छत्तीसगढ़
ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध में 1200 मेडिकल दुकानें बंद, 3 करोड़ का कारोबार प्रभावित
Shantanu Roy
21 May 2026 11:23 PM IST

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छग
Bilaspur. बिलासपुर। Bilaspur जिले में ऑनलाइन फार्मेसी और अवैध दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को व्यापक असर देखने को मिला। जिले की करीब 1200 निजी मेडिकल दुकानें एक दिन के लिए बंद रहीं, जिससे पूरे शहर और संभाग में दवा कारोबार पर बड़ा असर पड़ा। अनुमान के अनुसार लगभग 3 करोड़ रुपये का व्यापार प्रभावित हुआ। यह हड़ताल ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर की गई थी। हड़ताल के चलते तेलीपारा, सदर बाजार, व्यापार विहार, मुंगेली नाका और सरकंडा जैसे प्रमुख मेडिकल बाजारों में पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहा। मेडिकल स्टोर बंद होने से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
दवा दुकानों के बंद रहने के कारण मरीजों की भीड़ रेडक्रॉस, श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर और जन औषधि केंद्रों में बढ़ गई। यहां लोगों को दवाएं खरीदने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा। कई मरीजों को डॉक्टर द्वारा लिखी गई ब्रांडेड दवाएं नहीं मिल सकीं, जिसके चलते उन्हें वैकल्पिक या जेनेरिक दवाओं पर निर्भर रहना पड़ा। मुंगेली नाका स्थित धन्वंतरी स्टोर में शुगर और बीपी के मरीजों को भी परेशानी झेलनी पड़ी। कई मरीजों को अलग ब्रांड की दवाएं लेकर काम चलाना पड़ा। अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजनों को भी दवाओं की उपलब्धता को लेकर भटकना पड़ा।
शिशु भवन अस्पताल में भर्ती एक बच्चे के लिए जरूरी दवा उपलब्ध न होने पर परिजनों को कई जगह चक्कर लगाने पड़े। बाद में दवा विक्रेता संघ की हेल्पलाइन के माध्यम से दवा उपलब्ध कराई गई, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो सकी। दोपहर में जिला औषधि विक्रेता संघ ने कलेक्टोरेट पहुंचकर प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर संजय अग्रवाल की अनुपस्थिति में प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए ऑनलाइन फार्मेसी पर रोक लगाने और अवैध दवा बिक्री पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई।
ज्ञापन सौंपने वालों में संघ अध्यक्ष राकेश शर्मा, सचिव सच्चिदानंद तिर्थानी, हरेंद्र सिंह, विशाल गोयल, पवन छाबड़ा और संजय महोबे सहित बड़ी संख्या में दवा व्यापारी शामिल रहे। दवा विक्रेताओं ने अपनी चार प्रमुख मांगें भी रखीं। इनमें ऑनलाइन दवा बिक्री पर सख्त कानूनी नियंत्रण, बिना वैध ई-प्रिस्क्रिप्शन होम डिलीवरी पर रोक, कोविड काल में जारी ऑनलाइन बिक्री संबंधी नियमों को वापस लेने और भारी छूट के जरिए हो रही प्रतिस्पर्धा पर रोक लगाने की मांग शामिल है। हालांकि इस दौरान कुछ राहत भी देखने को मिली। अपोलो फार्मेसी की 15 में से चार दुकानें खुली रहीं, जबकि रेडक्रॉस, धन्वंतरी मेडिकल स्टोर और जन औषधि केंद्रों के माध्यम से मरीजों को दवाएं उपलब्ध कराई गईं।
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