या इस ओर संकेत करती है कि सुरक्षा बलों की रणनीति ने जमीनी स्तर पर गहरा प्रभाव डाला है। लगातार दबाव, विकास कार्यों की तेज रफ्तार और पुनर्वास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ने माओवादी कैडरों में विश्वास पैदा किया है कि मुख्यधारा में लौटकर बेहतर भविष्य संभव है। आज आत्मसमर्पण करने वाले 37 माओवादी भी वर्षों से जंगलों में सक्रिय थे। प्रशासन और पुलिस की ओर से बताया गया कि इनमें कुछ माओवादियों पर गंभीर वारदातों में शामिल होने के आरोप भी हैं। इसके बावजूद सरकार की पुनर्वास नीति मानवीय दृष्टिकोण के साथ उन्हें समाज में नई शुरुआत का अवसर दे रही है।
बस्तर में उभरते परिवर्तन को लेकर अधिकारी भी आशावादी हैं। उनका कहना है कि “नक्सल हिंसा की जगह अब बस्तर में शांति, भाईचारा और विकास की संस्कृति मजबूत हो रही है।” गांवों में सड़कें, स्कूल, बिजली, इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्वास्थ्य सेवाएं तेजी से बढ़ रही हैं। इससे आमजन में विश्वास पैदा हो रहा है कि विकास ही वास्तविक रास्ता है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि पूना मारगेम, नियद नेल्ला नार और राज्य की अन्य पुनर्वास नीतियों के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों को सुरक्षा, आजीविका, प्रशिक्षण और पुनर्वास की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। यह पहल उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने और रोजगार प्राप्त करने का अवसर देती है।
सुरक्षा बलों का मानना है कि माओवादी कैडर अब कमजोर पड़ रहा है क्योंकि लगातार हो रहे आत्मसमर्पण ने संगठन की आंतरिक संरचना को नुकसान पहुंचाया है। डर और अविश्वास का माहौल बढ़ा है, वहीं सरकार की योजनाएं आम जनता को सुरक्षा का भरोसा दे रही हैं। बस्तर में आज की यह घटना केवल एक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि एक नई सुबह की शुरुआत है। ऐसी सुबह जो विकास, समृद्धि और स्थायी शांति की ओर तेजी से बढ़ते छत्तीसगढ़ की कहानी लिख रही है।
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