बिहार

बीजेपी और पीके दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर

Saba Naaz
4 July 2026 6:24 PM IST
बीजेपी और पीके दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर
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पटना: बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बनता जा रहा है। यह चुनाव सिर्फ एक सीट तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी राजनीतिक समीकरणों का बड़ा संकेत भी माना जा रहा है। भाजपा के लिए यह अपनी मजबूत साख बचाने की लड़ाई है, जबकि जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने की चर्चाओं ने मुकाबले को और अधिक रोचक बना दिया है। यह सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा में जाने के बाद खाली हुई है। नितिन नवीन लंबे समय से इसी सीट से विधायक रहे हैं और उन्होंने यहां भाजपा का मजबूत जनाधार तैयार किया है। इसी वजह से बांकीपुर को पार्टी का परंपरागत और सुरक्षित गढ़ माना जाता रहा है।

करीब चार दशकों से इस सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। शहरी क्षेत्र होने के कारण यहां पार्टी का वोट बैंक मजबूत माना जाता है। हालांकि इस बार राजनीतिक हालात पहले जैसे नहीं हैं और विपक्ष भी पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है। भाजपा के लिए यह उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। पार्टी अपनी संगठनात्मक ताकत और सरकार के विकास कार्यों को प्रमुख मुद्दा बनाकर जनता के बीच जाएगी। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और बड़े नेताओं के प्रचार अभियान की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

वहीं दूसरी ओर सबसे ज्यादा चर्चा प्रशांत किशोर को लेकर है। जनसुराज पार्टी के सूत्रों के अनुसार उन्हें बांकीपुर से उम्मीदवार बनाया जा सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है। अगर वे मैदान में उतरते हैं तो यह मुकाबला भाजपा और जनसुराज के बीच सीधी टक्कर में बदल सकता है। जनसुराज का कहना है कि शहर की मूल समस्याएं जैसे ट्रैफिक जाम, जलजमाव, सफाई, पार्किंग और रोजगार इस चुनाव के मुख्य मुद्दे होंगे। पार्टी का दावा है कि जनता बदलाव चाहती है और स्थानीय मुद्दों पर चुनाव होने पर मुकाबला बेहद करीबी हो सकता है।

महागठबंधन भी इस सीट पर अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। राजद और कांग्रेस मिलकर मजबूत उम्मीदवार उतारने पर विचार कर रहे हैं, जिससे यह मुकाबला त्रिकोणीय भी हो सकता है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह उपचुनाव आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बिहार की राजनीति का रुख तय कर सकता है। अगर भाजपा अपनी इस मजबूत सीट को बचा लेती है तो उसका मनोबल बढ़ेगा, वहीं विपक्ष की मजबूत चुनौती से राज्य की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है।

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