छत्तीसगढ़
कोरबा में मिलीं 16वीं शताब्दी की 27 कल्चुरीकालीन पांडुलिपियां, डिजिटल संरक्षण शुरू
Shantanu Roy
24 May 2026 9:32 PM IST

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Korba. कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के ज्ञानभारतम् मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक खोज हुई है। राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के दौरान 16वीं शताब्दी की 27 कल्चुरीकालीन हस्तलिखित पांडुलिपियां मिली हैं। इस खोज को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह सर्वेक्षण कलेक्टर कुणाल दूतावात के मार्गदर्शन में रानी रोड पुरानी बस्ती स्थित राजगढ़ी में किया गया। ज्ञानभारतम् मिशन के जिला समन्वयक सतीश प्रकाश सींग के नेतृत्व में यह पांडुलिपियां कोरबा की अंतिम शासिका स्वर्गीय रानी धनराज कुंवर देवी के नाती रविभूषण प्रताप सिंह के निवास से प्राप्त हुईं।
जानकारी के अनुसार, मिली पांडुलिपियों में धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के कई दुर्लभ ग्रंथ शामिल हैं। इनमें श्रीमद्भागवत पुराण और सुखसागर के बारहवें स्कंध से संबंधित पांडुलिपियां प्रमुख हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये पांडुलिपियां कल्चुरीकालीन इतिहास और उस समय की धार्मिक परंपराओं की महत्वपूर्ण जानकारी देती हैं। सभी पांडुलिपियों को मौके पर ही “ज्ञानभारतम् ऐप” के माध्यम से डिजिटल रूप में सुरक्षित किया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिए इन दुर्लभ धरोहरों को भविष्य के लिए संरक्षित किया जा सकेगा।
जिला समन्वयक के अनुसार, पांडुलिपियां मोटे पुराने कागज पर काली स्याही से लिखी गई हैं। इनमें देवनागरी और संस्कृत भाषा का उपयोग किया गया है। कई पांडुलिपियां इतनी पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं कि उन्हें छूने पर कागज टूटने लगता है। इनकी खराब स्थिति को देखते हुए राजपरिवार ने इन्हें वर्षों से लाल कपड़े में लपेटकर पूजा घर में सुरक्षित रखा हुआ था। बताया जा रहा है कि धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर इनका वाचन किया जाता था। लगभग 20 साल बाद इन्हें पहली बार बाहर निकाला गया और विशेषज्ञों द्वारा जांच की गई।
पांडुलिपियों के ऐतिहासिक महत्व की पुष्टि के लिए वरिष्ठ इतिहासकार और भाषाविद डॉ. रमेन्द्रनाथ मिश्र से भी चर्चा की गई। उनकी ओर से दी गई जानकारी और ऐतिहासिक विवरण को भी ज्ञानभारतम् ऐप में दर्ज किया गया है। सर्वेक्षण के दौरान एक और महत्वपूर्ण खोज सामने आई। टीम को 19वीं शताब्दी में कोलकाता के एक छापाखाने से प्रकाशित स्कंध पुराण की लगभग 300 पृष्ठों वाली एक दुर्लभ प्रति भी मिली। यह प्रति भी काफी जर्जर हालत में पाई गई, जिसका डिजिटल संरक्षण किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की पांडुलिपियां भारतीय इतिहास, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। डिजिटल संरक्षण के बाद इन दस्तावेजों को राष्ट्रीय स्तर पर अभिलेखित किया जाएगा, जिससे शोधकर्ताओं और आने वाली पीढ़ियों को भी इसका लाभ मिल सकेगा। ज्ञानभारतम् मिशन के अधिकारियों के अनुसार, देशभर में प्राचीन पांडुलिपियों को खोजने और संरक्षित करने का अभियान चलाया जा रहा है। कोरबा में मिली यह खोज छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान देने वाली मानी जा रही है। फिलहाल इन सभी पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने और उनके विस्तृत अध्ययन की प्रक्रिया जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे की जांच में इनसे जुड़े और भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य सामने आ सकते हैं।
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