बिहार

पीएम आवास योजना की सूची में नाम नहीं आने पर महिलाओं का प्रदर्शन

Kavita2
7 Oct 2026 6:04 PM IST
पीएम आवास योजना की सूची में नाम नहीं आने पर महिलाओं का प्रदर्शन
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बक्सर। प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में नाम जुड़वाने के लिए कथित तौर पर पैसे देने के बावजूद नाम शामिल नहीं होने से नाराज अरियाव पंचायत की दर्जनों महिलाएं बुधवार को प्रखंड कार्यालय पहुंचीं। महिलाओं ने प्रखंड विकास पदाधिकारी मोनालिसा प्रियदर्शनी से मुलाकात कर अपनी शिकायत दर्ज कराई और पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

महिलाओं का आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने और सूची में नाम जुड़वाने के नाम पर उनसे दो-दो हजार रुपये लिए गए थे। पैसे देने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि आवास योजना की नई सूची में उनका नाम शामिल होगा, लेकिन सूची जारी होने के बाद जब उन्होंने जांच की तो अपना नाम नहीं पाया। इसके बाद महिलाओं ने सामूहिक रूप से प्रखंड कार्यालय पहुंचकर शिकायत करने का फैसला किया।

शिकायत लेकर पहुंची महिलाओं ने बताया कि वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं और लंबे समय से पक्के आवास की उम्मीद लगाए बैठी हैं। महिलाओं के अनुसार उन्हें बताया गया था कि राशि देने के बाद आवास योजना की सूची में नाम जुड़ जाएगा। इसी भरोसे में उन्होंने कथित रूप से दो हजार रुपये दिए, लेकिन लाभार्थी सूची में नाम नहीं आने से वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं।

महिलाओं ने प्रखंड विकास पदाधिकारी मोनालिसा प्रियदर्शनी के सामने अपनी बात रखते हुए संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उनका कहना था कि यदि आवास योजना के नाम पर किसी व्यक्ति ने उनसे पैसा लिया है तो उसकी पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए और पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिया जाना चाहिए।

शिकायत करने पहुंची सभी महिलाएं दलित परिवारों से बताई गई हैं। उनका कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके लिए पक्का मकान बनवाना संभव नहीं है। ऐसे में प्रधानमंत्री आवास योजना ही उनके लिए पक्का घर पाने की उम्मीद है।

महिलाओं का आरोप है कि सूची में नाम जुड़वाने की बात कहकर उनसे रकम ली गई, लेकिन सूची आने के बाद भी स्थिति नहीं बदली। महिलाओं ने यह भी मांग की कि प्रशासन यह जांच करे कि रकम किसने और किस आधार पर ली थी।

मामला सामने आने के बाद प्रखंड स्तर पर आवास योजना के लाभार्थियों के चयन और सूची तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र लाभार्थियों का चयन निर्धारित मानकों और सर्वे के आधार पर किया जाता है। योजना में नाम शामिल कराने के लिए किसी को पैसा देने का प्रावधान नहीं है।

ऐसे में महिलाओं की शिकायत यदि जांच में सही पाई जाती है तो यह गंभीर अनियमितता का मामला हो सकता है। फिलहाल आरोपों की प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि पैसे किसने लिए और लाभार्थी सूची में महिलाओं का नाम क्यों नहीं आया।

महिलाओं ने बीडीओ को बताया कि उन्होंने आवास मिलने की उम्मीद में किसी तरह पैसे की व्यवस्था की थी। गरीब परिवारों के लिए दो हजार रुपये की रकम भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में पैसा देने के बावजूद योजना का लाभ नहीं मिलने से उनमें नाराजगी है।

प्रखंड कार्यालय पहुंची महिलाओं ने एक साथ अपनी शिकायत रखते हुए कहा कि मामले को केवल सूची में नाम छूटने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि पैसे लेने के आरोप की भी जांच की जाए।

उन्होंने मांग की कि अगर वे योजना की पात्रता पूरी करती हैं तो उनके दस्तावेजों और स्थिति की जांच कर नाम सूची में शामिल करने की प्रक्रिया की जाए।

प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और आवासविहीन परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। ग्रामीण क्षेत्रों में पात्र परिवारों की पहचान सर्वे और निर्धारित मानकों के आधार पर की जाती है। अंतिम सूची में नाम आने के बाद ही लाभार्थियों को योजना के तहत सहायता मिलने की प्रक्रिया शुरू होती है।

अरियाव पंचायत की महिलाओं का कहना है कि उनके पास पर्याप्त आवास नहीं होने के कारण उन्होंने योजना में नाम जुड़ने की उम्मीद लगाई थी। सूची जारी होने के बाद नाम गायब देखकर वे परेशान हो गईं।

बुधवार को बड़ी संख्या में महिलाओं के एक साथ प्रखंड कार्यालय पहुंचने से मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया। बीडीओ के सामने महिलाओं ने बारी-बारी से अपनी शिकायत रखी और पैसे देने से जुड़ी जानकारी भी दी।

प्रखंड विकास पदाधिकारी से महिलाओं ने मांग की कि पंचायत स्तर पर आवास योजना से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। किस व्यक्ति का नाम सूची में शामिल किया गया है, पात्रता किस आधार पर तय हुई और शिकायत करने वाली महिलाओं के नाम क्यों नहीं आए, इसकी भी जांच हो।

महिलाओं ने कहा कि यदि उनका नाम पात्रता के अभाव में नहीं आया है तो उन्हें इसका स्पष्ट कारण बताया जाए। वहीं यदि वे पात्र हैं और फिर भी नाम सूची से गायब है तो सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।

इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर आरोप आवास योजना के नाम पर पैसे लिए जाने का है। हालांकि महिलाओं की ओर से लगाए गए आरोपों की अभी जांच होनी बाकी है और जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।

प्रशासन के सामने अब यह पता लगाने की जिम्मेदारी है कि महिलाओं ने वास्तव में किस व्यक्ति को रकम दी और क्या उसने आवास योजना में नाम जोड़ने का भरोसा दिया था।

यदि कोई सरकारी कर्मचारी, पंचायत प्रतिनिधि या बिचौलिया इसमें शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

मामले में दस्तावेज, लाभार्थी सूची और शिकायतकर्ताओं के बयान महत्वपूर्ण होंगे। महिलाओं से भी पैसा देने से संबंधित उपलब्ध प्रमाण मांगे जा सकते हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बेहद महत्वपूर्ण है। पात्र लाभार्थी तक बिना किसी अवैध लेन-देन के योजना का लाभ पहुंचना ही इसका उद्देश्य है।

अरियाव पंचायत का मामला सामने आने के बाद अन्य लाभार्थियों की शिकायतों की भी समीक्षा की जरूरत पड़ सकती है। यदि इसी तरह के और आरोप सामने आते हैं तो जांच का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

महिलाओं का कहना है कि वे केवल अपना पैसा वापस पाने की मांग नहीं कर रही हैं, बल्कि पात्र होने पर उन्हें आवास योजना का लाभ भी चाहिए।

प्रखंड कार्यालय में शिकायत के दौरान महिलाओं ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई की अपील की। उनका कहना था कि लंबे समय तक इंतजार करने के बाद जब सूची आई तो उसमें नाम नहीं होने से उन्हें निराशा हुई।

अब उनकी उम्मीद प्रशासनिक जांच पर टिकी है। जांच में यह देखा जाएगा कि लाभार्थी चयन प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई या नहीं और पैसे लेने के आरोप में कितनी सच्चाई है।

फिलहाल अरियाव पंचायत की दर्जनों महिलाओं ने बीडीओ मोनालिसा प्रियदर्शनी के सामने औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है। महिलाओं ने पूरे मामले की जांच, पैसे लेने वाले की पहचान और पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।

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